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11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 मिनट के भीतर 7 सिलसिलेवार बम धमाके हुए। 189 लोग मारे गए, 800 से ज़्यादा घायल। देश दहल गया — लेकिन इस धमाके से ज़्यादा दहलाने वाली कहानी थी इसकी जांच, मुकदमा और 19 साल बाद आया फ़ैसला। अब 21 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन 12 आरोपियों को पूरी तरह बरी कर दिया है जिन्हें 2015 में फांसी और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। कोर्ट ने कहा, “महाराष्ट्र एटीएस इनके खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रही।” यह सिर्फ़ एक न्यायिक फ़ैसला नहीं, बल्कि भारत की…

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अगर आपको देश के लोकतंत्र की चिंता है तो आपको बिहार में वोटर लिस्ट के ‘गहन पुनरीक्षण’ (अंग्रेज़ी में एसआईआर यानी ‘सिर’) नामक सिरफिरी मुहिम पर गहन नज़र रखनी चाहिए. अगर आपको चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता का महत्व समझ आता है तो आपको बिहार में चुनाव आयोग के निर्देश पर चल रहे फ़र्ज़ीवाड़े को समझना चाहिए. अगर आपको सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार में आस्था है तो आपको बिहार में वोटबंदी के सच का सामना करना होगा. चूंकि यह मामला सिर्फ़ बिहार का नहीं है. बिहार तो सिर्फ़ पहली प्रयोगशाला है. आपका नंबर भी आने वाला है. वोटर लिस्ट का…

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यह हमला सिर्फ एक पत्रकार पर नहीं — यह भारत के लोकतंत्र की रीढ़ पर है 12 जुलाई 2025 — वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूबर अजीत अंजुम ने एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में दिखाया गया कि बिहार के बेगूसराय ज़िले में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के नाम पर भारी गड़बड़ियाँ हो रही हैं। लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते थे, कि प्रशासन ने वीडियो हटाने की कोशिश की, और फिर दर्ज कर दी एक एफआईआर! सवाल पूछो तो सरकार को तकलीफ़ होती है। और जो तकलीफ़ देता है — वो अब ‘आपराधिक’ बन जाता है। FIR का…

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लातूर में सड़क बनी राजनीति की रणभूमि! भूमि पूजन के नाम पर गूंजा ‘जय श्री राम’! कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने… लेकिन मुद्दा क्या था? आज हम दिखाएंगे वो सच, जो शायद अब तक आप तक नहीं पहुंचा ! कल 13 जुलाई को लातूर में एक सड़क का भूमि पूजन होने जा रहा था। सामने मंच पर थे कांग्रेस के विधायक और लातूर के पूर्व पालक मंत्री – अमित देशमुख। लेकिन तभी वहां पहुंचे भाजपा नेता अजीत पाटिल कव्वेकर और उनके समर्थक… अजीत पाटिल ने कहा – ये सड़क भाजपा सरकार ने मंजूर की है। अमित देशमुख महानगर पालिका के चुनाव…

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कांवड़ यात्रा के नाम पर नफरत की यात्रा: मुस्लिम ढाबों की पहचान, प्रोफाइलिंग और अब शिक्षक तक पर हमला. कांवड़ यात्रा शुरू होते ही ‘हर हर महादेव’ के नारे अब ‘हर हर हुड़दंग’ में बदलते दिख रहे हैं। अभी यात्रा को पांच दिन ही हुए थे कि 170 से ज़्यादा कांवड़ियों पर दंगा, गुंडागर्दी, हाईवे ब्लॉक करना, पुलिस से भिड़ना, और शांति भंग जैसे आरोपों में केस दर्ज हो चुके हैं। जिन रास्तों पर भक्ति और श्रद्धा की छाया होनी थी, वहां अब डर, शोर और अराजकता का बोलबाला है। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि अधर्म पर धर्म…

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मुग़लों को ‘क्रूर’, ‘अंधकारमय’ बताकर क्या भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ में बदलने का ब्लूप्रिंट तैयार हो रहा है? एनसीईआरटी की नई कक्षा 8 की किताब अब यह तय कर रही है कि इतिहास क्या है, किसे पढ़ाया जाना है, किसे मिटाया जाना है, और किसे ‘ग़द्दार’ ठहराना है। और यह काम इतिहासकार नहीं, राजनीतिक प्रचारकों की टीम कर रही है। नई किताबें अब छात्रों को यह सिखा रही हैं कि बाबर एक खूनी दरिंदा था, अकबर सिर्फ़ “आधा सहिष्णु” था, और औरंगज़ेब तो मूर्तिभंजक शैतान था। जिन शासकों ने इस देश की स्थापत्य, कला, संस्कृति, प्रशासन, और क़ानून को गढ़ा,…

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राम पुनियानी- आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले आरएसएस के दूसरे सबसे बड़े नेता हैं। हाल में उन्होंने 1975 में देश में आपातकाल लागू किए जाने के संदर्भ में कहा कि धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद ये दोनों शब्द आपातकाल के दौरान भारतीय संविधान की उद्देशिका में जोड़े गए थे। चूंकि ये शब्द डॉ. अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान के मूल मसविदे की उद्देशिका का हिस्सा नहीं थे इसलिए इन्हें हटाया जाना चाहिए। हिन्दुत्ववादियों की ओर से इस तरह की मांग पहली बार नहीं हो रही है। सन 2014 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद के पहले गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2015) के अवसर पर सरकार…

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एक ऐसा क़ानून जो आतंकियों से ज़्यादा विचारों से डरता है, उसे सुरक्षा नहीं, दमन का औज़ार कहा जाता है। 9 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र विधानसभा में जो विधेयक पेश किया गया—“महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक, 2024”, वह लोकतंत्र की आत्मा पर एक ऐसा वार है जिसे सिर्फ शब्दों से नहीं, संवैधानिक विवेक से समझना होगा। यह कानून न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक विरोध, और विचारधारा की बहुलता के मौलिक अधिकारों को कुचलता है, बल्कि यह एक खतरनाक राजनीतिक डिज़ाइन का हिस्सा लगता है, जो संविधान को सत्ता की सहूलियत के हिसाब से तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रहा है। यह…

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ग़ाज़ा जल रहा है, और वाशिंगटन में जश्न मनाया जा रहा है, ग़ाज़ा में 60,000 से ज़्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर, भूखे, और इलाज से वंचित हैं। बमों की बारिश से अस्पतालों, मस्जिदों, स्कूलों तक को मिटा दिया गया।और इन्हीं लाशों के ढेर पर खड़े होकर, बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प व्हाइट हाउस में रात्रिभोज कर रहे हैं –जहाँ वो तय कर रहे हैं कि अब फिलिस्तीनियों को ग़ाज़ा से निकाल फेंकना चाहिए। क्या यही है ‘शांति वार्ता’? या ये एक साफ-सुथरी ‘एथनिक क्लीनज़िंग’ है – यानी ज़बर्दस्ती नस्लीय सफ़ाया? नेतन्याहू इस बैठक…

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मकसद न्याय नहीं, नफ़रत का विस्तार था। अदालत ने उसे नकार दिया है।” 3 जुलाई 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मथुरा की ऐतिहासिक शाही ईदगाह मस्जिद को “विवादित ढांचा” कहने की मांग की गई थी। यह फैसला न केवल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है बल्कि उस सुनियोजित नफरती प्रोपेगैंडा को भी आईना दिखाता है, जिसमें अदालतों को ‘हिंदू-मुस्लिम की लड़ाई’ का अखाड़ा बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। कोर्ट ने कहा – सबूत नहीं, तो नफरत के लिए जगह नहीं, न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की…

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