Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?

September 7, 2026

गाय के नाम पर इंसान की बेइज्जती? जालना की घटना ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

September 7, 2026

UN की रिपोर्ट और सरकार की खामोशी: आखिर कितनी चेतावनियों के बाद जागेगी सत्ता?

September 6, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?
  • गाय के नाम पर इंसान की बेइज्जती? जालना की घटना ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
  • UN की रिपोर्ट और सरकार की खामोशी: आखिर कितनी चेतावनियों के बाद जागेगी सत्ता?
  • मलाला की किताब से इतना डर क्यों? यह सिर्फ एक किताब नहीं, सोच की आज़ादी का सवाल है
  • विदेश में ‘एकता’ का संदेश, देश में नफ़रत की राजनीति पर खामोशी
  • आरएसएस पर अमेरिका में बवाल: आखिर नफ़रत और जातिवाद की राजनीति से देश कब आज़ाद होगा?
  • वक्फ बोर्ड में बढ़ती धांधलियां… वक्फ की असली मंशा पर निजी हित भारी
  • 10 हज़ार ‘गो मित्र’ और चुनावी राजनीति- रोजगार का मॉडल या आस्था के सहारे नई सियासत?
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Monday, September 7
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»एलान विशेष

28% गरीबों वाला देश ‘दुनिया का चौथा सबसे समान देश’? — मोदी सरकार की बौद्धिक ठगी और ज़मीनी सच्चाई का भंडाफोड़”

adminBy adminJuly 11, 2025 एलान विशेष No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
image credit: ourworld.unu.edu
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

एक देश जहां हर दिन मुसलमानों की दुकानों पर ताले लगते हैं, उनका बहिष्कार होता है, उनकी लिंचिंग होती है, दलितों को जिंदा जलाया जाता है, पिछड़े तबकों को ‘कौशलहीन’ कहकर अपमानित किया जाता है — वो देश मोदी सरकार की नज़र में दुनिया का चौथा सबसे समान देश है? अगर यह मज़ाक न होता, तो यह त्रासदी होती। लेकिन असल में ये दोनों है — एक भीषण मज़ाक और एक राष्ट्रीय त्रासदी।

28% गरीब, लेकिन ‘बराबरी’ में टॉप पर?:- केंद्र सरकार की 5 जुलाई की प्रेस विज्ञप्ति में भारत को ‘दुनिया का चौथा सबसे समानता वाला देश’ बताया गया — यह दावा न केवल तथ्यात्मक रूप से झूठ है, बल्कि बौद्धिक बेईमानी का नमूना है। कांग्रेस ने rightly इस बयान को “धोखाधड़ी”, और “जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ प्रचार” बताया। जयराम रमेश ने बिल्कुल सही कहा — आप क्रोनोलॉजी समझिए: अप्रैल 2025 में विश्व बैंक की रिपोर्ट आई, जिसमें भारत की 28.1% गरीब आबादी और वेतन में 13 गुना का फर्क उजागर किया गया। फिर जुलाई 2025 में सरकार ने उसी रिपोर्ट की आधी-अधूरी बातें लेकर उसे उपलब्धि की तरह पेश कर दिया। यानी आंकड़े वही, व्याख्या मनमर्ज़ी की!

सरकार की चाल: तुलना में धोखाधड़ी:- मोदी सरकार ने भारत की उपभोग आधारित असमानता को उठाया और उसे दुनिया के आय आधारित असमानता मापदंड से तुलना में पेश कर दिया। यानी सेब की तुलना आम से की गई। जबकि सच्चाई ये है कि उपभोग आधारित आंकड़े हमेशा असली असमानता को कम करके दिखाते हैं, क्योंकि अमीर लोग अपनी बड़ी आय को खर्च नहीं करते, बल्कि बचाते हैं। इसका मतलब है कि देश की असली आय असमानता कहीं ज़्यादा भयानक है।

असल सच्चाई: न न्याय है, न बराबरी:- भारत में आज किस तरह की ‘समानता’है? मुसलमानों को कभी पोस्टर लगाकर गांव से निकाला जाता है (पुणे), कभी मॉब लिंचिंग की जाती है, कभी आतंकवादी बताकर एनकाउंटर में मार दिया जाता है। दलितों को पानी भरने, मूंछ रखने, मंदिर में जाने, शादी बारात निकालने तक में मारा जा रहा है। ओबीसी और आदिवासियों को आरक्षण खत्म कर ‘योग्यता’ की आड़ में पीछे धकेला जा रहा है।

