- अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
- गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
- मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
- सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
- ग़ैरों पे करम-अपनों पे सितम? पाकिस्तान को नसीहत देने से पहले भारत को भी आईना देखने की ज़रूरत
- जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है
- मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है
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भारत की राजनीति में व्यंग्य हमेशा मौजूद रहा है, लेकिन शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि एक “मज़ाक” ने सत्ता की नींद उड़ा दी हो। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक डिजिटल आंदोलन-जिसे शुरू में सोशल मीडिया का एक ट्रेंड समझा गया लेकिन अब वो उस बेचैनी का प्रतीक बन चुका है, जिसे देश का बेरोज़गार, नाराज़ और उपेक्षित युवा महसूस कर रहा है। सवाल सिर्फ़ एक इंस्टाग्राम पेज या एक्स अकाउंट का नहीं है, सवाल उस गुस्से का है जो लगातार दबाया गया और अब इंटरनेट के जरिए विस्फोट बनकर सामने आ रहा है। एलान के व्हॉट्सऐप…
देश में बकरईद से पहले जिस तरह का राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल बनाया जा रहा है, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून का इस्तेमाल वास्तव में व्यवस्था बनाए रखने के लिए हो रहा है, या फिर एक खास समुदाय को लगातार डर और संदेह के घेरे में रखने के लिए? गुजरात में गोहत्या के आरोप में हिरासत में लिए गए 64 वर्षीय ज़हीर शेख की मौत और दिल्ली में बकरईद से पहले सरकार की सख्त चेतावनियां-इन दोनों घटनाओं को केवल प्रशासनिक कार्रवाई मानकर नहीं देखा जा सकता। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने…
भारत में गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि राजनीति, धर्म, पहचान और सत्ता के संघर्ष का प्रतीक बन चुकी है। पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अज़हा से पहले जानवरों की क़ुरबानी को लेकर जारी सरकारी नोटिस और उसके बाद उठे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में कानून वास्तव में समान रूप से लागू होते हैं, या फिर उनका इस्तेमाल राजनीतिक और सांप्रदायिक माहौल के अनुसार किया जाता है? इसी बीच महुआ मोइत्रा और मौलाना अरशद मदनी के बयान इस बहस को और गहरा कर देते हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के…
उत्तर प्रदेश में बलात्कार के आरोपी हिंदू युवा वाहिनी के नेता सुशील प्रजापति का जेल से ज़मानत पर बाहर आने के बाद जिस तरह फूल-मालाओं, नारों और जुलूस के साथ स्वागत किया गया, वह केवल एक शर्मनाक दृश्य नहीं था; वह हमारे समाज और राजनीति की भयावह दिशा का आईना भी था। किसी व्यक्ति पर बलात्कार जैसे गंभीर आरोप हों, मामला अदालत में लंबित हो, पीड़िता न्याय के लिए संघर्ष कर रही हो और उसी दौरान आरोपी को “विजेता” की तरह पेश किया जाए, तो यह केवल संवेदनहीनता नहीं, बल्कि अपराध के सामाजिक वैधीकरण का संकेत बन जाता है। यह…
अगर बाबरी मस्जिद मामले में मुस्लिम पक्ष उस फैसले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों या वैश्विक मानवाधिकार मंचों तक ले जाता तो शायद आज अदालतें इतनी सहजता से धार्मिक दावों को कानूनी आधार बना कर फैसले देने की स्थिति में न होतीं क इमारत जिसमे 700 साल से मुसलमान नमाज़ पढ़ते आ रहे थे 2003 में एएसआई के आदेश पर हिन्दू समुदाय ने मां सरस्वती की पूजा शुरू कर दी और अब अदालत ने सीधा इस इमारत यानी कमाल मौला मस्जिद भोज शाला को मंदिर घोषित कर दिया। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें जिसने फिर से…
भारत की राजनीति में भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि सत्ता का संकेत भी होती है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के हालिया बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज शासन और सांप्रदायिक राजनीति के बीच की रेखा जानबूझकर धुंधली की जा रही है? सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ को लेकर दिया गया उनका भाषण केवल “कानून-व्यवस्था” का बयान नहीं था, बल्कि एक गहरे राजनीतिक-सांस्कृतिक संदेश से भरा हुआ वक्तव्य था, जिसे उनके समर्थकों ने तुरंत समझ भी लिया और तालियों के जरिए उसका स्वागत भी किया। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से…
(समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, पर्यावरण, नैतिकता, आधुनिकता और धर्म की स्थिति) आज का समय विज्ञान, तकनीक और तेज़ विकास का समय है। इंसान ने बहुत तरक्की की है। दुनिया पहले से छोटी लगने लगी है और लोग एक-दूसरे से आसानी से जुड़ गए हैं। लेकिन इतना विकास होने के बाद भी एक बड़ा सवाल हमारे सामने है — क्या हम सच में आगे बढ़ रहे हैं, या अंदर से कमजोर होते जा रहे हैं? आज हमारे पास सुविधाएँ तो बहुत हैं, लेकिन मन की शांति कम होती जा रही है। आधुनिक जीवन ने आराम दिया, लेकिन तनाव, चिंता और अकेलापन…
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आज लातूर महाराश्ट्र काफी चर्चा में है ‘RCC(Renukai Career Centre / Renukai Chemistry Classes) कोचिंग संस्थान के प्रमुख संस्थापक मोटेगांवकर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि परीक्षा से करीब 10 दिन पहले (23 अप्रैल को) उनके पास लीक हुआ प्रश्नपत्र आ गया था। उनके मोबाइल फोन में लीक हुआ पेपर मिलने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पुणे और फिर दिल्ली ले जाया गया। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें वहीँ डॉ. मनोज शिरुरे लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ को भी सीबीआई ने गिरफ्तार…
भारत में लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान कभी उसकी जीवंत और सवाल पूछने वाली प्रेस मानी जाती थी। सत्ता से असहमति, सरकार से जवाबदेही और जनता के सवालों को उठाना ही मीडिया का मूल धर्म था। लेकिन आज हालात इस मोड़ पर पहुंच चुके हैं कि जब विदेश की धरती पर कोई पत्रकार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केवल इतना पूछ लेता है कि “आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवाल क्यों नहीं लेते?”, तो वह सवाल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन जाता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें यह सिर्फ…
न कोई गवाह, न कोई सबूत क्या तकनीकी और फॉरेंसिक जांच से तौसीफ़ रज़ा के क़ातिलों को ढूंढ पाएगी पुलिस ?
उत्तर प्रदेश के बरेली से सामने आया इमाम तौसीफ़ रज़ा का मामला अब सिर्फ एक “मौत” नहीं रह गया है बल्कि यह एक ऐसा सवाल बन चुका है जो कानून-व्यवस्था, जांच एजेंसियों और समाज की संवेदनशीलता तीनों को कटघरे में खड़ा करता है। 27 अप्रैल को रेलवे ट्रैक के पास मिला एक शव जिसे पहली नज़र में “दुर्घटना” बताया गया लेकिन एक हफ्ते बाद आई उनकी पत्नी (बेवा)की शिकायत ने पूरी कहानी को उलट कर रख दिया। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पत्नी ने बताया यह हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या है तबस्सुम खातून का…