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Home»एलान विशेष

जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन को भटकाने की साज़िश?

adminBy adminJune 7, 2026 एलान विशेष No Comments3 Mins Read
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कल दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से आए युवा एक गंभीर मुद्दे को लेकर जमा हुए थे। उनका सवाल था-आख़िर कब तक पेपर लीक होंगे? कब तक मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य बर्बाद होता रहेगा? कब तक भर्ती परीक्षाएं भ्रष्टाचार और घोटालों की भेंट चढ़ती रहेंगी? लेकिन सवाल यह है कि क्या इस आंदोलन को उसी मुद्दे पर रहने दिया गया जिसके लिए यह शुरू हुआ था? या फिर हमेशा की तरह असली मुद्दों को छोड़कर बहस को कहीं और मोड़ दिया गया? जब छात्र और युवा रोजगार, शिक्षा और पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे, तब अचानक वहां कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों के कार्यकर्ता और गोदी मीडिया टीवी चैनलों के रिपोर्टर भी सक्रिय दिखाई दिए। 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आंदोलन का मुद्दा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था था, तो धार्मिक और सांप्रदायिक बहसें वहां कैसे पहुंच गईं? क्या युवाओं के सवालों का जवाब देना सत्ता पक्ष के लिए मुश्किल हो गया है? क्या बेरोज़गारी, पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर चर्चा से बचने के लिए सत्ता पक्ष बहस को दूसरी दिशा में मोड़ दिया गया? वीडियो और सोशल मीडिया पर सामने आई कई क्लिप्स में आपने देखा कि सत्ता पक्ष ने किस तरह आंदोलन के मूल मुद्दों की जगह हिंदू-मुस्लिम बहस शुरू करा दी।

ऐसा लगता है कि जब सत्ता से जुड़े सवालों का जवाब नहीं होता, तब सबसे आसान रास्ता यही होता है कि लोगों को धर्म और पहचान के आधार पर बांट दिया जाए। पेपर लीक की बात हो रही हो, तो पाकिस्तान ले आओ। रोज़गार की बात हो रही हो, तो हिंदू-मुस्लिम शुरू कर दो। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हों, तो राष्ट्रवाद का शोर मचा दो। देश का युवा पूछ रहा है कि उसकी नौकरी कहां है? उसकी परीक्षा सुरक्षित क्यों नहीं है? उसके भविष्य की गारंटी कौन देगा? लेकिन इन सवालों का जवाब देने के बजाय भक्त और गोदी मीडिया बहस को सांप्रदायिक दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन का मुसलमानों या किसी धार्मिक संगठन से कोई संबंध नहीं था। यह छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों का आंदोलन था।

फिर भी कुछ लोग हर विरोध, हर आंदोलन और हर असहमति को किसी न किसी तरह पाकिस्तान, जिहाद, आतंकवाद या किसी विशेष समुदाय से जोड़ने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि कई सामाजिक कार्यकर्ता और विश्लेषक यह सलाह दे रहे हैं कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों को बेहद सतर्क रहना चाहिए, ताकि असली मुद्दे से ध्यान न भटके और किसी भी समुदाय को अनावश्यक रूप से विवाद में न घसीटा जाए। आज सवाल सिर्फ पेपर लीक का नहीं है।

सवाल यह है कि क्या इस देश में युवा अपने भविष्य की बात कर सकते हैं? क्या छात्र अपनी परीक्षाओं की ईमानदारी पर सवाल उठा सकते हैं? क्या लोकतांत्रिक विरोध को बिना सांप्रदायिक रंग दिए सुना जाएगा? अगर हर आंदोलन को धर्म, पाकिस्तान और राष्ट्रवाद की बहस में बदल दिया जाएगा, तो फिर शिक्षा, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे असली मुद्दों पर बात कौन करेगा? देश को आज जरूरत नफरत की नहीं, जवाबदेही की है।

क्योंकि जब युवा अपने भविष्य के लिए सड़क पर उतरते हैं, तब लोकतंत्र मजबूत होता है-लिहाज़ा देश के हर नौजवान को चाहिए की लोकतंत्र को बचाने के लिए कॉकरोच पार्टी का साथ दें, उनका समर्थन करें। इस पर आपकी क्या राय है कमेंट में ज़रूर बताएं। जय हिन्द !

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