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Home»भारत

क्या इज़रायल के खिलाफ बोलना गुनाह है?

adminBy adminJuly 4, 2025 भारत No Comments8 Mins Read
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1. क्या हुआ था? – मामला समझिए:- 1. क्या हुआ था? – मामला समझिए:- श्रीनगर (कश्मीर) के ज़ादीबल इलाके में तीन नाबालिग लड़कियों ने एक सड़क के पास इज़रायल विरोधी ग्राफिटी (चित्र) बनाया। बताया गया कि उन्होंने ज़मीन पर ऐसा चित्र बनाया जो इज़रायली झंडे जैसा लग रहा था — यानी शायद वह इज़रायल के खिलाफ विरोध का तरीका था। पुलिस वहां पहुंची और वो चित्र मिटा दिया गया। फिर पुलिस ने तीनों लड़कियों की पहचान की और उनके माता-पिता को थाने बुलाया। थाने में “काउंसलिंग” की गई – यानी पुलिस ने लड़कियों को समझाया कि ऐसा नहीं करना चाहिए। पुलिस का कहना था कि इससे “सांप्रदायिक सौहार्द यानी धार्मिक शांति” बिगड़ सकती है। लेकिन सवाल यह है — क्या किसी नरसंहार का विरोध करना धार्मिक तनाव फैलाना है? या यह इंसानियत की आवाज़ है?

2. सांसद आगा रूहुल्लाह का बड़ा और सटीक जवाब:- श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने इस घटना पर पुलिस की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: “जब नाबालिग लड़कियां नरसंहार का विरोध करती हैं, तो उन्हें काउंसलिंग की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि उन्हें रोकने वालों को इसकी ज़रूरत होती है।” इस बयान का मतलब साफ है —जो लोग इज़रायल जैसे देश के अपराधों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें चुप कराना गलत है।

3. दूसरी घटना: इज़रायली झंडा दिखाने पर भी कार्रवाई:- कुछ ही दिन पहले श्रीनगर के बलहामा इलाके में दो स्थानीय युवकों को रात में इज़रायल और अमेरिका का झंडा दिखाने के आरोप में हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना था कि इससे “सार्वजनिक शांति” भंग हो सकती थी। यहां भी वही सवाल —क्या ज़ुल्म के खिलाफ विरोध जताना शांति भंग करना कहलाता है?

4. ग़ज़ा में क्या हो रहा है? – दुनिया क्यों गुस्से में है:- इज़रायल पिछले एक साल से ग़ज़ा (फिलिस्तीन का हिस्सा) पर लगातार बमबारी कर रहा है। अब तक 60,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें औरतें और बच्चे ज़्यादा हैं। स्कूल, अस्पताल, मस्जिदें, घर – सब नष्ट हो गए हैं। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन जैसे UN, ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल इस कार्रवाई को “नरसंहार (Genocide)” कह रहे हैं।

5. दुनिया भर में लोग इज़रायल के खिलाफ खड़े हुए हैं:-अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में लाखों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। यहूदी समुदाय के बहुत सारे लोग भी इज़रायल के खिलाफ बोल रहे हैं और कह रहे हैं – “Not in our name” (हमारे नाम पर यह हत्या मत करो)। कई देशों में इज़रायली सामानों का बहिष्कार किया जा रहा है।

6. लेकिन भारत सरकार क्यों चुप है? और इज़रायल का समर्थन क्यों कर रही है?

i. भारत-इज़रायल रक्षा संबंध:- इज़रायल भारत को ड्रोन, मिसाइल, रडार जैसी कई आधुनिक सैन्य तकनीकें बेचता है। मोदी सरकार आने के बाद ये सैन्य रिश्ता और मजबूत हुआ है। भारत इज़रायल से अरबों रुपये के हथियार खरीद रहा है।

ii. विचारधारा का मेल: हिंदुत्व और ज़ायोनिज़्म:- इज़रायल एक “यहूदी राष्ट्र” है, जो यहूदी धर्म को सर्वोपरि मानता है। ठीक वैसे ही भारत में हिंदुत्ववादी विचारधारा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है। इसलिए बीजेपी और आरएसएस इज़रायल को “आदर्श देश” मानते हैं — जो अल्पसंख्यकों को दबाता है और धार्मिक पहचान को सबसे ऊपर रखता है।

iii. मुसलमानों के खिलाफ राजनीतिक खेल:- भारत में फिलिस्तीन का समर्थन करने वालों को “कट्टर”, “जिहादी” या “देशविरोधी” कहा जाता है। इज़रायल का समर्थन करना मुस्लिम विरोध की राजनीति का हिस्सा बन गया है। इसके जरिए मुसलमानों को डराना, चुप कराना और बदनाम करना आसान होता है।

