- अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
- गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
- मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
- सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
- ग़ैरों पे करम-अपनों पे सितम? पाकिस्तान को नसीहत देने से पहले भारत को भी आईना देखने की ज़रूरत
- जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है
- मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है
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मंदिर हो या मस्जिद, चंदे का एक-एक पैसा जनता का है, किसी ट्रस्ट की जागीर नहीं, अयोध्या का श्रीराम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर के निर्माण के लिए देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा, विश्वास और मेहनत की कमाई का दान दिया। किसी ने सौ रुपये दिए, किसी ने लाखों, तो किसी ने जीवनभर की बचत भगवान श्रीराम के चरणों में समर्पित कर दी। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन आज वही श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि क्या भगवान के नाम पर चढ़ाया गया चढ़ावा भी सुरक्षित नहीं…
महाराष्ट्र में अगर किसी आईएएस अधिकारी का नाम ईमानदारी, सख्ती और बेखौफ कार्रवाई के लिए सबसे पहले लिया जाता है, तो वह नाम है तुकाराम मुंढे। अपने 21 साल के प्रशासनिक जीवन में 25 से अधिक तबादले झेलने वाले इस अधिकारी ने जहां भी जिम्मेदारी संभाली, वहां व्यवस्था को नियमों के अनुसार चलाने की कोशिश की। आज खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में वे मिलावटी दूध, नकली दवाओं, मिलावटी खाद्य पदार्थों और गुटखा माफियाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन सवाल यह है…
म. मुस्लिम कबीर, लातूर- भारत एक बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक और लोकतांत्रिक देश है, जहाँ संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। महिलाओं के अधिकार, पारिवारिक कानून और सामाजिक न्याय जैसे विषय हमेशा से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में तीन तलाक, बहुविवाह और समान नागरी संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस में असाधारण तीव्रता आई है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इन बहसों का वास्तविक उद्देश्य महिलाओं को न्याय दिलाना है या फिर यह किसी विशेष राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के…
देश के अलग-अलग हिस्सों से जहां भाजपा की सरकारें हैं वहां से लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जिनमें मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों पर बुलडोजर कार्रवाई या उन्हें अतिक्रमण बताकर हटाने की घटनाएं चर्चा में हैं। प्रशासन हर बार यही कहता है कि कार्रवाई केवल अवैध निर्माणों के खिलाफ है और इसका किसी धर्म से कोई संबंध नहीं है। दूसरी ओर मुस्लिम संगठन और मानवाधिकार समूह आरोप लगाते हैं कि इन कार्रवाइयों का निशाना मुख्यतः मुस्लिम धार्मिक स्थल बन रहे हैं। क्या दशकों पुराणी मस्जिदें अवैध हो सकती हैं? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक…
असदुल्लाह खान ज़की, बस्वकल्याण- हम आम तौर पर कर्बला को चौदह सौ साल पहले की एक दुखद घटना मानते हैं, जिसे याद रखना हमारा फ़र्ज़ है। लेकिन शायद कर्बला की सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा गहरी है। कर्बला सिर्फ़ बीते हुए कल की दुखद घटना नहीं है-यह हर दौर में इंसान से पूछा जाने वाला एक सवाल है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें जब ज़ुल्म इतना ज़्यादा हो जाए कि सच बताना मुश्किल हो जाए, जब सच बोलने वाला अकेला खड़ा हो जाए, और जब समाज ने चुप्पी को समझदारी कह दिया हो-तब कर्बला की…
पिछले हफ्ते सोशल मीडिया और अख़बारों में एक 20 वर्षीय युवक के गुम होने की तस्वीर और खबर काफी गश्त कर रही थी, जिसकी तलाश दो दिन पहले उस वक़्त खत्म हो गई जब उसकी लाश कातपुर रोड पे कव्वा शिवार स्थित पानी आपूर्ति के कुएं के पास बरामद हुई, और उसी दिन पुलिस ने लातूर के ही एक 26 वर्षीय आबेद मक़सूद शेख को हिरासत में ले लिया। लातूर ग्रामीण पुलिस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 139/2026 धारा 103(1), 238 बीएनएस ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें…
देश के विश्वविद्यालयों में इन दिनों एक नई होड़ दिखाई दे रही है। कहीं डिग्रियों पर “इंडिया” की जगह “भारत” लिखा जा रहा है, कहीं लेटरहेड और साइनबोर्ड बदले जा रहे हैं, तो कहीं आधिकारिक पत्राचार में “भारत” को अनिवार्य बनाया जा रहा है। पहली नज़र में यह एक भाषाई या सांस्कृतिक बदलाव लग सकता है, लेकिन जब इसकी परतें खुलती हैं तो सवाल केवल शब्दों का नहीं, बल्कि संविधान, शिक्षा की स्वायत्तता और वैचारिक हस्तक्षेप का बन जाता है। मध्य प्रदेश के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने दीक्षांत समारोह की डिग्रियों पर “भारत” लिखने का फैसला किया। एलान के व्हॉट्सऐप…
म.मुस्लिम कबीर, लातूर– वाक़िआ-ए-कर्बला तारीख़-ए-इस्लाम का एक ऐसा अज़ीम और बेमिसाल वाक़िआ है जिसने हक़ व बातिल, सदाक़त व ज़ुल्म, अद्ल व जब्र के दरमियान एक वाज़ेह लकीर खींच दी। यह सिर्फ़ एक जंग या तारीखी सानिहा नहीं बल्कि इंसानियत, आज़ादी, अद्ल, इस्तिक़ामत और कुर्बानी का एक ऐसा सबक़ है जो क़यामत तक इंसानों को राह-ए-हक़ पर क़ायम रहने की तरगीब देता रहेगा। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सन 61 हिजरी में मैदान-ए-कर्बला में नवासा-ए-रसूल ﷺ, हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपने अहल-ए-बैत और जानिसार साथियों के साथ दीन-ए-इस्लाम की हक़ीक़ी रूह को…
नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा का दिन देश के लाखों छात्रों के लिए राहत का नहीं, बल्कि एक और मानसिक परीक्षा का दिन बन गया। कहीं भोपाल में सड़क हादसे के कारण कुछ मिनट देर से पहुंचे छात्रों को परीक्षा केंद्र के बाहर ही रोक दिया गया, तो कहीं अजमेर में एक छात्रा के बुर्का पहनने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बेंगलुरु और दिल्ली समेत कई शहरों से ऐसे दृश्य सामने आए, जहां छात्र-छात्राएं सेंटर के बाहर रोते, गिड़गिड़ाते और हाथ जोड़कर अंदर जाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन नियमों की दीवार उनके भविष्य से भी ऊंची साबित हुई।…
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की अदालत द्वारा 2022 के सिवनी मालवा मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद कुछ तथाकथित गौ-रक्षक संगठनों और हिंदुत्ववादी सोशल मीडिया समूहों ने जिस तरह का अभियान शुरू किया है, उसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उनके लिए कानून से अधिक महत्वपूर्ण भीड़ की हिंसा को वैध ठहराना है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अदालत ने किसी व्यक्ति को “गाय बचाने” के लिए नहीं, बल्कि एक इंसान की पीट-पीटकर हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और गैरकानूनी भीड़…