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Author: admin
ग़ज़ा में ज़ायोनी शासन का ताज़ा हमला एक बार फिर दुनिया के सामने वह ख़ूनी चेहरा लाकर खड़ा कर चुका है, जिसे पश्चिमी मीडिया “आत्मरक्षा” कहकर छुपाना चाहता है। लेकिन अब इस ख़ामोशी की चादर को ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने फाड़ दिया है। अज़रबैजान में ईसीओ सम्मेलन के दौरान उन्होंने जो बोला, वह न सिर्फ़ इजरायल के अपराधों की पोल खोलता है, बल्कि मुस्लिम देशों की बेहोशी पर करारा तमाचा भी है। पेज़ेशकियन ने सीधे कहा: यह अफ़सोस की बात है कि ज़ायोनी शासन ग़ज़ा में बेशर्मी से अपराध करता है और हज़ारों बच्चों और महिलाओं का…
जब मुल्क संविधान और क़ानून से नहीं, बल्कि व्हाट्सएप ग्रुप और दक्षिणपंथी संगठनों की धमकियों से चलने लगे, तो समझ लीजिए कि लोकतंत्र खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। महाराष्ट्र के पुणे जिले के पौड़ और पिरंगुट गांवों में मुसलमानों के खिलाफ जो कुछ हुआ है, वो सिर्फ़ ‘बहिष्कार’ नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित और संगठित सांप्रदायिक सफ़ाया अभियान का ट्रेलर है — जिसकी पटकथा लिखी गई है आरएसएस की लैब में, और मंज़ूरी मिली है महाराष्ट्र की सत्ता में बैठे तथाकथित ‘सेक्युलर’ नेताओं की चुप्पी से। बाहरी मुसलमान’ कौन? क्या संविधान उन्हें नागरिक नहीं मानता? 40 सालों से…
दुनिया चौंक रही है, लेकिन इतिहास मुस्कुरा रहा है। जिस अफ़ग़ान ज़मीन को अमेरिका ने 20 साल तक रौंदा, उसे आज रूस ने एक बराबर राष्ट्र की तरह मान्यता दी है।”रूस का साहसिक ऐलान: अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता को सलाम:- रूस ने तालिबान के नेतृत्व वाले अफ़ग़ान इस्लामी अमीरात को औपचारिक मान्यता देकर न सिर्फ एक नया कूटनीतिक अध्याय शुरू किया है, बल्कि पश्चिमी वर्चस्ववादी मानसिकता को सीधी चुनौती भी दी है। काबुल में रूसी राजदूत दिमित्री ज़िरनोव ने अफग़ान विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताक़ी को जब यह संदेश सौंपा, तो सिर्फ एक देश ने नहीं, पूरे ग्लोबल साउथ ने तालियां…
एक देश जहां हर दिन मुसलमानों की दुकानों पर ताले लगते हैं, उनका बहिष्कार होता है, उनकी लिंचिंग होती है, दलितों को जिंदा जलाया जाता है, पिछड़े तबकों को ‘कौशलहीन’ कहकर अपमानित किया जाता है — वो देश मोदी सरकार की नज़र में दुनिया का चौथा सबसे समान देश है? अगर यह मज़ाक न होता, तो यह त्रासदी होती। लेकिन असल में ये दोनों है — एक भीषण मज़ाक और एक राष्ट्रीय त्रासदी। 28% गरीब, लेकिन ‘बराबरी’ में टॉप पर?:- केंद्र सरकार की 5 जुलाई की प्रेस विज्ञप्ति में भारत को ‘दुनिया का चौथा सबसे समानता वाला देश’ बताया गया…
राम पुनियानी- इस साल (2025) में जून में देश ने आपातकाल (इमरजेंसी) लागू किए जाने की 50वीं वर्षगांठ मनाई. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में 25 जून को देश में आपातकाल लागू किया था. इस दौर के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है – किस तरह लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए, हजारों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया और मीडिया का मुंह बंद कर दिया गया. इस काल को कई दलित नेता काफी अलग नजर से देखते हैं और याद करते हैं कि उसके पिछले दशक में इंदिरा गांधी ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण और प्रीविपर्स की समाप्ति जैसे…
मुनाफे के लिए नरसंहार”: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने इज़रायल की मदद करने वाली कंपनियों की खोली पोल!
