- आरएसएस पर अमेरिका में बवाल: आखिर नफ़रत और जातिवाद की राजनीति से देश कब आज़ाद होगा?
- वक्फ बोर्ड में बढ़ती धांधलियां… वक्फ की असली मंशा पर निजी हित भारी
- 10 हज़ार ‘गो मित्र’ और चुनावी राजनीति- रोजगार का मॉडल या आस्था के सहारे नई सियासत?
- मोहन भागवत का विदेश दौरा और आरएसएस पर अंतरराष्ट्रीय सवाल
- तीन आदिवासी बच्चियों की मौत और ‘विकास’ का दावा: जब बिस्तर तक न मिले तो कैसा विकास?
- विदेशी चंदे के नाम पर नियंत्रण या नागरिक संस्थाओं पर नई शिकंजाकशी?
- क्या पैगंबर मुहम्मद (स.) केवल मुसलमानों के हैं?
- प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’: पत्रकारिता के मंच पर व्यक्तिपूजा का सवाल
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से पहले वहां के कुछ सिख संगठनों और अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) की ओर से उठाई गई आपत्तियां केवल एक व्यक्ति की विदेश यात्रा का विवाद नहीं हैं। असली सवाल इससे कहीं बड़ा है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सवाल यह है कि जिस संगठन को भारत की सत्ताधारी राजनीति और हिंदुत्व की विचारधारा का वैचारिक केंद्र माना जाता है, उसके बारे में धार्मिक अल्पसंख्यकों, सामाजिक न्याय और जातीय समानता को लेकर देश और विदेश में लगातार सवाल क्यों उठते…
वक्फ ऐसी अमानत है, जिसे किसी व्यक्ति, परिवार, समूह या संस्था की निजी संपत्ति नहीं माना जा सकता। जब कोई व्यक्ति अपनी जमीन या दूसरी संपत्ति अल्लाह की रजा और किसी धार्मिक, सामाजिक या जनकल्याण के काम के लिए वक्फ करता है, तो वह संपत्ति एक पवित्र अमानत बन जाती है। इस अमानत की हिफाजत करना, वक्फ करने वाले की मंशा का सम्मान करना और संपत्ति का इस्तेमाल उसी मकसद के लिए करना वक्फ बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारी है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन जब यही संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी से हटकर निजी फायदे,…
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गो-संरक्षण अभियान के तहत 10,000 ‘गो मित्रों’ को प्रशिक्षित करने की योजना की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं, खासकर जेन-ज़ी को गो-संरक्षण से जोड़ना और इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा तथा रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल तैयार करना है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सुनने में यह योजना ग्रामीण विकास, पर्यावरण और पशुपालन से जुड़ी एक सकारात्मक पहल लग सकती है। गायों की देखभाल, बायोगैस, गोबर आधारित उत्पाद, जैविक खेती और पशुधन…
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जा रहे हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर होने वाली इस यात्रा को संगठन विदेशों में अपने संपर्क, संवाद और वैश्विक पहुंच को मजबूत करने के अभियान के रूप में देख रहा है। लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले ही अमेरिका में जिस तरह विरोध की आवाजें उठी हैं, उसने इस दौरे को केवल प्रवासी भारतीयों से मिलने-जुलने का कार्यक्रम नहीं रहने दिया है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग…
गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनकी सरकार अक्सर विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे, तेज़ प्रगति और आदिवासी क्षेत्रों के उत्थान के बड़े-बड़े दावे करते रहे हैं। लेकिन गढ़चिरौली के जपतलाई गांव के एक आदिवासी आवासीय स्कूल से सामने आई घटना ने इन दावों के सामने एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक सवाल खड़ा कर दिया है—जो सरकार आदिवासी बच्चियों को जमीन पर सोने से बचाने के लिए बिस्तर तक उपलब्ध नहीं करा सकती, वह आखिर किस विकास की बात करती है? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें एक सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम स्कूल के हॉस्टल…
नई दिल्ली: लोकतंत्र केवल चुनावों और सरकारों के बनने-बदलने का नाम नहीं है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में सरकार के साथ-साथ स्वतंत्र मीडिया, सामाजिक संगठन, मानवाधिकार संस्थाएं, धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थान और गैर-सरकारी संगठन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही संस्थाएं समाज के उन हिस्सों तक पहुंचती हैं, जहां अक्सर सरकारी व्यवस्था की पहुंच कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को लेकर उठ रहा विवाद केवल विदेशी चंदे का मामला नहीं, बल्कि नागरिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और सरकार की बढ़ती नियंत्रण शक्ति से जुड़ा बड़ा सवाल है। 12 अगस्त को विपक्ष के तीखे विरोध के…
दुनिया के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका स्थान किसी एक समाज, क्षेत्र, भाषा या समय की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। वे पूरी मानवता की सामूहिक चेतना का हिस्सा बन जाते हैं। हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.) भी ऐसे ही महान व्यक्तित्वों में से एक हैं। निस्संदेह, वे मुसलमानों के पैगंबर, रसूल और मार्गदर्शक हैं। लेकिन पवित्र कुरआन उनकी पैगंबरी को केवल मुसलमानों या अरबों तक सीमित नहीं करता। बल्कि उन्हें पूरे संसार के लिए ‘रहमत’ यानी दया और कृपा का प्रतीक बताया गया है। इसीलिए यह प्रश्न केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव…
दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया परिसर से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के सामने आरती करते हुए और कथित तौर पर ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करते दिखाई दे रहे हैं। “जय-जय मोदी” और “हर-हर मोदी” जैसे नारे भी सुनाई देते हैं। सवाल केवल इतना नहीं है कि किसी व्यक्ति या संगठन ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा में यह कार्यक्रम क्यों किया; असली सवाल यह है कि पत्रकारिता, संवाद और सत्ता से सवाल पूछने के लिए पहचाने जाने वाले संस्थान के परिसर…
देश के करोड़ों विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तक केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं होती। किताबों के जरिए ही एक नई पीढ़ी लोकतंत्र, संविधान, नागरिक अधिकारों, चुनाव, सरकार, विपक्ष, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को समझती है। इसलिए जब कक्षा 11 और 12 की राजनीति विज्ञान की किताबें लिखने के लिए बनाई गई नई एनसीईआरटी समिति में भाजपा, आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों से संबंध रखने वाले कई लोगों की मौजूदगी सामने आती है, एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें तो सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या पाठ्यपुस्तकों का पुनर्लेखन केवल शैक्षिक प्रक्रिया है, या इसके…
मंगलुरु से सामने आई यह खबर सिर्फ एक व्यक्ति के पत्र की खबर नहीं है। यह उस बड़े सवाल को सामने लाती है, जिससे भारतीय लोकतंत्र लंबे समय से जूझ रहा है। आखिर धर्म के नाम पर पैदा की जा रही नफरत की जिम्मेदारी किसकी है और इसकी सीमा कहां खत्म होती है? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व प्रचारक यशवंत सहदेव शिंदे ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित करने की मांग की है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल…