- ‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने
- नॉर्वे में पीएम मोदी से पूछा गया एक सवाल ऐतिहासिक क्यों बन गया?
- न कोई गवाह, न कोई सबूत क्या तकनीकी और फॉरेंसिक जांच से तौसीफ़ रज़ा के क़ातिलों को ढूंढ पाएगी पुलिस ?
- क्या बंगाल चुनाव लोकतंत्र के खात्मे की आख़िरी चेतावनी है?
- मासूमों से दरिंदगी पर कब जागेगा कानून, कब मिलेगी दरिंदों को सिर्फ फांसी?”
- भारत की शिक्षा पर भगवा साया: अब समाजशास्त्र नहीं, “मोदीशास्त्र” पढ़ाया जाएगा!
- मुसलमानों पे जुल्म पर मानवाधिकार आयोग की ख़ामोशी को लेकर हाईकोर्ट का करारा प्रहार
- नफरत फैलाओगे, तो कानून पकड़ेगा! सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक ने उड़ाई हेट स्पीच कारोबारियों की नींद
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NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आज लातूर महाराश्ट्र काफी चर्चा में है ‘RCC(Renukai Career Centre / Renukai Chemistry Classes) कोचिंग संस्थान के प्रमुख संस्थापक मोटेगांवकर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि परीक्षा से करीब 10 दिन पहले (23 अप्रैल को) उनके पास लीक हुआ प्रश्नपत्र आ गया था। उनके मोबाइल फोन में लीक हुआ पेपर मिलने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पुणे और फिर दिल्ली ले जाया गया। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें वहीँ डॉ. मनोज शिरुरे लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ को भी सीबीआई ने गिरफ्तार…
भारत में लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान कभी उसकी जीवंत और सवाल पूछने वाली प्रेस मानी जाती थी। सत्ता से असहमति, सरकार से जवाबदेही और जनता के सवालों को उठाना ही मीडिया का मूल धर्म था। लेकिन आज हालात इस मोड़ पर पहुंच चुके हैं कि जब विदेश की धरती पर कोई पत्रकार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केवल इतना पूछ लेता है कि “आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवाल क्यों नहीं लेते?”, तो वह सवाल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन जाता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें यह सिर्फ…
न कोई गवाह, न कोई सबूत क्या तकनीकी और फॉरेंसिक जांच से तौसीफ़ रज़ा के क़ातिलों को ढूंढ पाएगी पुलिस ?
उत्तर प्रदेश के बरेली से सामने आया इमाम तौसीफ़ रज़ा का मामला अब सिर्फ एक “मौत” नहीं रह गया है बल्कि यह एक ऐसा सवाल बन चुका है जो कानून-व्यवस्था, जांच एजेंसियों और समाज की संवेदनशीलता तीनों को कटघरे में खड़ा करता है। 27 अप्रैल को रेलवे ट्रैक के पास मिला एक शव जिसे पहली नज़र में “दुर्घटना” बताया गया लेकिन एक हफ्ते बाद आई उनकी पत्नी (बेवा)की शिकायत ने पूरी कहानी को उलट कर रख दिया। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पत्नी ने बताया यह हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या है तबस्सुम खातून का…
क्या भारत का लोकतंत्र सिर्फ ‘खतरे में’ है या अब अपनी आख़िरी साँसें गिन रहा है? पश्चिम बंगाल के चुनाव सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र का आईना बन गए हैं। चुनाव नतीजे आए अभी 24 घंटे भी नहीं गुज़रे कि सड़कों पर हिंसा, तोड़फोड़ और आरोपों की आग भड़क उठी।15 साल से जो ब्राह्मण औरत बंगाल की मुख्यमंत्री है उन्होंने आरोप लगाया कि काउंटिंग सेंटर पे उन्हें मारा गया, उनके दफ्तरों को तोडा और जलाया जा रहा है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सवाल ये है कि क्या…
चार साल की एक मासूम बच्ची… गर्मी की छुट्टियां बिताने अपनी नानी के घर आई थी। उसे क्या पता था कि इंसानी चेहरे में छिपा एक दरिंदा उसकी जिंदगी छीन लेगा। पूणे के भोर तहसील में 65 साल के भीमराव कांबले ने इस मासूम को बहला-फुसलाकर अपने तबेले में ले गया। वहां उसने पहले बच्ची के साथ रेप किया, फिर पत्थर से कुचलकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। जब बच्ची देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया। कुछ देर बाद तबेले से उसकी लाश मिली। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी बच्ची को अपने साथ ले…
गुजरात की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में “मोदी तत्व” को समाजशास्त्र के पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला केवल एक अकादमिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के भगवाकरण की उस लंबी परियोजना का हिस्सा है, जिसे संघ-भाजपा वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। विश्वविद्यालय, जो स्वतंत्र चिंतन, आलोचनात्मक विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के केंद्र होने चाहिए, उन्हें धीरे-धीरे राजनीतिक व्यक्तिपूजा और वैचारिक प्रचार के मंच में बदला जा रहा है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पढ़ाई होगी या फिर सत्ता की पूजा? अगर मोदी…
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब सत्ता खामोश हो जाए, संस्थाएं आंखें मूंद लें और कानून का इस्तेमाल कमजोरों को डराने के लिए होने लगे, तब न्यायपालिका ही संविधान की आखिरी उम्मीद बनकर खड़ी होती है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें एक तरफ अदालत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को आईना दिखाते हुए साफ कहा कि जब देश में मुसलमानों की मॉब लिंचिंग होती है, जब नफरत के नाम पर लोगों को सड़कों पर पीटा जाता है, जब उनके घरों पर बुलडोजर चलते हैं, तब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की…
नफरत बोलना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। यह लोकतंत्र के सीने पर हमला है। और अब सुप्रीम कोर्ट ने बेहद साफ शब्दों में बता दिया है कि हेट स्पीच कोई कानूनी ‘ग्रे एरिया’ नहीं, बल्कि एक स्पष्ट आपराधिक कृत्य है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उस भ्रम को तोड़ दिया, जिसे वर्षों से नफरत के सौदागर फैलाते रहे हैं—कि भारत में हेट स्पीच के खिलाफ कोई ठोस कानून नहीं है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अदालत ने स्पष्ट कहा कि भारतीय दंड संहिता और अन्य मौजूदा कानून दुश्मनी फैलाने,…
भारत में धर्म आस्था का विषय है, लेकिन जब यही आस्था दूसरों के अधिकारों, सार्वजनिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर भारी पड़ने लगे, तो राज्य का हस्तक्षेप न केवल उचित बल्कि अनिवार्य हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट की सबरीमाला मामले में आई हालिया टिप्पणी ने इसी संवैधानिक मर्यादा को रेखांकित किया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने साफ कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता असीमित नहीं है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पूजा-पाठ आपका अधिकार है, लेकिन धर्म की आड़ में सार्वजनिक जीवन को बाधित करने, सड़कों को जाम करने या…
सोशल मीडिया खोलते ही आजकल इंसान को ज्ञान, संवेदना और भाईचारे से जुड़ी बातें कम, जबकि नफ़रत, झूठ और ज़हर से भरी पोस्ट ज़्यादा दिखाई देती हैं। खासतौर पर इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से ऐसे वीडियो, पोस्ट और कथित “खुलासे” परोसे जाते हैं, जिनका सच से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता। एडिटेड वीडियो, झूठे दावे, फर्जी आंकड़े और उकसाने वाली भाषा, यही आज नफ़रत के कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। दुर्भाग्य यह है कि आम लोग, विशेषकर वे जो हर जानकारी की जांच नहीं कर पाते, इन झूठों को सच मान बैठते हैं।…