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क्या भारत का लोकतंत्र सिर्फ ‘खतरे में’ है या अब अपनी आख़िरी साँसें गिन रहा है? पश्चिम बंगाल के चुनाव सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र का आईना बन गए हैं। चुनाव नतीजे आए अभी 24 घंटे भी नहीं गुज़रे कि सड़कों पर हिंसा, तोड़फोड़ और आरोपों की आग भड़क उठी।15 साल से जो ब्राह्मण औरत बंगाल की मुख्यमंत्री है उन्होंने आरोप लगाया कि काउंटिंग सेंटर पे उन्हें मारा गया, उनके दफ्तरों को तोडा और जलाया जा रहा है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सवाल ये है कि क्या…

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चार साल की एक मासूम बच्ची… गर्मी की छुट्टियां बिताने अपनी नानी के घर आई थी। उसे क्या पता था कि इंसानी चेहरे में छिपा एक दरिंदा उसकी जिंदगी छीन लेगा। पूणे के भोर तहसील में 65 साल के भीमराव कांबले ने इस मासूम को बहला-फुसलाकर अपने तबेले में ले गया। वहां उसने पहले बच्ची के साथ रेप किया, फिर पत्थर से कुचलकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। जब बच्ची देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया। कुछ देर बाद तबेले से उसकी लाश मिली। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी बच्ची को अपने साथ ले…

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गुजरात की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में “मोदी तत्व” को समाजशास्त्र के पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला केवल एक अकादमिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के भगवाकरण की उस लंबी परियोजना का हिस्सा है, जिसे संघ-भाजपा वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। विश्वविद्यालय, जो स्वतंत्र चिंतन, आलोचनात्मक विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के केंद्र होने चाहिए, उन्हें धीरे-धीरे राजनीतिक व्यक्तिपूजा और वैचारिक प्रचार के मंच में बदला जा रहा है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पढ़ाई होगी या फिर सत्ता की पूजा? अगर मोदी…

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब सत्ता खामोश हो जाए, संस्थाएं आंखें मूंद लें और कानून का इस्तेमाल कमजोरों को डराने के लिए होने लगे, तब न्यायपालिका ही संविधान की आखिरी उम्मीद बनकर खड़ी होती है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें एक तरफ अदालत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को आईना दिखाते हुए साफ कहा कि जब देश में मुसलमानों की मॉब लिंचिंग होती है, जब नफरत के नाम पर लोगों को सड़कों पर पीटा जाता है, जब उनके घरों पर बुलडोजर चलते हैं, तब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की…

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नफरत बोलना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। यह लोकतंत्र के सीने पर हमला है। और अब सुप्रीम कोर्ट ने बेहद साफ शब्दों में बता दिया है कि हेट स्पीच कोई कानूनी ‘ग्रे एरिया’ नहीं, बल्कि एक स्पष्ट आपराधिक कृत्य है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उस भ्रम को तोड़ दिया, जिसे वर्षों से नफरत के सौदागर फैलाते रहे हैं—कि भारत में हेट स्पीच के खिलाफ कोई ठोस कानून नहीं है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अदालत ने स्पष्ट कहा कि भारतीय दंड संहिता और अन्य मौजूदा कानून दुश्मनी फैलाने,…

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भारत में धर्म आस्था का विषय है, लेकिन जब यही आस्था दूसरों के अधिकारों, सार्वजनिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर भारी पड़ने लगे, तो राज्य का हस्तक्षेप न केवल उचित बल्कि अनिवार्य हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट की सबरीमाला मामले में आई हालिया टिप्पणी ने इसी संवैधानिक मर्यादा को रेखांकित किया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने साफ कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता असीमित नहीं है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पूजा-पाठ आपका अधिकार है, लेकिन धर्म की आड़ में सार्वजनिक जीवन को बाधित करने, सड़कों को जाम करने या…

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सोशल मीडिया खोलते ही आजकल इंसान को ज्ञान, संवेदना और भाईचारे से जुड़ी बातें कम, जबकि नफ़रत, झूठ और ज़हर से भरी पोस्ट ज़्यादा दिखाई देती हैं। खासतौर पर इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से ऐसे वीडियो, पोस्ट और कथित “खुलासे” परोसे जाते हैं, जिनका सच से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता। एडिटेड वीडियो, झूठे दावे, फर्जी आंकड़े और उकसाने वाली भाषा, यही आज नफ़रत के कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। दुर्भाग्य यह है कि आम लोग, विशेषकर वे जो हर जानकारी की जांच नहीं कर पाते, इन झूठों को सच मान बैठते हैं।…

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दोस्तों संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक के भारत दौरे से पहले विश्व हिंदू परिषद ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता जताई है। पहली नज़र में यह पहल सराहनीय लगती है। आखिर दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी समुदाय पर होने वाला अन्याय चिंता का विषय होना चाहिए। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है। क्या विहिप की संवेदनाएं सिर्फ सीमाओं के पार रहने वाले अल्पसंख्यकों के लिए हैं? क्या भारत के अल्पसंख्यक उसके लिए नागरिक नहीं हैं? क्या…

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भारत को “नरक” कहने वाली भाषा केवल एक विदेशी नेता या रेडियो होस्ट की बदजुबानी नहीं है; यह उस साम्राज्यवादी मानसिकता की बदबू है, जो आज भी दुनिया को अपने तराजू पर तौलती है। भारत को “हेलहोल” कहने वाली टिप्पणी केवल एक अपमानजनक शब्द नहीं, बल्कि उस पश्चिमी श्रेष्ठताबोध की अभिव्यक्ति है, जो आज भी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को बराबरी की नज़र से देखने को तैयार नहीं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें जिस देश ने विश्व को शून्य, योग, आयुर्वेद, बुद्ध, पाणिनि और लोकतांत्रिक बहुलता की अद्भुत परंपरा दी, उसे “नरक” कहना…

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भारतीय लोकतंत्र में शायद ही कभी ऐसा क्षण आया हो, जब मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ विपक्ष को इतने गंभीर आरोपों के साथ संसद का दरवाजा खटखटाना पड़ा हो। राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दिया गया नया नोटिस केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और संवैधानिक गरिमा पर उठे अभूतपूर्व सवालों का दस्तावेज है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें आदर्श आचार संहिता के कथित पक्षपातपूर्ण पालन से लेकर, आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों के…

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