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- स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
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- निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच बुलाई गई सर्वदलीय बैठक ने जितने सवालों के जवाब देने का दावा किया, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए। कागज़ पर यह एक “राष्ट्रीय एकजुटता” की कवायद थी, लेकिन हकीकत में यह सरकार और विपक्ष के बीच भरोसे की खाई को और उजागर करती दिखी। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें बैठक की अगुवाई राजनाथ सिंघ ने की और इसमें अमित शाह और एस. जयशंकर जैसे शीर्ष मंत्री मौजूद रहे। सरकार का दावा था कि उसने हर सवाल का जवाब दिया और विपक्ष ने “समर्थन” जताया।…
डोनाल्ड ट्रंप का यह ताज़ा दावा कि ईरान की जनता उन्हें अपना “सर्वोच्च नेता” बनाना चाहती थी राजनीतिक बयानबाज़ी के उस स्तर को छूता है जहाँ तथ्य और…. alamy.com
महाराष्ट्र में इस वक्त SIR की प्रक्रिया अपने आख़िरी दौर में पहुँच चुकी है और जैसे-जैसे 31 मार्च नज़दीक आ रही है, वैसे-वैसे लोगों की बेचैनी और परेशानियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। पिछली बार वीडियो के ज़रिए हमने आपको मॅपिंग का आसान तरीका बताया था जिसके बाद हज़ारों लोगों ने अपनी मॅपिंग पूरी भी कर ली लेकिन अब भी एक बड़ी आबादी ऐसी है, एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें जिसकी मॅपिंग नहीं हो पा रही और यही आज की सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। हम तक लगातार कॉल, मैसेज और शिकायतें पहुँच…
वाराणसी से आई एक हालिया ख़बर ने न सिर्फ़ क़ानूनी दायरों में बल्कि सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी गहरी बहस छेड़ दी है। गंगा नदी के बीच नाव पर इफ़्तार करने के आरोप में गिरफ़्तार 14 मुस्लिम युवकों की ज़मानत याचिका का खारिज होना कई सवालों को जन्म देता है। क्या यह महज़ क़ानून का सख़्त पालन है, या इसके पीछे कोई और परत भी छिपी हुई है? अदालत ने अपने आदेश में आरोपों को ‘गंभीर’ और ‘ग़ैर-जमानती’ बताया है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पुलिस ने जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज…
पश्चिम एशिया इस वक्त सिर्फ़ युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि दावों और खंडनों की जंग का भी केंद्र बन चुका है। ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों का 26 वां दिन इस सच्चाई को और गहराई से उजागर करता है कि यह संघर्ष अब केवल मिसाइलों और ड्रोन तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह सूचना, कूटनीति और आर्थिक दबाव का बहुस्तरीय युद्ध बन चुका है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘शांति वार्ता’ के दावे और तेहरान द्वारा उसे सिरे से ‘फेक न्यूज़’ बताना इस बात का संकेत है…
महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया स्वयंभू ‘धर्मगुरु’ अशोक खरात का मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है बल्कि यह उस गहरे संकट की ओर इशारा करता है, जहां आस्था, सत्ता और अंधविश्वास का गठजोड़ समाज के कमजोर वर्गों के शोषण का माध्यम बन जाता है। एक ओर एक महिला के साथ तीन साल तक कथित बलात्कार, दूसरी ओर 58 आपत्तिजनक वीडियो ये आरोप किसी एक व्यक्ति की विकृत मानसिकता का मामला भर नहीं हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें यह उस संरचना का हिस्सा है, जिसमें ‘धर्म’ के नाम पर विश्वास अर्जित कर,…
मथुरा के कोसी कलां में हुई एक मौत ने फिर वही पुराने सवाल हमारे सामने खड़े कर दिए हैं कि क्या हम एक कानून-आधारित समाज की ओर बढ़ रहे हैं, या भावनाओं, अफवाहों और भीड़ के दबाव में फैसले लेने वाली व्यवस्था की तरफ? कथित ‘गोरक्षक’ चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत के बाद जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि देश में पिछले कुछ वर्षों से बन रहे एक खतरनाक ट्रेंड का हिस्सा है। एक तरफ पुलिस इसे साफ तौर पर सड़क दुर्घटना बता रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समूह इसे ‘सुनियोजित हमला’…
महाराष्ट्र के पुणे में एक मुस्लिम ट्रक ड्राइवर को कथित तौर पर जबरन गोबर खिलाने और उसकी पिटाई करने की घटना ने एक बार फिर देश में “गोरक्षा” के नाम पर चल रहे भीड़तंत्र और कानून के मज़ाक को बेनकाब कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में चार स्वयंभू ‘गोरक्षक’ हिंदुत्ववादी गुंडे एक मुस्लिम युवक को न सिर्फ पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं बल्कि उसके धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए उसे जबरन गोबर खाने के लिए मजबूर करते भी नज़र आ रहे हैं। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के साथ की गई बर्बरता नहीं…
हरियाणा–राजस्थान की सीमा पर हुआ जुनैद–नासिर हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब ढाई साल जेल में रहने के बाद इस मामले के मुख्य आरोपी मोनू मानेसर को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और जैसे ही वह जेल से बाहर आया, उसके गांव में जिस तरह ढोल-नगाड़ों और फूलमालाओं के साथ उसका स्वागत हुआ, उसने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ जमानत का नहीं है। सवाल यह है कि क्या भारत में भीड़ द्वारा किए गए अपराध अब “नायकत्व” में बदल रहे हैं? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक…
ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मॉर्गन के कार्यक्रम Piers Morgan Uncensored में जब पत्रकार पीटर बीनार्ट ने यह कहा कि अगर अमेरिका और इज़रायल ने हमला नहीं किया होता तो वे छात्राएं आज जीवित होतीं, तब श्लैप ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए यह विवादित टिप्पणी कर दी। उनका तर्क था कि ईरान जैसे समाज में लड़कियां “बुर्का पहनकर और बिना आज़ादी के जीवन बिताने को मजबूर होतीं।” एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें यह तर्क कई स्तरों पर सवाल खड़ा करता है। क्या किसी समाज की राजनीतिक या धार्मिक व्यवस्था की आलोचना का मतलब यह है…