- ‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने
- नॉर्वे में पीएम मोदी से पूछा गया एक सवाल ऐतिहासिक क्यों बन गया?
- न कोई गवाह, न कोई सबूत क्या तकनीकी और फॉरेंसिक जांच से तौसीफ़ रज़ा के क़ातिलों को ढूंढ पाएगी पुलिस ?
- क्या बंगाल चुनाव लोकतंत्र के खात्मे की आख़िरी चेतावनी है?
- मासूमों से दरिंदगी पर कब जागेगा कानून, कब मिलेगी दरिंदों को सिर्फ फांसी?”
- भारत की शिक्षा पर भगवा साया: अब समाजशास्त्र नहीं, “मोदीशास्त्र” पढ़ाया जाएगा!
- मुसलमानों पे जुल्म पर मानवाधिकार आयोग की ख़ामोशी को लेकर हाईकोर्ट का करारा प्रहार
- नफरत फैलाओगे, तो कानून पकड़ेगा! सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक ने उड़ाई हेट स्पीच कारोबारियों की नींद
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दोस्तों संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बेयरबॉक के भारत दौरे से पहले विश्व हिंदू परिषद ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर चिंता जताई है। पहली नज़र में यह पहल सराहनीय लगती है। आखिर दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी समुदाय पर होने वाला अन्याय चिंता का विषय होना चाहिए। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है। क्या विहिप की संवेदनाएं सिर्फ सीमाओं के पार रहने वाले अल्पसंख्यकों के लिए हैं? क्या भारत के अल्पसंख्यक उसके लिए नागरिक नहीं हैं? क्या…
भारत को “नरक” कहने वाली भाषा केवल एक विदेशी नेता या रेडियो होस्ट की बदजुबानी नहीं है; यह उस साम्राज्यवादी मानसिकता की बदबू है, जो आज भी दुनिया को अपने तराजू पर तौलती है। भारत को “हेलहोल” कहने वाली टिप्पणी केवल एक अपमानजनक शब्द नहीं, बल्कि उस पश्चिमी श्रेष्ठताबोध की अभिव्यक्ति है, जो आज भी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को बराबरी की नज़र से देखने को तैयार नहीं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें जिस देश ने विश्व को शून्य, योग, आयुर्वेद, बुद्ध, पाणिनि और लोकतांत्रिक बहुलता की अद्भुत परंपरा दी, उसे “नरक” कहना…
भारतीय लोकतंत्र में शायद ही कभी ऐसा क्षण आया हो, जब मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ विपक्ष को इतने गंभीर आरोपों के साथ संसद का दरवाजा खटखटाना पड़ा हो। राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दिया गया नया नोटिस केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और संवैधानिक गरिमा पर उठे अभूतपूर्व सवालों का दस्तावेज है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें आदर्श आचार संहिता के कथित पक्षपातपूर्ण पालन से लेकर, आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों के…
अमरावती के परतवाड़ा में जो घटना घटी वो उस इलाके के मुसलमानों के लिए सिर्फ शर्मसार करने वाली ही नहीं है बल्कि अपने बच्चों को लेकर फिक्रमंद करने और परेशानी में डालने वाली भी है, एक ओर जहां मुसलमान इस घटना को लेकर बेचैन और परेशान हैं वहीँ दूसरी ओर नवनीत राणा जैसी नीच मानसिकता वाली औरत हमेशा हर मौके पे नफरत फ़ैलाने और दंगे भड़काने की कोशिश में लगी रहने वाली ज़हरीली नागिन और पत्रकार के नाम पर दलाली करने वाले झूठे और जाहिल पत्रकारों ने मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगलकर हिन्दू समाज को उकसाने की कोशिश की। एलान…
इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि: युवती ने अदालत के सामने साफ कहा कि वह अपनी मर्जी से रिश्ते में थी उसने धर्मांतरण, जबरन शादी और किसी भी तरह के दबाव के आरोपों को खारिज किया और हर मामलो में यही होता है इसके बावजूद पुलिस ने कई गंभीर धाराओं में जांच जारी रखी। कोर्ट ने इसे “अजीब” बताते हुए पूछा कि जब कथित पीड़िता ही आरोपों को नकार रही है, तो फिर मामला किस आधार पर जिंदा रखा जा रहा है? यह सवाल केवल एक केस का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है जहां आरोप…
TCS नासिक में एक व्यक्तिगत प्रकरण को हिंदुत्ववादी संगठनों और गोदी मीडिया बल्कि इन्हें मीडिया कहना भी मीडिया की तौहीन होगी,असल में 2014 से पहले देश में कुछ मीडिया चैनल TRP के लिए हिन्दू-मुस्लिम की ख़बरें चलाते थे या हर घटना में इस्लाम या मुसलमानों के खिलाफ एंगल ढूंढ़ते थे लेकिन 2014 के बाद जब भाजपा सत्ता में आयी उसने ऐसे मीडिया के गले में पटटा ही बांध दिया तब से ये हड्डी के भूके हर घटना को हिन्दू -मुस्लिम का रंग देकर देश में नफरत फैला रहे हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें…
पश्चिम बंगाल में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा चुनाव आयोग की ‘उपद्रवियों’ की सूची पर लगाई गई रोक केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारत की चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर उठते सवालों का नया अध्याय भी है। अदालत ने साफ कहा कि बिना किसी स्पष्ट कानूनी आधार के नागरिकों को “उपद्रवी” घोषित कर उनके खिलाफ निवारक कार्रवाई की बात करना न केवल अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह मतदान जैसे मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार को भी प्रभावित कर सकता है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर उस भूमिका पर सवाल उठाती है, जो चुनाव आयोग को संविधान के तहत निष्पक्ष प्रहरी…
ईरान और इसराइल अमरीका सिज़ फायर कल ख़त्म होने जा रहा है, लेकिन अब तक अमरीका, इसराइल और ईरान के बीच चल रही बात-चीत बेनतीजा साबित होती नज़र आ रही है लिहाज़ा दुनिया जलने के कगार पर है। ईरान और इसराइल आमने-सामने और पीछे खड़ा है अमेरिका! डोनाल्ड ट्रम्प धमकी देरहा है कि डील नहीं हुई तो ईरान को तबाह कर देंगे! वहीँ ईरान कहरहा है झुकेंगे नहीं! यानी जंग तय है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत पर इसका क्या असर होगा ? जहां भारत में गैस सिलेंडर की कीमत पहले ही लोगों की कमर तोड़ चुकी…
देश की सियासत एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ सवाल सिर्फ एक भाषण का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मर्यादा और सत्ता की सीमाओं का है। कांग्रेस नेता के. सी. वेणुगोपाल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना इसी टकराव का ताज़ा अध्याय है। मुद्दा साफ है कि क्या प्रधानमंत्री का “राष्ट्र के नाम संबोधन” अब राजनीतिक हथियार बन चुका है? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें संसद में हार, और फिर राष्ट्र को संदेश 17 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। आंकड़े…
असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हिमंता बिस्वा शर्मा पर लगे गंभीर आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने जिस तरह मुख्यमंत्री की पत्नी पर कई पासपोर्ट, विदेशी संपत्तियों और भारी-भरकम निवेश के आरोप लगाए हैं, वह केवल एक व्यक्ति या परिवार का मामला नहीं रह जाता बल्कि यह सीधे-सीधे राजनीतिक पारदर्शिता, चुनावी नैतिकता और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ जाता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें आरोप कितने गंभीर हैं? कांग्रेस ने जो आरोप लगाए हैं, वे साधारण राजनीतिक बयानबाज़ी से कहीं आगे जाते हैं: कई देशों…