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आज लातूर में हुई ज़ोरदार बारिश से शहर की सड़कें नदियां बन चुकी थी, इन सड़कों के नदियां बनाने में लातूर शहर महानगर पालिका की भी बहुत अहेम भूमिका है, रास्तों पे कचरों के ढेर पढ़े हुए रहते हैं, जो बारिश के पानी के साथ बहेकर नालियों में चला जाता है जिसकी वजह से नालियां जाम होती हैं, बाज़ सड़कों पे तो जहां बड़ीं नालियां हैं वहां महानगर पालिका ने JCB से नालियों का कचरा निकाला ज़रूर था लेकिन वक़्त पे उस कचरे को न उठाने के कारन फिर से वो कूड़ा करकट नालियों में चला गया जिसकी वजह से…
“ग़ज़ा के 77 फीसद हिस्से पर अब इसराइली क़ब्ज़ा हो चुका है। हज़ारों घर मलबे में बदल गए हैं। 62 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं… लेकिन मरने वालों की सही गिनती शायद कभी सामने ना आ सके क्योंकि हज़ारों लाशें अभी भी मलबे के नीचे दबी हुई हैं। 220 से ज़्यादा पत्रकार मारे गए हैं। ग़ज़ा में घर छोड़ना भी जुर्म बन गया है आज हालात ये हैं कि: जो घर में हैं, उन्हें बमों से मारा जा रहा है। जो घर छोड़ते हैं, उन्हें रास्ते में उड़ा दिया जाता है। और जिन्हें इज़राइल “सेफ ज़ोन” कहता…
मराठवाड़ा विशेषकर लातूर में पिछले एक हफ्ते से मानो आसमान ही टूट पड़ा हो! दिन हो या रात… हर वक्त काले बादल, गरजती बिजली, और मूसलधार बारिश ने कुछ जिलों को हिला कर रख दिया है!” इस दौरान कई जगहों पर खेतों में पानी भर गया है, फसलें बर्बाद हो गई हैं, और अफ़सोस की बात है कि कुछ जगहों पर लोगों और मवेशियों की जान भी गई है। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ लातूर ज़िले में बिजली गिरने से 3 लोगों की मौत हुई है और 9 मवेशी मारे गए हैं। उस्मानाबाद और बीड़ ज़िलों के कई गांवों…
“वो देशभक्ति नहीं बेच रहे, वो शहीदों की चिता पर होर्डिंग लगा रहे हैं।” रेलवे टिकट — वो साधारण सा काग़ज़, जिसे लोग जेब में मोड़कर रखते हैं, या सफ़र के बाद कूड़े में फेंक देते हैं — अब सरकार का प्रचार पर्चा बन चुका है। और इस बार, इस प्रचार के केंद्र में है “ऑपरेशन सिंदूर”, जिसके पीछे एक ही चेहरा है — नरेंद्र मोदी। हाल ही में भारत सरकार द्वारा रेलवे टिकटों पर “ऑपरेशन सिंदूर” के विज्ञापन और प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीरें छापने को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। यह सिर्फ…
गुजरात के अहमदाबाद में चंदोला झील के आसपास 7,000 से ज्यादा घरों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। यह सिर्फ एक तोड़फोड़ नहीं थी, यह एक सुनियोजित सामाजिक सफाई थी — एक ऐसा प्रशासनिक युद्ध जिसमें हजारों मुस्लिम परिवारों को बांग्लादेशी कहकर उनकी नागरिकता, अस्तित्व और इज़्ज़त को कुचलने की कोशिश की गई। फैसला: अदालत का या सत्ता का हथियार?:- 29 अप्रैल को गुजरात हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई को “वाजिब” ठहराया, यह कहते हुए कि यह जमीन सरकारी थी और निर्माण अवैध थे। लेकिन क्या यही कसौटी है कार्रवाई की? देशभर में लाखों गैरकानूनी निर्माण हैं — क्या…
