- अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
- गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
- मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
- सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
- ग़ैरों पे करम-अपनों पे सितम? पाकिस्तान को नसीहत देने से पहले भारत को भी आईना देखने की ज़रूरत
- जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है
- मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है
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लखीमपुर खीरी, यूपी के एक सरकारी स्कूल की छत पर कथित रूप से फ़िलिस्तीन का झंडा फहराया गया और देखते ही देखते पुलिस हरकत में आ गई। सात लोगों पर मुक़दमा, गिरफ़्तारियां, हिंदू संगठनों का हंगामा और पूरा माहौल ‘देशभक्ति बनाम गद्दारी’ के नैरेटिव में बदल दिया गया। लेकिन सवाल है – यही पुलिस, यही सरकार और यही हिंदुत्ववादी संगठन तब कहां थे जब यति नरसिंहानंद ने खुलेआम राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया था? जब एक कट्टरपंथी ने जमीन पर तिरंगा बनाकर उसके ऊपर भगवा झंडा गाड़ दिया था? उस समय न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई, न कोई गिरफ़्तारी,…
भारत की विदेश नीति में ढाई महीने के भीतर आया ये तेज़ यू-टर्न अब पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। जून 2025 में जब शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने ईरान पर इज़रायली हमलों की निंदा की थी, तब भारत ने उस बयान से खुद को अलग कर लिया था। लेकिन 1 सितंबर को तियानजिन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत ने वही काम किया, जिसकी उम्मीद कोई नहीं कर रहा था—भारत ने इज़रायल और अमेरिका दोनों की सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा वाले घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। भारत का दो टूक संदेश: अमेरिका-इज़रायल की दादागिरी नहीं…
राम पुनियानी- पिछले कुछ दशकों में एक नयी प्रवृत्ति उभरी है. हमारे देश के दक्षिणपंथी सत्ताधारी पौराणिक कथाओं को इस तरह पेश करने लगे हैं मानो वे सच हों. सार्वजनिक मंचों से ऐसे दावों की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा डॉक्टरों और देश को यह याद दिलाने के साथ हुई कि प्राचीन भारत में प्लास्टिक सर्जन रहे होंगे तभी हाथी के बच्चे का सिर भगवान गणेश को लगाया गया होगा!सारी दुनिया में पौराणिक कथाएं कल्पना की उड़ानों से भरी होती हैं. बचपन में जब हम उन्हें सुनते हैं तो वे हमें बहुत मनमोहक लगती हैं और हमेशा हमारी स्मृतियों में…
योगी के रामराज्य उत्तर प्रदेश के महराजगंज की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि हमारे समाज के नैतिक पतन और संवेदनहीनता का आईना है। सवाल यह है कि क्या हम इंसानियत से इतने खाली हो चुके हैं कि तीन मासूम बच्चों को अपने पिता की लाश के साथ घंटों भटकना पड़ा और किसी ने मदद के लिए हाथ तक नहीं बढ़ाया? बच्चे दर-बदर, समाज मौन:- 40 वर्षीय लवकुमार की मौत के बाद उनके तीन बच्चों ने रो-रोकर लोगों से अंतिम संस्कार की मदद मांगी। रिश्तेदारों ने मुँह मोड़ लिया। मोहल्ले के लोग तमाशबीन बने रहे। श्मशान और…
भारत की शिक्षा व्यवस्था पर लंबे समय से “भगवाकरण” के आरोप लगते रहे हैं। कभी पाठ्यपुस्तकों से मुग़ल इतिहास हटाने का मुद्दा, कभी विज्ञान की किताबों में पौराणिक प्रसंग ठूँसने का प्रयास। लेकिन अब मामला और गंभीर है—सीधे उच्च शिक्षा को हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनाने का। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने जो लर्निंग आउटकम्स आधारित करिकुलम फ्रेमवर्क (LOCF) का मसौदा पेश किया है, उसने देश की सबसे प्रगतिशील राज्य सरकारों में से एक—केरल—को खुलकर मोर्चा लेने पर मजबूर कर दिया है। केरल का सख़्त ऐलान: “यह शिक्षा नहीं, विचारधारा का थोपना है”:- केरल सरकार ने मसौदे को सीधी चुनौती देते…
भारत के स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन की त्रासदी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस ने एनसीईआरटी द्वारा जारी किए गए ‘विभाजन विभीषिका’ मॉड्यूल को खुले तौर पर सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने वाला दस्तावेज़ करार दिया है। यह सिर्फ एक शैक्षिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के दिमाग में नफ़रत का बीज बोने का राजनीतिक हथकंडा है। इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की साज़िश इस मॉड्यूल में: कांग्रेस और मोहम्मद अली जिन्ना को विभाजन का गुनहगार बताया गया। अंग्रेजों को “भारत को एकजुट रखने की कोशिश करने वाला” करार दिया गया। हिंदू महासभा और सावरकर की टू नेशन…
☑️ जनहानि – शून्य (कोई मृत्यु नहीं) ☑️ सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन –थोडगा, तहसील अहमदपुर – पुल पर पानी बहने के कारण और 4 घरों में पानी घुसने से वहाँ के नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। बेलसंगवी, तहसील निलंगा – कुछ लोगों को लाली गांव में शिफ्ट किया जा रहा है। तिरु प्रकल्प से पानी का विसर्ग (रिलीज़) बढ़ने से इस गांव का संपर्क टूटने की आशंका है। हासरणी, तहसील अहमदपुर – 30 से 40 घरों में पानी घुसा, परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। ☑️ खोज एवं बचाव कार्य –शिरूर अनंतपाल में नदी के…
ग़ाज़ा एक बार फिर खून से नहा गया है। इस बार निशाना सिर्फ़ मासूम बच्चे और मरीज़ नहीं बने, बल्कि सच की आवाज़ – पत्रकार – भी बने। सोमवार (25 अगस्त) को दक्षिणी ग़ाज़ा के खान यूनिस स्थित नासिर अस्पताल पर इज़रायली मिसाइलों ने कहर बरपाया। कम से कम 20 लोग मारे गए, जिनमें पाँच पत्रकार शामिल हैं। सोचिए, अस्पताल की छत पर कैमरा उठाए पत्रकार जब दुनिया को ग़ाज़ा की असलियत दिखाने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन पर मिसाइल बरसाई गई। पहला हमला ऊपर की मंज़िल पर हुआ – जहाँ से लाइव कवरेज चल रहा था। कुछ…
image source : shutterstock.com मनोज अभिज्ञान- हम ऐसे युग में जी रहे हैं, जहां किसी व्यक्ति का अस्तित्व केवल उसके भौतिक शरीर तक सीमित नहीं है. आपका नाम, चेहरा, अंगुलियों के निशान, आंख की पुतली, बैंक खाता, वोटर आईडी, आधार नंबर, मेडिकल रिकॉर्ड, और मोबाइल लोकेशन—ये सब मिलकर आपका डिजिटल अवतार बनाते हैं. यह अवतार सर्वरों में संग्रहीत, अद्यतन और विश्लेषित होता रहता है, बिना आपके नियंत्रण के. यह सरकारों, निजी कंपनियों और उस तकनीकी ढांचे के अधीन है, जो आपके लिए अदृश्य है. यह परिवर्तन चुपके से हुआ. पहले पहचान के लिए राशन कार्ड, पासपोर्ट या वोटर कार्ड जैसे…
राजस्थान से निकली IAS चयन की खबर सिर्फ़ एक भर्ती विवाद नहीं है, बल्कि ये बताती है कि भारत के लोकतंत्र और संविधान को कैसे चुनिंदा अफ़सर और सत्ता तंत्र मिलकर ठेंगा दिखा रहे हैं। कुल 18 अधिकारी इंटरव्यू में बैठे, उनमें से 14 SC/ST/OBC समुदायों से, और सिर्फ़ 4 सवर्ण समुदाय से। पर नतीजा? 100% सीटें सवर्णों के नाम! और बाकी 14 योग्य, अनुभवी अफ़सर – सिर्फ़ उनकी जाति की वजह से बाहर फेंक दिए गए! सवाल ये है – क्या संविधान अब सिर्फ़ किताबों में रह गया है? डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जिस सामाजिक न्याय के लिए संविधान…