ये कैसी समानता है?:- क्या सरकार ने इन अत्याचारों का गिनी इंडेक्स निकाला है? झूठ के आंकड़ों से नहीं छुपती असमानता की बदबू, सरकार जिस रिपोर्ट को गले में तावीज़ बनाकर लटकाए घूम रही है, उसी विश्व बैंक की रिपोर्ट साफ़ कहती है: भारत में टॉप 10% लोग निचले 10% से 13 गुना ज़्यादा कमाते हैं। 2022 में भारत की गरीबी दर 28.1% थी — यानी लगभग हर तीन में से एक भारतीय गरीब है। सरकार ने पुराने सर्वे (2017-18) को दबा दिया, क्योंकि उसमें ग्रामीण भारत में खपत की गिरावट दिखाई गई थी। यानी आंख मूंद लो, तो गरीबी गायब समझो!

‘सबका साथ, पर अमीरों का विकास’?:- मोदी सरकार की नीतियां अब एकदम साफ़ हो चुकी हैं: गरीबों को राशन की लाइन में रखो। अमीरों को बैंक के लोन और कॉरपोरेट टैक्स कटौती दो। मुसलमानों और दलितों को ‘गद्दार’ और ‘अयोग्य’ बताकर हाशिए पर रखो। और ऊपर से दुनिया को दिखाओ — देखो! हम समानता में चौथे हैं! ‘समानता’ की आड़ में घिनौनी असमानता का खेल:- अगर यही समानता है, तो फिर: गौतम अडानी और अंबानी की दौलत हर साल 100% क्यों बढ़ रही है? भारत के Top 1% लोग देश की कुल संपत्ति का 40% से अधिक हिस्से पर क्यों काबिज़ हैं? 2024 के Oxfam रिपोर्ट के अनुसार 75% लोग तो बैंक में 10,000 रुपये भी नहीं रखते! क्या वो ‘बराबर’ हैं?

भारत को दुनिया से नहीं, खुद से तुलना करनी चाहिए:- भारत को स्लोवाकिया और बेलारूस से तुलना करने की ज़रूरत नहीं। भारत को खुद से पूछना चाहिए: क्या आज एक गरीब मुस्लिम लड़का IIT तक पहुंच सकता है? क्या एक दलित लड़की मेडिकल कॉलेज जा सकती है, बिना अपमान और भेदभाव के? क्या ओबीसी किसान का बेटा उद्योगपति बन सकता है, बिना कोई ‘गोत्र प्रमाणपत्र’ दिखाए? अगर नहीं — तो भारत ‘समानता’ में चौथे नहीं, बल्कि ढोंग में पहले नंबर पर है। ये देश प्रचार से नहीं, सच्चाई से चलेगा, कांग्रेस का ये विरोध, सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक है। क्योंकि अगर 28% गरीबी और 13 गुना वेतन का अंतर है, तो ये समानता नहीं — कब्रिस्तान की चुप्पी है। मोदी सरकार ने ‘न्यू इंडिया’ के नाम पर एक ऐसा देश बना दिया है, जहां समानता के नाम पर झूठ, न्याय के नाम पर साज़िश और आंकड़ों के नाम पर ठगी परोसी जाती है। अब फैसला जनता को करना है — आप आंकड़ों के नशे में रहना चाहते हैं या असल ज़िंदगी की हकीकत को पहचानना?

#28PercentPoor #AdaniAmbaniGrowth #BharatKiAsliyat #BJPPropaganda #DalitDiscrimination #DataManipulationIndia #EconomicInequalityIndia #EqualityOrTragedy #FakeEqualityClaim #GareebKaMazaaq #GaribiAurBarabari #HaqKiLadai #HindutvaPolitics #IndiaEqualityMyth #JaiRamRameshStatement #MobLynchingIndia #ModiGovernmentLies #ModiSarkarExposed #BharatKiAsliyat #GaribiAurBarabari #28PercentPoor #MuslimBoycott #NewIndiaKaSach #OBCAdiwasiRights #OxfamIndiaReport #RationForPoorLoansForRich #SabkaSaathSabkaVikasJhoot #UnemploymentAndPoverty #WorldBankReportIndia
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?