दुनिया देख रही है ग़ज़ा में हो रहे जनसंहार को… लेकिन कुछ कंपनियाँ इसे “कमाई का मौका” मान रही हैं! संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट साफ़ कहती है – इज़रायल का ग़ज़ा पर हमला सिर्फ़ एक युद्ध नहीं, बल्कि एक “नरसंहार की अर्थव्यवस्था” बन चुका है। इन नरसंहारों में शामिल हैं – हथियार बनाने वाली कंपनियाँ, टेक्नोलॉजी कंपनियाँ, किराए की वेबसाइटें, बैंक और बीमा कंपनियाँ। कौन हैं ये ‘जनसंहार के व्यापारी’?:- संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने एक विस्फोटक रिपोर्ट में बताया कि कैसे बड़ी-बड़ी कंपनियाँ इज़रायल की हत्या मशीनरी को समर्थन देकर अरबों डॉलर कमा रही हैं। हथियार…
मरने वाला पाकिस्तानी आतंकवादी नहीं, एक मासूम शिक्षक था।” लेकिन गोदी मीडिया के कैमरों और चीखते एंकरों ने उसे आतंकवादी बना दिया — वो भी बिना किसी सबूत, बिना किसी जांच, बिना पुलिस या सेना की पुष्टि के। अब अदालत ने आदेश दिया है कि ज़ी न्यूज़, न्यूज़18 और अन्य चैनलों के संपादकों व एंकरों पर FIR दर्ज हो। जम्मू-कश्मीर की अदालत का यह फ़ैसला सिर्फ एक व्यक्ति के इंसाफ की दिशा में नहीं, बल्कि पूरे देश की दम तोड़ती पत्रकारिता को आइना दिखाने की कोशिश है। झूठी रिपोर्टिंग का ‘राष्ट्रवादी’ जाल:- क़ारी मोहम्मद इक़बाल — एक धार्मिक शिक्षक, एक…
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले एक ऐसा प्रशासनिक फैसला सामने आया है जिसने न सिर्फ राज्य की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि भारत के लोकतंत्र पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार में “स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR)” यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें सबसे विवादास्पद बात ये है कि 2003 के बाद मतदाता सूची में शामिल हर व्यक्ति से नागरिकता प्रमाण मांगा जा रहा है — एक ऐसा कदम जो एनआरसी की स्मृति ताज़ा करता है। विपक्षी दलों ने इसे साफ़ तौर पर ‘गुप्त एनआरसी’ कहा…
अगर तुम बोलोगे, तो वे तुम्हारे पीछे आएंगे! ये लाइन कोई फ़िल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के जवाब में कही गई वो बात है, जिसने न्यूयॉर्क की राजनीति को हिला कर रख दिया है। और जिसने कही है, उनका नाम है – ज़ोहरान ममदानी, न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के उम्मीदवार और भारतीय मूल की शान। ट्रंप की धमकी और ममदानी का तीखा जवाब:- जब ट्रंप ने ज़ोहरान ममदानी को गिरफ्तार करने, नागरिकता छीनने और निर्वासित करने की धमकी दी, तो पूरी दुनिया को लगा शायद ममदानी डर जाएंगे, झुक जाएंगे। लेकिन उन्होंने डर को…
1. क्या हुआ था? – मामला समझिए:- 1. क्या हुआ था? – मामला समझिए:- श्रीनगर (कश्मीर) के ज़ादीबल इलाके में तीन नाबालिग लड़कियों ने एक सड़क के पास इज़रायल विरोधी ग्राफिटी (चित्र) बनाया। बताया गया कि उन्होंने ज़मीन पर ऐसा चित्र बनाया जो इज़रायली झंडे जैसा लग रहा था — यानी शायद वह इज़रायल के खिलाफ विरोध का तरीका था। पुलिस वहां पहुंची और वो चित्र मिटा दिया गया। फिर पुलिस ने तीनों लड़कियों की पहचान की और उनके माता-पिता को थाने बुलाया। थाने में “काउंसलिंग” की गई – यानी पुलिस ने लड़कियों को समझाया कि ऐसा नहीं करना चाहिए।…