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धर्मनिरपेक्ष” और “समाजवादी” यही दो शब्द आज उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नजर में नासूर बन चुके हैं। 28 जून को The Tribune को दिए गए इंटरव्यू में उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये शब्द आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़े गए और “ये हमारे अस्तित्व पर संकट हैं, सभ्यता का अपमान हैं और सनातन की आत्मा का अपवित्रीकरण।”ध्यान देने वाली बात यह है कि धनखड़ का यह बयान ठीक उन्हीं दिनों आया जब आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने भी “धर्मनिरपेक्ष” और “समाजवादी” शब्दों की प्रस्तावना से समीक्षा की मांग उठाई। दोनों टिप्पणियां महज़ संयोग नहीं लगतीं बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक…
ज़ोहरान ममदानी कौन हैं?:- ज़ोहरान ममदानी एक मुसलमान नेता हैं जो 2018 में अमेरिकी नागरिक बने और 2020 में न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य चुने गए। अब 2025 में, उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी जीत ली है। अगर वे चुनाव जीतते हैं तो न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे।-इंशाअल्लाह लेकिन जैसे ही उन्होंने ये चुनाव जीता, उनके खिलाफ इस्लामोफोबिक (मुस्लिम-विरोधी) हमले तेज़ हो गए। अमेरिका जैसे देश में मुसलमान नेता पर इतने हमले क्यों? अमेरिका खुद को धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) देश कहता है, लेकिन ज़ोहरान ममदानी के खिलाफ हो रही बयानबाज़ी से ये दावा…
राम पुनियानी- इन दिनों ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ में हिंदू राष्ट्रवाद के उदय एवं प्रभुत्व पर योगेन्द्र यादव, सुहास पलसीकर एवं अकील बिलग्रामी जैसे मेधावी समाज विज्ञानियों के अत्यंत गहन विचार प्रकाशित हो रहे हैं. वे इस बात से चिंतित हैं कि भारतीय राष्ट्रवाद की वर्तमान अवधारणा यूरोपियन ढंग के राष्ट्रवाद जैसी है. हम इसे हिन्दुत्व की राजनीति या हिंदू राष्ट्रवाद का नाम देते हैं. ये सभी यह स्वीकार करते हैं कि हिन्दू राष्ट्रवाद ही आज विद्यमान राष्ट्रवाद है. इसमें कोई संदेह नहीं कि हिन्दू राष्ट्रवाद अत्यंत मुखर एवं प्रभुत्वशाली है. लेकिन फिर भी भारतीय राष्ट्रवाद का विचार अभी तक भारतीय समाज के…
पहले हम ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध पर ताज़ा अपडेट जानते हैं उसके बाद आपको बताएँगे इस जंग का असल मक़सद क्या है ? तो आइए पहले जानते हैं कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की ताज़ा स्थिति क्या है ? डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि: “ईरान और इजरायल के बीच अब युद्ध रुक गया है, यानी संघर्षविराम (सीज़फायर) लागू हो गया है।” लेकिन क्या ट्रंप के कहते ही ये जंग रुक जाएगी ? क्या यह युद्ध रुक गया ? ट्रम्प ने जो युद्धविराम की बात कही है, वो एकतरफा बयान है। ईरान…
एक मुस्लिम व्यापारी की दुकान पर पाबंदी और हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी से उठे कई सवाल। क्या कोई मुसलमान भारत के संविधान के तहत मिली ज़मीन खरीदने और व्यापार करने की आज़ादी का इस्तेमाल कर सकता है — हर राज्य में? या क्या यह अधिकार भी अब “बहुसंख्यक धर्म” की सहूलियत और सहमति का मोहताज बन चुका है? गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बेहद अहम फैसले में सरकार को यह याद दिलाया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसका कर्तव्य है और एक मुस्लिम व्यापारी को उसकी अपनी वैध दुकान खोलने से रोका नहीं जा सकता। लेकिन सवाल यह है…