7. क्या बच्चों को भी चुप कराया जाएगा?:- तीन बच्चियों ने कोई हथियार नहीं उठाया, कोई नफरत नहीं फैलाई — उन्होंने सिर्फ एक चित्र बनाया, एक प्रतीकात्मक विरोध किया। और उसके लिए पुलिस ने उन्हें डांटा, समझाया, और चेतावनी दी। क्या आज के भारत में बच्चों को भी सच बोलने से रोका जाएगा? क्या अब स्कूलों के बच्चे भी डर के माहौल में बड़ा होंगे?

8. निष्कर्ष: इंसानियत और संविधान दोनों खतरे में हैं:- जो लोग ग़ज़ा में मरते बच्चों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें अपराधी बनाया जा रहा है। और जो लोग बम गिरा रहे हैं, अस्पतालों को तबाह कर रहे हैं – उनके साथ सरकार खड़ी है। भारत का संविधान अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है। लेकिन सरकार अब ये आज़ादी चुन-चुनकर छीन रही है — खासकर जब आवाज़ मुसलमानों या कश्मीरियों की होती है। हम किसके साथ हैं – ज़ालिम के या मज़लूम के? इतिहास इस बात को याद रखेगा —तीन नाबालिग लड़कियों ने ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाई, और भारत सरकार उन्हें चुप कराने में लगी रही। ग़ज़ा के बच्चों की चीखें सुनने वाले अगर भारत में चुप करा दिए जाएंगे, तो यह न सिर्फ कायरता होगी, बल्कि इंसानियत से धोखा भी होगा।”अगर आप ज़ुल्म के खिलाफ नहीं बोलेंगे, तो कल कोई आपके खिलाफ बोलेगा भी नहीं।। बताया गया कि उन्होंने ज़मीन पर ऐसा चित्र बनाया जो इज़रायली झंडे जैसा लग रहा था — यानी शायद वह इज़रायल के खिलाफ विरोध का तरीका था। पुलिस वहां पहुंची और वो चित्र मिटा दिया गया। फिर पुलिस ने तीनों लड़कियों की पहचान की और उनके माता-पिता को थाने बुलाया। थाने में “काउंसलिंग” की गई – यानी पुलिस ने लड़कियों को समझाया कि ऐसा नहीं करना चाहिए। पुलिस का कहना था कि इससे “सांप्रदायिक सौहार्द यानी धार्मिक शांति” बिगड़ सकती है। लेकिन सवाल यह है — क्या किसी नरसंहार का विरोध करना धार्मिक तनाव फैलाना है? या यह इंसानियत की आवाज़ है?

2. सांसद आगा रूहुल्लाह का बड़ा और सटीक जवाब:- श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने इस घटना पर पुलिस की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: “जब नाबालिग लड़कियां नरसंहार का विरोध करती हैं, तो उन्हें काउंसलिंग की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि उन्हें रोकने वालों को इसकी ज़रूरत होती है।” इस बयान का मतलब साफ है —जो लोग इज़रायल जैसे देश के अपराधों का विरोध कर रहे हैं, उन्हें चुप कराना गलत है।

3. दूसरी घटना: इज़रायली झंडा दिखाने पर भी कार्रवाई:- कुछ ही दिन पहले श्रीनगर के बलहामा इलाके में दो स्थानीय युवकों को रात में इज़रायल और अमेरिका का झंडा दिखाने के आरोप में हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना था कि इससे “सार्वजनिक शांति” भंग हो सकती थी। यहां भी वही सवाल —क्या ज़ुल्म के खिलाफ विरोध जताना शांति भंग करना कहलाता है?