भाजपा को चुनावी बॉन्ड के ज़रिए 30 करोड़ रुपये का चंदा देने वाली एपको इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड अब भारत की सबसे बड़ी सरकारी स्टील कंपनी ‘सेल’ से जुड़े एक 400 करोड़ के घोटाले में आरोपी पाई गई है। यह मामला केवल आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि राजनीति, कॉरपोरेट और सरकारी तंत्र की आपसी मिलीभगत का घिनौना उदाहरण है, जो भारत के लोकतंत्र और सार्वजनिक संस्थानों की आत्मा को छलनी कर देता है। भ्रष्टाचार की नई परिभाषा: चंदा दो, मनचाही कृपा पाओ, जब से चुनावी बॉन्ड की प्रणाली शुरू हुई है, उसने भ्रष्टाचार को वैधानिकता का चोला पहना दिया है। कोई…
जोसेफ गोयबल्स ने कहा था: “अगर आप कोई बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे बार-बार दोहराते हैं, तो लोग अंततः उस पर विश्वास कर ही लेंगे।” नाजी जर्मनी में जोसेफ गोयबल्स एडॉल्फ हिटलर का सूचना एवं प्रचार मंत्री था। नाजी शासन में मीडिया, सिनेमा, रेडियो, पोस्टर, स्कूल की किताबों, और अखबारों का इस्तेमाल कर इस नीति का उपयोग करके यहूदियों को “गद्दार”, “राष्ट्र-विरोधी” और “गंदगी” बताया गया, जिससे जनता का मनोबल तैयार किया गया कि उनके खिलाफ हिंसा न्यायसंगत है। यह नीति बताती है कि “सत्य” और “अविश्वास” की रेखा तब धुंधली हो जाती है जब कोई झूठ बहुत बार…
22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया। लेकिन इस हमले का असर सिर्फ घाटी तक सीमित नहीं रहा। इसके ठीक बाद, देशभर में मुसलमानों और कश्मीरियों के खिलाफ़ नफरत, हिंसा और प्रतिशोध की आग भड़की — जो किसी स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया से ज़्यादा, एक संगठित नफरत के अभियान का हिस्सा प्रतीत होती है। APCR (Association for Protection of Civil Rights) और ‘द ऑब्जर्वर पोस्ट’ द्वारा प्रकाशित ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पहलगाम हमले के बाद सिर्फ़ तीन हफ्तों के भीतर देश में 300 से ज़्यादा मुस्लिम विरोधी घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से…
लेखक: सैयद आसिफ नदवी- जब किसी कौम के जिस्म से एकता की रूह निकल जाए, जब उसके रहनुमा केवल भौगोलिक सीमाओं में सिमट जाएँ, जब कौमें “वतन” के नारों के पीछे “उम्मत” के विचार को भूल जाएँ, तो न तो बैतुल मक़दिस की पवित्रता बचती है, और न ही किसी मुसलमान के खून की कोई कीमत रह जाती है।आज का इस्लामी जगत इसी पतन और गफलत की तस्वीर पेश कर रहा है, जहाँ क्षेत्रीयता, जातीयता और स्वार्थपरता ने एकता, भाईचारा और इस्लामी गरिमा का गला घोंट दिया है। डोनाल्ड ट्रंप—एक ऐसा वैश्विक नेता जिसके हाथ मुस्लिम देशों की तबाही, इज़राइल…
जब एक देश अरबों डॉलर के हथियार खरीदने का ऐलान करता है, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर ताक़त और प्रभुत्व की नई इबारत लिखने का दावा किया जाता है। पर क्या यह ताक़त वाकई असली है या सिर्फ दिखावे की चमक? सऊदी अरब और अमेरिका के बीच हुआ 600 अरब डॉलर का “ऐतिहासिक सौदा”, जिसमें से 142 अरब डॉलर केवल हथियारों पर खर्च होंगे, इस सवाल को और भी गहराई से उठाता है- क्या सऊदी अरब वास्तव में एक सैन्य महाशक्ति बनना चाहता है, या बस पश्चिमी देशों की सैन्य अर्थव्यवस्था का उपभोक्ता बना रहना चाहता है? सऊदी अरब दुनिया के…