क्या हिंदुत्व अब अमेरिका में भी मुसलमानों को सत्ता से रोकना चाहता है? “ग्लोबल इंटिफ़ादा”? नहीं, ये ग्लोबल हेट इंपोर्ट है! 24 जून, 2025 को जब भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ज़ोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद की प्राइमरी में धमाकेदार जीत दर्ज की — तो यह सिर्फ़ एक चुनावी जीत नहीं थी, बल्कि यह उस ज़हर के खिलाफ जनादेश था जो कुछ दक्षिणपंथी भारतीय और हिंदू-अमेरिकी संगठन अमेरिका में भी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ज़ोहरान की राजनीति न्याय, बराबरी और मज़दूरों के हक़ पर टिकी है। लेकिन उन्हें निशाना बनाया गया — सिर्फ़ इसलिए कि वे मुसलमान…
एक क़ौम… जो फ़िरऔन से बचाई गई। एक नबी… जिसने उन्हें समंदर के पार पहुंचाया। और बदले में क्या हुआ? वो नबी भी उन्हीं की ग़द्दारी का शिकार बना।” मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को आज़ादी दिलाई। लेकिन वो क़ौम जो अल्लाह की सबसे ज़्यादा नेमतों से नवाज़ी गई थी, वही सबसे बड़ी नाशुक्री निकली।”मूसा अलैहिस्सलाम… वो नबी जिसने यहूदियों को फ़िरऔन के ज़ुल्म से आज़ादी दिलाई। लेकिन उन्हें बदले में क्या मिला ? उनके ही लोग सोने का बछड़ा पूजने लगे, नबी की बातों को झुठलाने लगे। इसी बनी इस्राईल क़ौम ने हर दौर में अपने पैग़म्बरों से धोखा…
भाजपा राज में दलितों के आत्म-सम्मान को रौंदती सत्ता की सामंती मानसिकता. क्या भारत में दलित आज भी केवल वोट बैंक हैं? और क्या भाजपा शासन में यह स्थिति और भयावह होती जा रही है? 16 जून को आंध्र प्रदेश के कुरनूल ज़िले में जो हुआ — वो सिर्फ़ एक ‘घटना’ नहीं है, बल्कि उस विकराल जातिवादी मानसिकता की तस्वीर है, जो भारत में भाजपा के तथाकथित ‘सबका साथ, सबका विकास’ की असलियत को उजागर करती है। क्या हुआ था?:- एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाजपा विधायक पी.वी. पार्थसारथी ने एक दलित सरपंच को मंच पर आने से रोका। जब सरपंच…
पहले चाकू बनाया, अब चिल्ला रहे हैं कि इसका इस्तेमाल खतरनाक हो रहा है — क्या यही कांग्रेस की सियासी नैतिकता है? भारत का लोकतंत्र आज जिस काले अंधेरे में घिरा है, उसमें एक बड़ा योगदान उन कानूनों का है, जो पहले कांग्रेस की सत्ता-लालसा ने बनाए, और अब भाजपा की फासीवादी सोच ने उन्हें अस्त्र-शस्त्र बना लिया है। यूएपीए (UAPA) – Unlawful Activities (Prevention) Act – इसका ताज़ा उदाहरण है। कांग्रेस की सियासी नौटंकी: अब जागे जब खुद पर बीती!:- कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने यूएपीए के तहत छात्रों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और “2.55% ही सज़ा” की दर…
गोरक्षा” के नाम पर मौत का खेल: जुनैद की हत्या और हिंदुत्व की संगठित गुंडागर्दी! क्या अब इस देश में मुसलमान होना ही गुनाह है? क्या गाय के नाम पर इंसान की जान लेना अब राष्ट्रभक्ति कहलाती है? 17 जून की सुबह जुनैद मर गया। हाँ, वही जुनैद, जिसे 5 जून की रात तथाकथित गोरक्षकों की भीड़ ने बेरहमी से पीटा था। जुनैद की गलती थी कि ? वो allegedly 6-10 गायें लेकर जा रहा था। और इसी शक की बिनाह पर 10-15 लोगों की हिंदुत्ववादी गुंडों की भीड़ ने उसे और उसके साथी अरमान को मेहंगांव गांव के पास…