- अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
- गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
- मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
- सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
- ग़ैरों पे करम-अपनों पे सितम? पाकिस्तान को नसीहत देने से पहले भारत को भी आईना देखने की ज़रूरत
- जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है
- मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है
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दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज एफआईआर और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को रद्द किए जाने के बाद एक बार फिर देश में न्याय, जवाबदेही और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर बहस तेज़ हो गई है। अदालत की टिप्पणियां केवल एक समाचार पोर्टल या एक पत्रकार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस बड़ी समस्या की ओर इशारा करती हैं जो पिछले कुछ वर्षों में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि…
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम ज़िले के सिवनी मालवा में अगस्त 2022 में हुई मॉब लिंचिंग के मामले में 14 लोगों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाया जाना केवल एक आपराधिक मुक़दमे का फ़ैसला नहीं है, बल्कि यह भारत में भीड़ की हिंसा और तथाकथित “गौ-रक्षा” के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति के खिलाफ़ एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश भी है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें इस मामले में महाराष्ट्र के अमरावती निवासी नाज़िर अहमद की भीड़ द्वारा बेरहमी से पिटाई के बाद मौत हो गई थी। अदालत ने सभी 14 अभियुक्तों को…
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने सरकारी और निजी स्कूलों में दिन में तीन बार राष्ट्रगान, वंदे मातरम्, सरस्वती वंदना, दीप मंत्र, गुरु मंत्र, भजन और गायत्री मंत्र का सामूहिक पाठ अनिवार्य कर दिया है। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों में अनुशासन, नैतिकता, देशभक्ति और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित होगा। लेकिन इस फैसले ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश को देना होगा कि क्या भारत का सरकारी स्कूल संविधान से चलेगा या किसी एक धार्मिक परंपरा से? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक…
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति को चौंका दिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के करीब 20 सांसदों का अचानक नेशनलिस्ट सिटीज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) एक ऐसी पार्टी में जाने का फैसला, जिसे देश के अधिकांश लोग जानते तक नहीं थे, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यह वही पार्टी है जिसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महज़ तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसे कुछ सौ वोट मिले थे और जिसके खाते में चुनाव के बाद सिर्फ 75 रुपये नकद बचे थे। एलान…
आरएसएस आखिर किस कानून के तहत चलता है? प्रियंक खरगे के सवाल ने खोल दी भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी बहस
क्या भारत में एक ऐसा संगठन भी है जो सरकार से बड़ा है? क्या देश में एक ऐसा ढांचा मौजूद है, जिससे जुड़े होने पर जवाबदेही के सारे नियम बदल जाते हैं? और क्या वजह है कि जिस देश में एक रेहड़ी-पटरी वाले को भी लाइसेंस, पंजीकरण और सरकारी नियमों का पालन करना पड़ता है, वहां लाखों कार्यकर्ताओं और हजारों संबद्ध संगठनों वाले आरएसएस की कानूनी स्थिति आज भी रहस्य और बहस का विषय बनी हुई है? कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने यही सवाल उठाकर भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक को फिर राष्ट्रीय बहस…
दिल्ली की हिंदी अकादमी में जो हुआ, वह सिर्फ कुछ साहित्यिक पुरस्कारों के नाम बदलने की कहानी नहीं है। यह उस बड़े सवाल का हिस्सा है जो आज देश के करोड़ों लोगों के मन में उठ रहा है कि क्या भारत की संस्थाएं अब जनता की हैं या किसी एक विचारधारा की? दिल्ली सरकार ने हिंदी अकादमी के कई प्रतिष्ठित सम्मानों का नाम बदलकर वीर सावरकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, विजय कुमार मल्होत्रा, मृदुला सिन्हा और अन्य व्यक्तित्वों के नाम पर रख दिया है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें समर्थक इसे राष्ट्रवाद…
उत्तर प्रदेश के शामली में आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली का मामला केवल एक व्यक्ति के धर्म परिवर्तन का मामला नहीं रह गया है। यह मामला अब भारतीय संविधान, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और राज्य की भूमिका पर एक बड़ी बहस बन चुका है। मामले की शुरुआत तब हुई जब आयुष मलिक के पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को “निकाह ट्रैप” के जरिए इस्लाम कबूल करवाया गया और उसकी शादी चांदनी कुरैशी से कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया और गिरफ्तारियां…
दो महीने पहले जब इज़रायल-ईरान युद्धविराम की घोषणा हुई थी, तब उम्मीद जताई जा रही थी कि पश्चिम एशिया में लगातार फैलते युद्ध के दायरे को सीमित किया जा सकेगा। लेकिन ताज़ा घटनाक्रम बता रहा है कि युद्धविराम केवल एक अस्थायी विराम था, स्थायी समाधान नहीं। अब एक बार फिर इज़रायल और ईरान सीधे सैन्य टकराव की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं और पूरा क्षेत्र अनिश्चितता, भय और संभावित युद्ध के साये में खड़ा है। इस बार चिंता केवल मिसाइलों और हवाई हमलों की नहीं है। चिंता इस बात की है कि दोनों देश अब प्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे…
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को विपक्ष का “प्रोपगैंडा” बताते हुए कहा कि कोई एक उदाहरण दिखा दिया जाए जहां किसी व्यक्ति ने अपनी धार्मिक पहचान के कारण असुरक्षित महसूस करते हुए भारत छोड़ा हो। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी लोकतंत्र में उत्पीड़न को केवल इस कसौटी पर मापा जाएगा कि कितने लोग देश छोड़कर गए? क्या अपने ही देश में डरकर जीना, अपनी पहचान छिपाना, कारोबार छोड़ना, धार्मिक कार्यक्रमों को सीमित करना और हर समय संदेह की…
लोकतंत्र में पुलिस की वर्दी किसी सरकार की नहीं, संविधान की होती है। पुलिस अधिकारी किसी मुख्यमंत्री, मंत्री या राजनीतिक दल के सेवक नहीं बल्कि कानून के रक्षक होते हैं। लेकिन जब एक संवैधानिक अदालत को यह कहना पड़े कि “अधिकारियों की वफ़ादारी संविधान के प्रति नहीं, बल्कि सत्ताधारी सरकार के प्रति नज़र आ रही है”, तो यह केवल उत्तर प्रदेश पुलिस पर टिप्पणी नहीं रह जाती, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की संस्थाओं के सामने खड़े एक गंभीर संकट की ओर संकेत बन जाती है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें इलाहाबाद हाईकोर्ट की यह टिप्पणी…