- अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
- गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
- मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
- सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
- ग़ैरों पे करम-अपनों पे सितम? पाकिस्तान को नसीहत देने से पहले भारत को भी आईना देखने की ज़रूरत
- जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है
- मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है
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भोपाल के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलकर “मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है। यह उस बड़े सवाल से जुड़ा हुआ है कि भारत अपने इतिहास को किस तरह याद रखना चाहता है और किन लोगों को अपनी सामूहिक स्मृति में जगह देना चाहता है। किसी विश्वविद्यालय का नाम केवल एक बोर्ड पर लिखा हुआ शब्द नहीं होता। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें वह इतिहास, विचार, संघर्ष और उन व्यक्तित्वों की विरासत का प्रतीक होता है जिनके नाम पर संस्थान खड़े किए जाते हैं। इसलिए जब किसी स्वतंत्रता…
पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) की बड़ी जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं है, बल्कि इसने भारतीय राजनीति में एक पुरानी बहस को भी फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है-ईवीएम बनाम बैलेट पेपर। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के इन चुनावों में AAP ने 1,977 में से 958 वार्ड जीतकर स्पष्ट बढ़त हासिल की। कांग्रेस काफी पीछे रही, जबकि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने इसे अपनी…
गुजरात में 70 वर्षीय ज़हीरुद्दीन शेख की कथित हिरासत में मौत और बिहार के मधुबनी में 66 वर्षीय इस्लाम नदाफ की कथित भीड़ हिंसा में मौत, दो अलग-अलग राज्यों की घटनाएं हैं। लेकिन इन दोनों मामलों में एक समानता दिखाई देती है कि परिवारों का यह आरोप कि उन्हें समय पर न्याय नहीं मिला, उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और संस्थाओं से उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ज़हीरुद्दीन शेख को गुजरात पुलिस ने गो-हत्या से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। कुछ ही घंटों बाद…
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार के बाद जिस तरह पार्टी के भीतर असंतोष, नेताओं पर हमले, विधायकों की बर्खास्तगी और राजनीतिक खींचतान सामने आ रही है, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बंगाल की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है। अभिषेक बनर्जी पर अंडे फेंके जाने की घटना हो, सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा खुद पर हमले का दावा हो या फिर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों को निष्कासित करने का फैसला।…
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीडीएसए) द्वारा आज तक के एक कार्यक्रम को लेकर की गई टिप्पणी सिर्फ़ एक टीवी शो की आलोचना नहीं है, बल्कि भारतीय मीडिया के एक बड़े संकट की ओर इशारा करती है। ताजमहल को कथित तौर पर मंदिर बताए जाने वाले दावों को बिना पर्याप्त तथ्यात्मक संतुलन के प्रसारित करने पर मीडिया नियामक संस्था ने साफ़ कहा है कि कार्यक्रम निष्पक्षता और तटस्थता के मानकों पर खरा नहीं उतरा। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ़ एक गलती थी, या फिर पिछले एक दशक में टीवी न्यूज़ का एक स्थापित पैटर्न बन चुका है?…
मुंबई के मीरा रोड स्थित पूनम क्लस्टर सोसाइटी में बकरीद से पहले जो घटनाक्रम सामने आया, वह केवल एक स्थानीय विवाद नहीं था। यह उस व्यापक सामाजिक और राजनीतिक माहौल की झलक है, जिसमें भारत के मुसलमानों की धार्मिक पहचान, उनके त्योहारों और उनकी सामाजिक मौजूदगी को लगातार विवाद का विषय बनाया जा रहा है। मीरा रोड के घटना की शुरुआत एक ऐसे पंडाल से हुई, जहां हर साल की तरह मुस्लिम परिवार ईद-उल-अज़हा से पहले अपने बकरों को रखते थे। वर्षों से यह व्यवस्था बिना किसी विवाद के चलती आ रही थी। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के…
कल दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से आए युवा एक गंभीर मुद्दे को लेकर जमा हुए थे। उनका सवाल था-आख़िर कब तक पेपर लीक होंगे? कब तक मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य बर्बाद होता रहेगा? कब तक भर्ती परीक्षाएं भ्रष्टाचार और घोटालों की भेंट चढ़ती रहेंगी? लेकिन सवाल यह है कि क्या इस आंदोलन को उसी मुद्दे पर रहने दिया गया जिसके लिए यह शुरू हुआ था? या फिर हमेशा की तरह असली मुद्दों को छोड़कर बहस को कहीं और मोड़ दिया गया? जब छात्र और युवा रोजगार, शिक्षा और पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे, तब…
देश में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल एक चयन प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों, मेहनत और भविष्य का आधार हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियां, परीक्षा रद्द होने की घटनाएं और प्रशासनिक अव्यवस्था लगातार सामने आ रही हैं, उसने इस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ताज़ा मामला सीयूईटी-यूजी 2026 का है, जहां तकनीकी गड़बड़ी के कारण हजारों छात्रों को घंटों परीक्षा केंद्रों पर इंतजार करना पड़ा। 3,765 से अधिक विद्यार्थियों को बिना परीक्षा दिए वापस लौटना…
देश इस समय बेरोज़गारी, महंगाई और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। महाराष्ट्र भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे समय में, जब लाखों युवा रोजगार और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब लातूर के प्रसिद्ध “ट्यूशन एरिया” पर कार्रवाई और वहां चल रहे कोचिंग क्लासेस, हॉस्टल, खानावलों और अन्य व्यवसायों को बंद करने का आदेश केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला दिखाई देता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लातूर का “लातूर पैटर्न” केवल एक शिक्षा मॉडल नहीं, बल्कि पूरे शहर की…
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित बलात्कार और हत्या की घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस सामाजिक और राजनीतिक विफलता का भयावह चेहरा है, जिसमें मासूम बेटियों की सुरक्षा हर दिन कमजोर होती जा रही है। यह घटना पूरे देश से एक सवाल पूछ रही है कि आख़िर कब तक मासूम बच्चियां दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी और सरकारें केवल संवेदनाएं व्यक्त करती रहेंगी? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें भारत में निर्भया कांड से लेकर कठुआ, उन्नाव, हाथरस, मणिपुर, कोलकाता, पुणे और अब बडगाम तक हर बार देश…