आरएसएस पर अमेरिका में बवाल: आखिर नफ़रत और जातिवाद की राजनीति से देश कब आज़ाद होगा?

क्या एनसीईआरटी शिक्षा को बदल रही है या इतिहास और राजनीति की नई व्याख्या लिख रही है?

जब संगठन समाज जोड़ने के बजाय दीवारें खड़ी करने लगें

15 अगस्त: तिरंगा पूछ रहा है—क्या सचमुच सब आज़ाद हैं?

कांवड़ यात्रा या कानून से ऊपर होती भीड़? जब रास्ते में बच्चे हों, दुकानदार हों और आम जनता हो तो जिम्मेदारी किसकी?

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?
  • गाय के नाम पर इंसान की बेइज्जती? जालना की घटना ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
  • UN की रिपोर्ट और सरकार की खामोशी: आखिर कितनी चेतावनियों के बाद जागेगी सत्ता?
  • मलाला की किताब से इतना डर क्यों? यह सिर्फ एक किताब नहीं, सोच की आज़ादी का सवाल है
  • विदेश में ‘एकता’ का संदेश, देश में नफ़रत की राजनीति पर खामोशी
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

प्रीति जिंटा की ‘टीम तुकाराम मुंढे’ टी-शर्ट सोशल म प्रीति जिंटा की ‘टीम तुकाराम मुंढे’ टी-शर्ट सोशल मीडिया पर वायरल, मुंढे की डैशिंग कार्यशैली की हो रही चर्चा#elaannews #breakingnews #maharashta #tukarammundhe #pritizinta
मुझे चुनाव में शिक्षित इलाकों की तुलना में क्रिमिन मुझे चुनाव में शिक्षित इलाकों की तुलना में क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से ज्यादा वोट मिले।- नितीन गडकरी - केंद्रीयमंत्री#elaannews #breakingnews #maharashta #nitingadkari #nagpurnews
लातूर जिले में बढ़ते सड़क हादसों और दोपहिया वाहन च लातूर जिले में बढ़ते सड़क हादसों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को देखते हुए लातूर पुलिस ने 1 सितंबर 2026 से पूरे जिले में हेल्मेट नियम की सख्ती से अमल शुरू किया है। पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे के मार्गदर्शन में चल रही इस मुहिम में अब तक हेल्मेट नहीं पहनने वाले 4,734 दोपहिया वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई है।अभियान के पहले चरण में राष्ट्रीय और राज्य महामार्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले के 23 पुलिस थानों और यातायात नियंत्रण शाखा के माध्यम से वाहन चालकों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों और सिर की गंभीर चोटों को रोकना है।पुलिस के मुताबिक अभियान शुरू होने से पहले जिले में हेल्मेट इस्तेमाल का प्रमाण बेहद कम था, जो पहले सप्ताह में बढ़कर करीब 10 से 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में 100 प्रतिशत हेल्मेट इस्तेमाल होने त�
लातूर के प्रभाग क्रमांक 16 स्थित कापड़ मिल गली नंब लातूर के प्रभाग क्रमांक 16 स्थित कापड़ मिल गली नंबर 1 में 7 सितंबर 2026 को करीब 11:30 बजे कचरा गाड़ी पहुंची, लेकिन स्थानीय नागरिकों के मुताबिक करीब 15 से 20 घरों का कचरा उठाए बिना ही गाड़ी वापस चली गई।कर्मचारियों की ओर से कथित तौर पर रास्ते में बाइक खड़ी होने के कारण गाड़ी आगे नहीं जा पाने की बात कही गई। हालांकि, मौके पर मौजूद नागरिकों का दावा है कि रास्ता इतना संकरा नहीं था कि कचरा गाड़ी वहां से निकल न सके।नागरिकों का आरोप है कि इलाके में कचरा गाड़ी नियमित रूप से नहीं आती और कभी-कभी एक-दो हफ्ते में गाड़ी पहुंचती है। ऐसे में अगर गाड़ी आने के बाद भी घरों का कचरा नहीं उठाया जाएगा तो नागरिक कचरा कहां डालें?वीडियो बनाने के दौरान कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर ‘हम नहीं आएंगे, नहीं लेंगे कचरा’ जैसी बात कहे जाने का भी नागरिकों ने दावा किया है। अब सवाल यह है कि क्या पूरे मामले की जांच होगी और अगर कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो क्या संबंधित कर्मचारि�
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility