- अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
- गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
- मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
- सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
- ग़ैरों पे करम-अपनों पे सितम? पाकिस्तान को नसीहत देने से पहले भारत को भी आईना देखने की ज़रूरत
- जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है
- मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है
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खुर्रम मुराद बिदरी- गुलनार खानम, 16 साल की थीं, जब भारत ने सितंबर 1948 में हैदराबाद की तत्कालीन स्वतंत्र रियासत पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया था। उनके घर के सभी पुरुषों का भारतीय सेना द्वारा संहार किया गया था। सैन्य आक्रमण के साथ हैदराबाद के विलय को ’पुलिस ऐक्शन’ के रूप में जाना जाता है, जिसे ’ऑपरेशन पोलो’ कहा जाता है। हैदराबाद राज्य के मुसलमानों की तीन शूल-सैन्य आक्रमणों में हत्या कर दी गई, इसके बाद तीन साल की आर्थिक नाकेबंदी, रेलवे लाइनों और बुनियादी ढांचे में व्यवधान, और हवाई छापे मारे गए्। सरकार द्वारा नियुक्त सुंदरलाल समिति की रिपोर्ट…
माइक थॉमसन – परिचय:- भारत की स्वतंत्रता को आज़ाद हुए 75 साल से ज़्यादा हो चुके हैं। लेकिन इस लंबे सफ़र में कई ऐसे अध्याय हैं, जिन्हें जानबूझकर दबाया गया या जिन्हें बताने की हिम्मत बहुत कम लोग जुटा पाए। विभाजन के दौरान हुए कत्लेआम के बारे में हर कोई जानता है, लेकिन स्वतंत्रता के महज़ एक साल बाद, 1948 में, दक्षिण-मध्य भारत के हैदराबाद में जो रक्तपात हुआ, उसके बारे में ज़्यादातर भारतीयों को कुछ पता ही नहीं है। हैदराबाद राज्य और दिल्ली का टकराव:-1947 में जब अंग्रेज़ भारत छोड़ गए, तब लगभग 500 से अधिक रियासतें स्वतंत्र भारत…
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरडी) को निर्देश दिया है कि आज़ादी के बाद, विशेष रूप से 1974 के बाद हुए आंदोलनों की जांच की जाए। इस जांच में वित्तीय पहलुओं, नतीजों और पर्दे के पीछे सक्रिय ताक़तों की पहचान कर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जानी है। सरकार का तर्क है कि भविष्य में “निहित स्वार्थों द्वारा कराए जाने वाले बड़े आंदोलनों” को रोका जा सके। यह निर्देश पहली नज़र में प्रशासनिक और सुरक्षा दृष्टि से उचित लगता है। कौन चाहेगा कि जनता की भावनाओं की आड़ में…
संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को हुआ मतदान पूरी दुनिया की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। 142 देशों ने मिलकर फ़लस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देने वाले प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। विरोध करने वालों की संख्या सिर्फ़ 10 थी, जबकि 12 देश वोटिंग से दूर रहे। इस प्रस्ताव को “न्यूयॉर्क घोषणापत्र” कहा गया है और इसे लेकर पूरी दुनिया में भूचाल आ गया है। विरोध करने वाले 10 देश (विरुद्ध) 1. इजराइल 2. संयुक्त राज्य अमेरिका 3. अर्जेंटीना 4. हंगरी 5. माइक्रोनेशिया 6. नाउरू 7. पलाउ 8. पापुआ न्यू गिनी 9. परागुआ 10. टोंगा…
image source : shutterstock.com सैन्य अधिकारी बनने का अवसर: नाशिक में SSB पूर्व प्रशिक्षण वर्ग महाराष्ट्र शासन की ओर से छात्रपूर्व प्रशिक्षण केंद्र (Pre-Cadet Training Centre), नाशिक रोड, नाशिक में भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना में अधिकारी पद पर भर्ती के लिए सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) परीक्षा की पूर्व तैयारी हेतु एक निःशुल्क प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया जा रहा है। विवरणजानकारीप्रशिक्षण की अवधि22 सितंबर 2025 से 01 अक्टूबर 2025 तक।सुविधाएँप्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, रहने की सुविधा और भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।आयोजकछात्रपूर्व प्रशिक्षण केंद्र, नाशिक रोड, नाशिक (महाराष्ट्र शासन)। 🎯 लातूर जिले के उम्मीदवारों के लिए मुलाखत की सूचना लातूर जिले…
मिस्र का सीनाई पर्वत — जिसे क़ुरआन में “तूरे सीनीना” और जिसे स्थानीय लोग जबले मूसा कहते हैं — दुनिया की उन गिनी-चुनी जगहों में है, जहां यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों धर्मों की आस्था की धड़कनें बसती हैं। माना जाता है कि यही वह जगह है जहां मूसा (Moses) को दस ईश्वरीय आदेश मिले थे, और यहीं पर जलती हुई झाड़ी से ईश्वर ने संवाद किया था। ईसाई धर्म का सेंट कैथरीन मठ (St. Catherine Monastery), जो छठी सदी से सक्रिय है और यूनानी ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च के अधीन है, इस क्षेत्र की आध्यात्मिक धड़कन माना जाता है। लेकिन…
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर धर्म और सत्ता का घालमेल सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी की दुर्गा पूजा समितियों और रामलीला आयोजकों से ऐसा अनुरोध किया है, जिसने न केवल सियासी हलचल मचा दी है बल्कि धार्मिक आस्थाओं के बीच नए विवाद की चिंगारी भी सुलगा दी है। विवाद की जड़ क्या है?:- शनिवार (6 सितंबर) को सीएम रेखा गुप्ता ने दुर्गा पूजा और रामलीला समितियों के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की। इस दौरान उन्होंने कहा: “हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिवस 17 सितंबर को है। हम चाहते हैं इस बार दिल्ली उनके जन्मदिवस को…
image source : caravandaily.com 2008 मालेगांव विस्फोट: न्याय या सुनियोजित खेल? 2008 मालेगांव विस्फोट में 6 निर्दोष जानें गईं और सैकड़ों लोग घायल हुए। 17 साल की लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद, निचली अदालत ने भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत का कहना था – “संदेह गंभीर है, लेकिन संदेह भर से सजा नहीं दी जा सकती।” पर सवाल यही है कि क्या यह वाकई न्याय है, या फिर सबूतों और गवाहों को कमजोर करने का सुनियोजित खेल? 👨👩👧👦 पीड़ित परिवारों की जंग – “सच दबा है, हम हार नहीं…
image source : indianexpress.com राम पुनियानी- साम्प्रदायिक हिंसा भारतीय राजनीति का एक दुःखद पहलू है. सांप्रदायिक हिंसा, साम्प्रदायिक राजनीति का आधार है. सांप्रदायिक राजनीति का लक्ष्य है समाज को धर्म के आधार पर बांटना. इस नफरत की नींव अंग्रेजों ने अपनी ‘फूट डालो और राज करो‘ की नीति के ज़रिये रखी. इसकी शुरूआत इतिहास को साम्प्रदायिक नजरिए से प्रस्तुत करने से हुई. सांप्रदायिक राजनीति के विकास में दो समानांतर किंतु विपरीत दिशाओं में बहने वाली धाराओं ने अहम् योगदान दिया. इसे एक ओर मुस्लिम लीग तो दूसरी ओर हिंदू महासभा-आरएसएस ने बढ़ावा दिया. इससे साम्प्रदायिक हिंसा की नींव पड़ी और…
image source: shutterstock.com मौलाना सैयद आसिफ़ नदवी- जैसे ही रबीउल अव्वल का महीना शुरू होता है, मुसलमानों के दिलों में खास तरह की रौनक आ जाती है। गली–मोहल्लों में जश्न-ए-मिलाद, नात-ख़्वानी और जुलूस का माहौल बनता है। स्कूल–कॉलेज और मदरसों में सीरत नबी ﷺ पर मुकाबले होते हैं, इनाम दिए जाते हैं, घरों और मस्जिदों में रोशनी की जाती है और मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं। ये सब चीज़ें अगर हद में और शरीअत के दायरे में हों तो अच्छी बात है। लेकिन असली सवाल ये है कि: क्या सिर्फ़ जुलूस निकालने, नारे लगाने और मिठाई बाँटने का नाम ही पैग़म्बर…