4. ग़ज़ा में क्या हो रहा है? – दुनिया क्यों गुस्से में है:- इज़रायल पिछले एक साल से ग़ज़ा (फिलिस्तीन का हिस्सा) पर लगातार बमबारी कर रहा है। अब तक 60,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें औरतें और बच्चे ज़्यादा हैं। स्कूल, अस्पताल, मस्जिदें, घर – सब नष्ट हो गए हैं। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन जैसे UN, ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल इस कार्रवाई को “नरसंहार (Genocide)” कह रहे हैं।

5. दुनिया भर में लोग इज़रायल के खिलाफ खड़े हुए हैं:-अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में लाखों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। यहूदी समुदाय के बहुत सारे लोग भी इज़रायल के खिलाफ बोल रहे हैं और कह रहे हैं – “Not in our name” (हमारे नाम पर यह हत्या मत करो)। कई देशों में इज़रायली सामानों का बहिष्कार किया जा रहा है।

6. लेकिन भारत सरकार क्यों चुप है? और इज़रायल का समर्थन क्यों कर रही है?

i. भारत-इज़रायल रक्षा संबंध:- इज़रायल भारत को ड्रोन, मिसाइल, रडार जैसी कई आधुनिक सैन्य तकनीकें बेचता है। मोदी सरकार आने के बाद ये सैन्य रिश्ता और मजबूत हुआ है। भारत इज़रायल से अरबों रुपये के हथियार खरीद रहा है।

ii. विचारधारा का मेल: हिंदुत्व और ज़ायोनिज़्म:- इज़रायल एक “यहूदी राष्ट्र” है, जो यहूदी धर्म को सर्वोपरि मानता है। ठीक वैसे ही भारत में हिंदुत्ववादी विचारधारा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है। इसलिए बीजेपी और आरएसएस इज़रायल को “आदर्श देश” मानते हैं — जो अल्पसंख्यकों को दबाता है और धार्मिक पहचान को सबसे ऊपर रखता है।

iii. मुसलमानों के खिलाफ राजनीतिक खेल:- भारत में फिलिस्तीन का समर्थन करने वालों को “कट्टर”, “जिहादी” या “देशविरोधी” कहा जाता है। इज़रायल का समर्थन करना मुस्लिम विरोध की राजनीति का हिस्सा बन गया है। इसके जरिए मुसलमानों को डराना, चुप कराना और बदनाम करना आसान होता है।

7. क्या बच्चों को भी चुप कराया जाएगा?:- तीन बच्चियों ने कोई हथियार नहीं उठाया, कोई नफरत नहीं फैलाई — उन्होंने सिर्फ एक चित्र बनाया, एक प्रतीकात्मक विरोध किया। और उसके लिए पुलिस ने उन्हें डांटा, समझाया, और चेतावनी दी। क्या आज के भारत में बच्चों को भी सच बोलने से रोका जाएगा? क्या अब स्कूलों के बच्चे भी डर के माहौल में बड़ा होंगे?

8. निष्कर्ष: इंसानियत और संविधान दोनों खतरे में हैं:- जो लोग ग़ज़ा में मरते बच्चों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें अपराधी बनाया जा रहा है। और जो लोग बम गिरा रहे हैं, अस्पतालों को तबाह कर रहे हैं – उनके साथ सरकार खड़ी है। भारत का संविधान अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है। लेकिन सरकार अब ये आज़ादी चुन-चुनकर छीन रही है — खासकर जब आवाज़ मुसलमानों या कश्मीरियों की होती है। हम किसके साथ हैं – ज़ालिम के या मज़लूम के? इतिहास इस बात को याद रखेगा —तीन नाबालिग लड़कियों ने ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाई, और भारत सरकार उन्हें चुप कराने में लगी रही। ग़ज़ा के बच्चों की चीखें सुनने वाले अगर भारत में चुप करा दिए जाएंगे, तो यह न सिर्फ कायरता होगी, बल्कि इंसानियत से धोखा भी होगा।”अगर आप ज़ुल्म के खिलाफ नहीं बोलेंगे, तो कल कोई आपके खिलाफ बोलेगा भी नहीं।

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