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उत्तराखंड के कोटद्वार में एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े होने वाले जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद’ दीपक का मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा है। सोशल मीडिया पर हत्या के लिए 2 लाख रुपये का इनाम घोषित करना, खुलेआम धमकी देना और फिर पुलिस द्वारा आरोपी को हिरासत में लेना ये घटनाएँ हमारे समय के सामाजिक और कानूनी संकट की ओर इशारा करती हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें यह प्रकरण तीन स्तरों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है: समाज में बढ़ती भीड़-मानसिकता और धार्मिक ध्रुवीकरण। कानून-व्यवस्था की…

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संभल हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगाना, जिसमें 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था, केवल एक कानूनी कार्रवाई ही नहीं है बल्कि यह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें एक ओर निचली अदालत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने कथित पुलिस फायरिंग में घायल युवक के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया, तो दूसरी ओर हाईकोर्ट ने उस आदेश पर स्थगन दे दिया। कानून के तहत उच्च…

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हिमंता बिस्वा शर्मा कोई सड़कछाप ट्रोल नहीं है। वे एक संवैधानिक पद पर बैठा  मुख्यमंत्री है। उसके शब्द सिर्फ़ भाषण नहीं होते, वे राज्य की मंशा, प्रशासन का रवैया और पुलिस की प्राथमिकता तय करते हैं। ऐसे में जब वही मुख्यमंत्री खुलेआम कहता है कि “मेरा काम मिया लोगों की ज़िंदगी मुश्किल बनाना है” तो यह महज़ हेट स्पीच नहीं, बल्कि राज्य प्रायोजित उत्पीड़न का ऐलान है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ‘मिया’ शब्द का इस्तेमाल, जो असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए एक अपमानजनक गाली की तरह प्रयोग होता है, अपने आप…

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लातूर शहर महानगर पालिका में मुसलमानों के साथ भेद भाव और नाइंसाफी को लेकर लातूर कांग्रेस और अमित देशमुख के खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रही टिप्पणियों और विरोध का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था कि एक और ऐसा मामला सामने आया है जिसने लातूर कांग्रेस के सांसद विधायक और जिला अध्यक्ष के प्रोगामी या सेक्युलर होने पर सिर्फ संदेह ही नहीं पैदा किया बल्कि इनकी जातीयवादी मानसिकता को भी उजागर किया है। चलिए जानते हैं मामला क्या है ? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें मामला जुड़ा है बैरिस्टर अब्दुल रहमान अंतुले से…

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पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की कथित पीडीएफ लीक होने पर दिल्ली पुलिस द्वारा जांच शुरू करना अपने आप में असामान्य नहीं है। कॉपीराइट और गोपनीय दस्तावेज़ों की सुरक्षा किसी भी प्रकाशन प्रक्रिया का हिस्सा होती है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में जो बात सबसे ज़्यादा चुभती है, वह यह है कि सरकार और एजेंसियाँ किताब की सामग्री पर उठे गंभीर सवालों की बजाय, उसकी लीक पर अधिक सक्रिय दिख रही हैं। यही वह बिंदु है जहाँ से बहस गहराती है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें…

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-राम पुनियानी रोहित वेम्यूला और अबेदा सलीम तड़वी की आत्महत्या के मुद्दे को लेकर दायर जनहित याचिकाओं और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में आत्महत्या करने वाले छात्रों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक 16-पृष्ठीय दस्तावेज जारी किया जिसमें वे दिशानिर्देश थे जिन्हें उच्च शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया जाना था. इन दिशानिर्देशों का उद्धेश्य था छात्रों को अपमान या ऐसे नकारात्मक विचारों से बचाना जिनके चलते वे अपनी जान ले लेते हैं. एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस तरह की त्रासद और भयावह घटनाओं में…

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उत्तराखंड के कोटद्वार से सामने आया यह मामला केवल एक मुस्लिम दुकानदार के उत्पीड़न या कुछ एफआईआर तक सीमित नहीं है। यह घटना उस गहरी और ख़तरनाक प्रवृत्ति को उजागर करती है, जिसमें नफ़रत को संरक्षण और इंसानियत को सज़ा दी जा रही है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 26 जनवरी जिस दिन भारत का संविधान लागू हुआ उसी दिन एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार से उसकी दुकान के नाम पर सवाल किए जाते हैं, दबाव डाला जाता है और ‘सुधार’ के नाम पर डराने की कोशिश होती है। और जब दो स्थानीय नागरिक, दीपक…

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह स्पष्ट कहना कि निजी संपत्ति में धार्मिक प्रार्थना सभा के लिए किसी अनुमति की ज़रूरत नहीं, संविधान के अनुच्छेद 25 की मूल भावना को दोहराता है। अदालत ने यह याद दिलाया कि धर्म का पालन करना नागरिक का मौलिक अधिकार है, और जब तक वह निजी परिसर की सीमा में है, तब तक राज्य को उसमें दख़ल देने का कोई वैधानिक आधार नहीं है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश समेत कई भाजपाई राज्यों में धार्मिक गतिविधियों ख़ासकर अल्पसंख्यक समुदायों की प्रार्थनाओं…

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोका जाना, संसदीय इतिहास में एक असहज और चिंताजनक अध्याय जोड़ता है। स्वयं राहुल गांधी ने इसे “अभूतपूर्व” और “लोकतंत्र पर धब्बा” कहा है और यह अतिशयोक्ति नहीं लगती। राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय सरोकारों का आधिकारिक दस्तावेज़ होता है। उस पर बहस करना संसद का मूल कार्य है, और उस बहस में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केंद्रीय होती है। ऐसे में, यदि उसी नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाए, तो सवाल स्वाभाविक है। संसद चल रही है या सिर्फ़ सत्ता का…

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लोकसभा में कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर द्वारा पेश किया गया स्थगन प्रस्ताव औपचारिक संसदीय प्रक्रिया भर नहीं है। यह उस बेचैनी का राजनीतिक रूप है, जो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आए जेफ़्री एप्स्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों के बाद स्वाभाविक रूप से पैदा हुई है। कांग्रेस की मांग है सीधी कि जब अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ों और ईमेल्स में प्रधानमंत्री का नाम, उनके कथित प्रतिनिधि और भारत की चुनावी व कूटनीतिक रणनीतियों का ज़िक्र आता है, तो संसद में उस पर चर्चा क्यों न हो? सरकार की चुप्पी और चर्चा से बचने की कोशिश इस सवाल को और गहरा करती है। आरोप नहीं,…

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