- देश की राजनीति में घुसे “कॉकरोच” ने उड़ाई सत्ता की नींद
- कानून, “गौ-रक्षा” और बढ़ता भय: क्या मुसलमानों को निशाना बनाने का माध्यम बन चुका है पूरा तंत्र?
- क़ुरबानी से ‘मॉब लिंचिंग’ तक राजनीति का सबसे बड़ा हथियार बन गई गाय
- हिंदू युवा वाहिनी के बलात्कारी का फूल-मालाओं, नारों और जुलूस के साथ स्वागत
- क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?
- नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?
- आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?
- ‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने
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भाजपा राज में भारत की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में है। एम. के. स्टालिन ने सीबीएसई के नए पाठ्यक्रम ढांचे को लेकर ऐसा हमला बोला है, जिसने न केवल केंद्र-राज्य संबंधों को झकझोर दिया है, बल्कि देश की भाषाई विविधता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें शिक्षा सुधार या हिंदी थोपने की रणनीति स्टालिन का आरोप सीधा और तीखा है कि यह कोई मासूम शैक्षणिक सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के नाम पर “हिंदी थोपने की सुनियोजित साजिश” है। उनके…
तमिलनाडु के सथानकुलम पुलिस थाने में पिता-पुत्र (पी. जयराज और बेनिक्स) की हिरासत में मौत का मामला भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बनकर सामने आया है। लगभग छह साल बाद, सीबीआई की जांच और अदालत की सुनवाई के बाद नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा सुनाई जाना असाधारण है क्योंकि भारत में पुलिस अत्याचार के मामलों में इतनी कठोर सज़ा बहुत दुर्लभ रही है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन की यह टिप्पणी कि “जहां शक्ति होती है, वहां जिम्मेदारी भी होनी चाहिए” केवल इस केस तक सीमित…
आखिर ऐसा क्या कहा था मौलाना सलीम चतुवेर्दी ने जो उन्हें 14 दिन की हिरासत में भेज दिया गया? हाल ही में मौलाना अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी को पुलिस ने गिरफ्तार किया, economist.com
भारत में एक बार फिर पत्रकारिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक, 4PM न्यूज़ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कई स्वतंत्र आवाज़ों को फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर प्रतिबंधित किया जाना महज़ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा प्रतीत होता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें एक ऐसा ट्रेंड, जिसमें सत्ता से सवाल पूछने वालों को व्यवस्थित तरीके से हाशिये पर धकेला जा रहा है। आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) का इस्तेमाल कर कंटेंट को ब्लॉक करना कानूनी प्रक्रिया…
रामनवमी, जो परंपरागत रूप से भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में शांति, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक रही है, हाल के वर्षों में कई जगहों पर तनाव और टकराव की खबरों के साथ जुड़ती दिखाई दे रही है। रामनवमी ही नहीं बल्कि देश में हिन्दू धर्म का हर त्यौहार नफरत, आतंक और अल्पसंख्यंकों को डराने औसर बनता जा रहा है. इतना ही नहीं अल्पसंख्यंकों के क्रिसमिस जैसे त्योहारों को भी शांति और ख़ुशी से मानाने नहीं दिया जा रहा यह बदलाव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन का नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक माहौल का संकेत भी माना जा…
‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ पर कथित “मौखिक रोक” कोई साधारण प्रशासनिक निर्णय नहीं है बल्कि यह उस दौर का संकेत है जहां सत्ता यह तय करना चाहती है कि जनता क्या… imdb.com
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘वंदे मातरम’ से जुड़े केंद्र सरकार के सर्कुलर पर याचिका खारिज करना सिर्फ़ एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि यह उस जटिल बहस को भी उजागर करता है जिसमें राष्ट्रवाद, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की भूमिका एक-दूसरे से टकराती हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अदालत ने साफ़ कहा कि जब तक कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है, तब तक इसे बाध्यकारी नहीं माना जा सकता। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ़ “कानूनी बाध्यता” ही किसी निर्देश के प्रभाव को तय करती है? या फिर सामाजिक और राजनीतिक दबाव भी उतना ही…
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच बुलाई गई सर्वदलीय बैठक ने जितने सवालों के जवाब देने का दावा किया, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए। कागज़ पर यह एक “राष्ट्रीय एकजुटता” की कवायद थी, लेकिन हकीकत में यह सरकार और विपक्ष के बीच भरोसे की खाई को और उजागर करती दिखी। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें बैठक की अगुवाई राजनाथ सिंघ ने की और इसमें अमित शाह और एस. जयशंकर जैसे शीर्ष मंत्री मौजूद रहे। सरकार का दावा था कि उसने हर सवाल का जवाब दिया और विपक्ष ने “समर्थन” जताया।…
डोनाल्ड ट्रंप का यह ताज़ा दावा कि ईरान की जनता उन्हें अपना “सर्वोच्च नेता” बनाना चाहती थी राजनीतिक बयानबाज़ी के उस स्तर को छूता है जहाँ तथ्य और…. alamy.com
महाराष्ट्र में इस वक्त SIR की प्रक्रिया अपने आख़िरी दौर में पहुँच चुकी है और जैसे-जैसे 31 मार्च नज़दीक आ रही है, वैसे-वैसे लोगों की बेचैनी और परेशानियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। पिछली बार वीडियो के ज़रिए हमने आपको मॅपिंग का आसान तरीका बताया था जिसके बाद हज़ारों लोगों ने अपनी मॅपिंग पूरी भी कर ली लेकिन अब भी एक बड़ी आबादी ऐसी है, एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें जिसकी मॅपिंग नहीं हो पा रही और यही आज की सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। हम तक लगातार कॉल, मैसेज और शिकायतें पहुँच…