अगर तुम बोलोगे, तो वे तुम्हारे पीछे आएंगे! ये लाइन कोई फ़िल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के जवाब में कही गई वो बात है, जिसने न्यूयॉर्क की राजनीति को हिला कर रख दिया है। और जिसने कही है, उनका नाम है – ज़ोहरान ममदानी, न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के उम्मीदवार और भारतीय मूल की शान।
ट्रंप की धमकी और ममदानी का तीखा जवाब:- जब ट्रंप ने ज़ोहरान ममदानी को गिरफ्तार करने, नागरिकता छीनने और निर्वासित करने की धमकी दी, तो पूरी दुनिया को लगा शायद ममदानी डर जाएंगे, झुक जाएंगे। लेकिन उन्होंने डर को लतिया कर जवाब दिया – “मैं पीछे नहीं हटूंगा!” ट्रंप का गुस्सा इस बात पर भड़का कि ममदानी ने साफ़ कहा –अगर मैं मेयर बना, तो आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को न्यूयॉर्क में डर फैलाने से रोकूंगा। बस! इतना कहना ही ट्रंप को नागवार गुज़रा। वो चाहते हैं कि डर का माहौल बना रहे, और ममदानी उस डर को चुनौती दे रहे हैं।
ट्रंप की गीदड़भभकी: लोकतंत्र पर हमला:- ट्रंप ने ममदानी को ‘कम्युनिस्ट’, ‘पागल’ और ‘खतरा’ बताया है। उन्होंने धमकी दी –अगर ममदानी मेयर बने तो न्यूयॉर्क की फेडरल फंडिंग बंद कर दूंगा। अब ज़रा सोचिए – क्या ये धमकी किसी तानाशाह की तरह नहीं लगती? क्या एक निर्वाचित राष्ट्रपति को यह शोभा देता है कि वह अपने ही देश के एक उम्मीदवार को देश से बाहर निकालने की बात करे? सिर्फ इसलिए कि वो इंसान गरीब प्रवासियों के साथ खड़ा है?
कौन हैं ज़ोहरान ममदानी?:- भारतीय मूल के हैं। मशहूर फ़िल्ममेकर मीरा नायर के बेटे। 1998 में युगांडा से अमेरिका आए। सामाजिक न्याय, प्रवासियों और मुस्लिम-अफ़्रीकी समुदाय के लिए आवाज़ उठाते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बने, पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो को हराया और यही बात ट्रंप को सबसे ज़्यादा खटक रही है – एक मुसलमान, एक अप्रवासी, अब सत्ता के केंद्र तक पहुँचने वाला है।
न्यूयॉर्क की लड़ाई: ट्रंपवाद बनाम इंसाफ:-ममदानी ने साफ़ कहा: “हम डरकर नहीं छिपेंगे। हम लड़ेंगे।” उन्होंने न्यूयॉर्क के मौजूदा मेयर एरिक एडम्स पर भी हमला बोला और कहा कि एडम्स ने ट्रंप जैसी नफ़रती और बाँटने वाली राजनीति अपनाई है।
अब सवाल है –क्या अमेरिका में अब कोई नेता प्रवासियों, मुसलमानों या अल्पसंख्यकों की बात करेगा तो उसे “देशद्रोही” कहा जाएगा? क्या नागरिकता अब ट्रंप की मर्ज़ी से मिलेगी या जाएगी?
इस पूरे मामले से क्या समझें?:- ट्रंप अपने विरोधियों से डरते हैं, खासकर तब जब वो सिस्टम के हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बनें। ज़ोहरान ममदानी जैसे नेता उम्मीद की एक नई किरण हैं, जो ट्रंपवाद के अंधेरे को चुनौती दे रहे हैं। ये चुनाव सिर्फ न्यूयॉर्क का नहीं है, ये न्याय बनाम नफ़रत की लड़ाई है। अमेरिका में भी अब “जो बोलता है, वो दबाया जाता है” का दौर शुरू हो गया है – भारत की तरह ही।
ट्रंप की धमकी, ममदानी की बहादुरी और न्यूयॉर्क का जनमत – ये आने वाला समय तय करेगा कि अमेरिका डर के आगे झुकेगा, या इंसाफ के साथ खड़ा रहेगा। और आख़िर में एक लाइन: ज़ोहरान ममदानी सिर्फ न्यूयॉर्क के लिए नहीं लड़ रहे, वो हर उस इंसान के लिए लड़ रहे हैं जिसे इस दौर में चुप रहने को मजबूर किया जा रहा है।