- 193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?
- सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल
- स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
- सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग
- सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?
- मौ. अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी के गिरफ़्तारी का राज़ ?
- निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
- रामनवमी, उत्सव से टकराव तक: बदलता सामाजिक माहौल और राजनीतिक संदर्भ
Author: admin
सीरिया की ज़मीन पर एक बार फिर बम बरसे हैं। लेकिन इस बार झंडा ब्रिटेन और फ़्रांस का है, और बहाना वही पुरानाआईएस। ब्रिटेन का रक्षा मंत्रालय बड़े इत्मीनान से बताता है कि रॉयल एयर फ़ोर्स के टाइफून जेट्स ने फ़्रांसीसीविमानों के साथ मिलकर आईएस के “अंडरग्राउंड हथियार ठिकाने” को तबाह कर दिया। दावा है कि सब कुछ सटीकथा, नागरिक सुरक्षित रहे और मिशन “सफल” रहा। लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि बम कितने सटीक थे।असली सवाल यह है कि सीरिया पर बम गिराने का लाइसेंस इन्हें किसने दिया? आईएस का नाम लो तो सब माफ़ ?: जैसे ही…
वेनेज़ुएला पर अमेरिका का हमला किसी “नीति” का नतीजा नहीं है बल्कि यह खुली, बेशर्म और नंगी साम्राज्यवादी दादागिरी है। अब छुपाने की कोशिश भी नहीं है। जिस देश के पास तेल है, जिस देश की सरकार वॉशिंगटन के आगे सलाम नहीं ठोकती, जिस देश की जनता अपनी संप्रभुता की बात करती है ऐसे देशों को अमेरिका कुचलने निकल पड़ता है। यही है तथाकथित “अमेरिकी लोकतंत्र”। लोकतंत्र नहीं चाहिए, तो बम बरसाओ! अमेरिका कहता है “हम लोकतंत्र बचा रहे हैं।”सवाल ये है कि किस लोकतंत्र को बचाने के लिए बच्चों की दवाइयाँ रोकी जाती हैं? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से…
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों मुस्लिम युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि वे किस आरक्षण श्रेणी में आते हैं और उन्हें किस तरह का संवैधानिक लाभ मिल सकता है। ऐसे कई युवा हैं जो न तो अनुसूचित जाति में आते हैं, न अनुसूचित जनजाति में, और न ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची में शामिल हैं। ऐसे युवाओं के लिए ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाण पत्र एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभरा है। ईडब्ल्यूएस आरक्षण का उद्देश्य उन परिवारों को आगे लाना है जो सामाजिक रूप…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के ‘एकता, स्थिरता और भेदभाव-मुक्त समाज’ वाले बयान ने एक बार फिर भारतीय राजनीति की उस बुनियादी विडंबना को उजागर कर दिया है, जिसमें कथन और आचरण के बीच गहरी खाई साफ़ दिखाई देती है। कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद की प्रतिक्रिया इसी खाई की ओर सीधा इशारा करती है। सवाल संघ के विचारों पर नहीं, बल्कि उनके कथित अनुयायियों के व्यवहार पर है। मोहन भागवत ने रायपुर में हिंदू सम्मेलन के मंच से जिस तरह ‘भारत सभी का है’ और ‘भेदभाव खत्म करने’ की बात की, वह अपने आप में एक उदार और…
भारत में सोने (गोल्ड) के दाम में हाल ही में तेजी से उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। आज भी बाजार में सोने के दाम मजबूत बने हुए हैं। स्थानीय बाजार की रिपोर्ट के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,35,400 के आस-पास और 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,25,000 के आसपास ट्रेंड कर रहा है। सोने के दाम दिन के दौरान उतार-चढ़ाव दिखा रहे हैं और सर्राफा बाजार में कीमतों में कुछ तेजी का रुख भी देखा गया है। कई स्थानों पर कीमतों में ₹1,000 से ₹1,400 तक का रोज़ाना उछाल भी दर्ज किया गया। क्या सोने का भाव आगे…
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख नेता ख़ालिदा ज़िया का निधन हो गया है। वह 80 वर्ष की थीं। बीएनपी के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें मंगलवार सुबह लगभग छह बजे ढाका में मृत घोषित किया। वह लंबे समय से उम्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं और पिछले कई हफ्तों से अस्पताल में भर्ती थीं। लंबे समय से चल रहा था इलाज ख़ालिदा ज़िया का 23 नवंबर से ढाका स्थित एवरकेयर अस्पताल में इलाज चल रहा था। चिकित्सकों के अनुसार, उन्हें लिवर का एडवांस सिरोसिस, मधुमेह, गठिया के साथ-साथ हृदय और श्वसन संबंधी समस्याएं…
एक ऐलान जो संवैधानिक मूल्यों को सीधे चुनौती देता है मोहन भागवत का यह कहना कि “भारत पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है” किसी सांस्कृतिक बहस की शुरुआत नहीं करता बल्कि यह उस परियोजना का सार्वजनिक ऐलान है, जो भारतीय लोकतंत्र को भीतर से खोखला करने में वर्षों से लगा हुआ है। यह बयान सीधे-सीधे संविधान की वैधता को चुनौती देता है और यह साफ़ करता है कि संघ की नज़र में संविधान एक बाधा है, न कि सहमति का आधार। यह कोई चूक नहीं है। यह एक घोषणा-पत्र है। संविधान को दरकिनार करने की खुली मंशा जब भागवत…
एक युवक की मौत और वीडियो में छोड़े गए गंभीर सवाल महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के औराद शाहजानी गांव से आई यह ख़बर केवल एक 20 वर्षीय युवक की आत्महत्या की सूचना नहीं है। यह घटना उस डर, दहशत और कथित पुलिसिया ज़्यादतियों की कहानी है, जो भारतीय लोकतंत्र और क़ानून-व्यवस्था के चेहरे पर एक गहरा धब्बा हैं। इमरान बेलूरे की मौत से ज़्यादा भारी उसका वह वीडियो है, जिसमे वो रोता नहीं, बल्कि आरोप लगाता है। एक मरते इंसान की गवाही: वह वीडियो सन्देश इमरान के वीडियो में कोई नाटकीयता नहीं है, कोई भावनात्मक अपील नहीं है बल्कि एक…
शक्तिशाली आरोपियों के मामले और न्याय व्यवस्था पर गहरे सवाल उन्नाव के नाबालिग से बलात्कार के मामले में दोषी पाए जाने के बाद उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे, भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा पर रोक लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के ज़मानत देने का मामला अभी सुर्ख़ियों में ही था तब तक एक और भाजपाई बलात्कारी का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी से सामने आया यह मामला केवल एक कथित बलात्कार का नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संकट की तस्वीर है जिसमें पीड़िताएँ तब फँस जाती हैं जब आरोपी प्रभावशाली हो, सत्ता के…
जामिया : भारत के विश्वविद्यालय कभी सवाल पूछने की जगह हुआ करते थे। समाज, सत्ता और व्यवस्था पर कठोर प्रश्न, यहीउच्च शिक्षा की आत्मा रही है। लेकिन जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली में हालिया घटना इस बात का संकेतहै कि अब देश में अत्याचार पर बात करना भी अपराध की श्रेणी में डाला जाने लगा है।बीए (ऑनर्स) सोशल वर्क के एक प्रश्नपत्र में जब ‘भारत में मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों’ पर चर्चा करने कोकहा गया, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे अकादमिक विमर्श नहीं, बल्कि “लापरवाही”, “असावधानी” और“विवाद” मानते हुए प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी शाहारे को निलंबित कर दिया। यह फैसला…