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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा मुसलमानों को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने सीएम पर कार्रवाई की मांग की है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने कहा है कि असम के सीएम को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. इससे पहले मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने शर्मा के ख़िलाफ दिल्ली के हौज़ ख़ास पुलिस थाने में शिकायत कर, एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. इस शिकायत के बाद हिमंता ने मंदर के ख़िलाफ कड़े शब्दों का…

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दोस्तों लातूर शहर महानगर पालिका के महापौर और उपमहापौर की नियुक्ति होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों के मैसेज तो बहुत कम आए लेकिन लातूर कांग्रेस और अमित देशमुख के हमेशा की तरह गलत फैसलों और और मुसलमानों के साथ नाइंसाफ़ी को लेकर टिप्पणियों और कमेंट की बारिश हो रही है-किसीने कहा तुम मुझे सिर्फ वोट दो अब्दुल्ला भाई मैं तुम्हें शतरंजी बिछाने का काम दूंगा। तो किसी ने कहा भर अब्दुल्ला वोट थैली में। किसी ने कहा चला आता लातूरचे ईमानदार मुस्लिम समाज शतरंजय उचलायला। किसी ने अमित देशमुख के डायलॉग पर टिपण्णी करते हुए उपमहापौर की भाजपा का…

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दोस्तों गणतंत्र दिवस भारत का त्योहार है, लेकिन मुसलमानों के लिए इसे धीरे-धीरे इम्तिहान बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का यह फ़रमान कि सभी मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों पर अनिवार्य रूप से तिरंगा फहराया जाए, असल में देशभक्ति नहीं, बल्कि संदेह की राजनीति का हिस्सा है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें आपको बता दें कि देश की आज़ादी से लेकर आजतक देश के हर मदरसे में गल्ली से दिल्ली तक 15 अगस्त और 26 जनवरी को सिर्फ तिरंगा ही नहीं लहराया जाता बल्कि देश भक्ति पर आधारित कार्यकर्मों का आयोजन भी किया…

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शम्सुल इस्लाम  कोई भी समझदार व्यक्ति इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर को 1026 में महमूद गाज़ी (महमूद ग़ज़नवी) के नेतृत्व वाली सेना द्वारा अपवित्र किया गया, लूटा गया और ध्वस्त कर दिया गया था। लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य लगातार छुपाया जाता है कि यह स्थानीय हिंदू सरदारों की सक्रिय सहायता और भागीदारी से किया गया था। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें भारत के वर्तमान आरएसएस-भाजपा शासकों के अनुसार, भारतीय मुसलमान इतिहास के खलनायक हैं। उन्हें बाबरज़ादे (हिंदुस्तान के पहले मुग़ल सम्राट की संतान) के तौर पर पेश…

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महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों से ठीक पहले सरकार द्वारा मुख्यमंत्री–माझी लाड़की बहिन योजना की दो किश्तेंएक साथ जारी करने का फैसला सिर्फ़ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं की कसौटी पर खड़ाएक गंभीर राजनीतिक प्रश्न है।14 जनवरी को — मतदान से महज़ 24 घंटे पहले — एक करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों के खातों में 3,000 रुपयेट्रांसफर करने की घोषणा ने इस सवाल को और तीखा बना दिया है कि क्या यह कल्याण है या वोटों में तब्दील की जारही सरकारी तिजोरी? कल्याण की आड़ में चुनावी टाइमिंग का खेल कांग्रेस ने इसे ‘सामूहिक सरकारी रिश्वत’ कहा है…

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लातूर महानगरपालिका के मौजूदा चुनाव सिर्फ़ नगर निकाय की सत्ता का सवाल नहीं हैं, बल्कि यह चुनाव महाराष्ट्रकी बदलती राजनीति, गठबंधनों की मजबूरी और क्षेत्रीय दलों की वास्तविक ताक़त का भी आईना बन चुके हैं। 18वार्डों की कुल 70 सीटों पर हो रहा यह मुकाबला संख्याओं के खेल से कहीं ज़्यादा, सियासी संतुलन की परीक्षा है।संख्या-गणित: ताक़त और फैलाव:- भारतीय जनता पार्टी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारउतारकर यह साफ़ संकेत दिया है कि वह लातूर में किसी समझौते की राजनीति के मूड में नहीं है। उसके बरक्सकांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ तालमेल कर…

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भगवा पहनकर सत्ता स्वीकार्य है, तो हिजाब पहनकर अस्वीकार्य क्यों? असदुद्दीन ओवैसी का यह कहना कि “एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी” क़ानूनी, संवैधानिक और लोकतांत्रिक रूप से न तो ग़लत है, न ही असंभव। फिर भी इस बयान पर जिस तरह की तीखी और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं आईं, वे दरअसल ओवैसी के कथन से ज़्यादा भारत की मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक मानसिकता को उजागर करती हैं। ओवैसी ने जो कहा उसमें ग़लत क्या है? ओवैसी ने पाकिस्तान और भारत के संवैधानिक ढांचे की तुलना करते हुए एक बुनियादी तथ्य रखा तो इसमें गलत क्या है? पाकिस्तान में…

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झारखंड के गोड्डा ज़िले में पप्पू अंसारी की पीट-पीटकर हत्या कोई “अलग-थलग” घटना नहीं है, बल्कि यह उस ख़तरनाक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें भीड़ खुद को अदालत, जज और जल्लाद, तीनों समझने लगी है। मवेशी चोरी के शक में एक व्यक्ति को रोकना, पूछताछ करना और फिर कुल्हाड़ी-फरसा-तीर से मार डालना—यह अपराध नहीं, एक सोची-समझी सामाजिक हिंसा है, जिसे अक्सर ‘शक’ और ‘आस्था’ का आवरण दे दिया जाता है। शक से सज़ा तक क़ानून का उलंघन एफ़आईआर के मुताबिक, हमलावरों ने पहले नाम पूछा। यही वह पल है जहाँ मामला सिर्फ़ चोरी के शक से आगे बढ़कर पहचान की…

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पहले सज़ा फिर ज़मानत: उमर ख़ालिद, शरजील इमाम मामला और न्यायपालिका के सामने खड़ा लोकतंत्र का सवालसुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगों की कथित “साज़िश” के मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानतयाचिका ख़ारिज करना केवल एक कानूनी फ़ैसला नहीं है बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा, संविधान कीव्याख्या और असहमति के अधिकार पर सीधा सवाल बन चुका है। चार साल से ज़्यादा समय से बिना ट्रायल के जेलमें बंद दो युवा, एक छात्र नेता, दूसरा शोधार्थी जिस पर अदालत का यह कहना कि उन्हें अभी भी ज़मानत नहीं मिलसकती, इस बहस को और तेज़ कर देता है कि…

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महाराष्ट्र के औरंगाबाद- छत्रपति संभाजीनगर इन दिनों सिर्फ़ चुनावी सरगर्मियों का नहीं, बल्कि राजनीतिकअराजकता, नैतिक सवालों और खुले टकराव का केंद्र बन चुका है। AIMIM के भीतर मची हिंसक गुटबाज़ी के कारणपार्टी सांसद और प्रमुख चेहरा इम्तियाज जलील की कार पर उन्हीं के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया, ये सिर्फ़ एकआंतरिक झगड़ा नहीं है। यह उस राजनीति का आईना है, जो ज़मीन पर नियंत्रण खो चुकी है और भीतर से सड़ने लगीहै। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें टिकट बंटवारा या सत्ता का अहंकार? बताया जा रहा है कि यह पूरा बवाल टिकट बंटवारे को…

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