Author: admin

मंदिर में मुसलमान पेंट कर दे तो बवाल, लेकिन मंदिर की राजनीति में ज़हर घोला जाए तो चुप्पी! महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर से 114 मुस्लिम कर्मचारियों की बर्खास्तगी न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि यह देश के तेज़ी से हिंदू राष्ट्र की ओर बढ़ते क़दमों का खतरनाक उदाहरण भी है। और सबसे खतरनाक बात ये है कि सरकार की चुप्पी ने इसे मौन समर्थन भी दे दिया है। क्या “अनुशासनात्मक कार्रवाई” सिर्फ मुसलमानों पर ही लागू होती है? शनि शिंगणापुर देवस्थान ट्रस्ट ने दावा किया कि उन्होंने 167 लोगों को “अनुशासनात्मक कारणों” से निकाला, लेकिन आंकड़े चीख-चीख कर…

Read More

देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी में ‘मनुस्मृति’ को पढ़ाने का फैसला जितना तेज़ी से आया था, उससे भी तेज़ी से वापस भी ले लिया गया। ये कोई साधारण पाठ्यक्रम विवाद नहीं था। ये था – भारतीय समाज को मनुवादी विचारधारा के हिसाब से ढालने की एक साज़िश, जो छात्रों, शिक्षकों और जागरूक नागरिकों के ज़बरदस्त विरोध के सामने नाकाम हो गई। प्रश्न उठता है: मनुस्मृति को क्यों पढ़ाया जाना था? जिस ग्रंथ को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने खुद जलाया था, जिसे भारत के संविधान की आत्मा के विपरीत माना जाता है, उस मनुस्मृति को दिल्ली यूनिवर्सिटी के…

Read More

जहाँ उर्स पर रोक है, वहाँ कुंभ पर अरबों खर्च हैं। क्या मुसलमान अब अपने बुज़ुर्गों को याद भी नहीं कर सकते? उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व की राजनीति अब महज़ नारों तक सीमित नहीं रही। यह अब लोगों की परंपराओं, आस्थाओं और सांझी विरासत पर सीधा हमला बन चुकी है। अयोध्या और बाराबंकी में उर्स की अनुमति न देना, और उसका “क़ानून-व्यवस्था” के नाम पर पक्षपातपूर्ण रद्द होना, इसी सिलसिले की अगली कड़ी है। विश्व हिंदू परिषद की शिकायत और सरकार का झुकाव:-TOI की रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या के मसोधा इलाके में ‘दादा मियां उर्स’ पर विश्व हिंदू परिषद ने…

Read More

2024-2025 के बीच पश्चिम एशिया में जो कुछ घटा, उसने मध्य-पूर्व की पूरी भूराजनीति को झकझोर कर रख दिया। एक ओर था इज़राइल — जो दशकों से फ़िलिस्तीनियों पर कहर बरपा रहा है, और दूसरी ओर सामने आया ईरान — एक संगठित, ताक़तवर और विचारधारा से लैस क्षेत्रीय शक्ति जिसने पहली बार इज़राइल पर सीधे मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अब सवाल ये है —क्या ग़ज़ा को बर्बाद करने वाला इज़राइल अब खुद उसी तबाही का सामना कर रहा है? क्या इज़राइल अब भुगत रहा है वही जो उसने ग़ज़ा में किया? इज़राइल ने अक्टूबर 2023 से ग़ज़ा में जो…

Read More

क्या देश का ‘जन-धन’ अब केवल ‘मित्र-धन’ बन गया है? जब एक आम नागरिक हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई से बीमा प्रीमियम भरता है, तो उसे यकीन होता है कि वह पैसा उसके भविष्य की गारंटी बनेगा—बुढ़ापे की राहत, किसी संकट में सुरक्षा। लेकिन मोदी सरकार में यही पैसा अब कुछ खास उद्योगपतियों के फायदे का ज़रिया बन गया है। ताज़ा मामला भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और अडानी पोर्ट्स का है। एलआईसी ने अडानी पोर्ट्स को 15 साल की अवधि के लिए 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है—वो भी खुले बाज़ार से बाहर, निजी तौर पर! यानी इस…

Read More

“लातूर का ट्रैफिक… रोज़ की सिरदर्दी बन चुका है। कहीं जाम, कहीं धक्का मुक्की, और कहीं पुलिस की सीटी। लेकिन सवाल ये है – ज़िम्मेदार कौन है?” “पिछले दस-पंद्रह सालों में लातूर की आबादी लगभग दोगुनी हो गई है। प्रॉपर्टी के रेट आसमान छू रहे हैं। शहर में पैसे की कोई कमी नहीं – मनपा की आमदनी भी दोगुनी हो चुकी है। लेकिन सड़कों पर क्या बदला? ट्रैफिक वही का वही… या कहें और भी बुरा।””सिग्नल गायब…कैमरे बंद…और ट्रैफिक पुलिस? जहाँ दिखती है, वहाँ सिर्फ चालान और वसूली करते हुए – कभी रिंग रोड पे, कभी हाइवे पे। ये चेकिंग…

Read More

भारत के संविधान में हर नागरिक को अपने जीवनसाथी के चुनाव की स्वतंत्रता है। लेकिन जब एक मुसलमान युवक किसी हिंदू युवती से शादी करता है, तो यह आज़ादी सज़ा बन जाती है। जेल, फर्जी एफआईआर, धमकियाँ और साम्प्रदायिक उन्माद उसका स्वागत करते हैं। जबकि वही काम अगर कोई हिंदू युवक करे—चाहे सार्वजनिक मंच से मुस्लिम लड़कियों को शादी के लिए उकसाए—तो न उसे जेल होती है, न समाज का बहिष्कार, न प्रशासन का शिकंजा। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने इस भेदभावपूर्ण रवैये को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मुसलमान होकर हिंदू लड़की से शादी की? चलो पहले…

Read More

जब एक देश शैक्षणिक किताबों से डरने लगे, और मस्जिद की अज़ान से घबराने लगे – समझ लीजिए वह सिर्फ एक ज़ायोनी हुकूमत नहीं, एक मानवता-विरोधी विचारधारा बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र की ललकार और इज़रायल की बेशर्मी:- संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की ताज़ा रिपोर्ट ने वो सब उजागर कर दिया है जिसे ज़मीन पर हर फिलिस्तीनी बच्चा, हर माँ और हर ज़ख्मी शिक्षक रोज़ जी रहा है इज़रायल सिर्फ लड़ाई नहीं लड़ रहा, वो एक पूरी क़ौम को ‘मिटाने’ का अभियान चला रहा है। इस रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि इज़रायली सेना ने ग़ाज़ा…

Read More

ऋतांश आज़ाद- आज जब हम कबीर जयंती मना रहे हैं तो हमारा देश एक बेहद अंधेरे और खतरनाक दौर से गुज़र रहा है. पिछले 11 सालों में जबसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा/आरएसएस केंद्र की सत्ता पर काबिज़ हुई है, इनकी नीतियों के चलते समाज में सांप्रदायिकता लगातार उफान पर है. असल में सिर्फ सांप्रदायिकता ही नहीं जातिवाद और पाखंडवाद में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इसीलिए आज कबीर जयंती पर इस लेख के माध्यम से यही प्रयास है कि पंद्रहवी शताब्दी के इस कवि, दार्शनिक व समाज सुधारक संत के विचारों के ज़रिये आज के…

Read More

भाजपा राज में ‘जांच’ अब सच्चाई को दबाने और दोषियों को बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका बन चुकी है — चाहे वो जज हों, अफसर हों, नेता हों या फिर आतंकी हमले। 1. जस्टिस शेखर यादव मामला: नफ़रत फैलाओ, जज बने रहो:- इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर यादव ने खुलेआम विश्व हिंदू परिषद के मंच से मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर उगला — “भारत बहुसंख्यकों की मर्ज़ी से चलेगा”, “चार शादी, तीन तलाक़ देश के लिए ख़तरा हैं” और ‘कठमुल्ला’ जैसी घृणित शब्दावली का इस्तेमाल किय। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आंतरिक जांच की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन…

Read More