अमरावती के परतवाड़ा में जो घटना घटी वो उस इलाके के मुसलमानों के लिए सिर्फ शर्मसार करने वाली ही नहीं है बल्कि अपने बच्चों को लेकर फिक्रमंद करने और परेशानी में डालने वाली भी है, एक ओर जहां मुसलमान इस घटना को लेकर बेचैन और परेशान हैं वहीँ दूसरी ओर नवनीत राणा जैसी नीच मानसिकता वाली औरत हमेशा हर मौके पे नफरत फ़ैलाने और दंगे भड़काने की कोशिश में लगी रहने वाली ज़हरीली नागिन और पत्रकार के नाम पर दलाली करने वाले झूठे और जाहिल पत्रकारों ने मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगलकर हिन्दू समाज को उकसाने की कोशिश की। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
अगर अल्पसंख्यंक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान तुरंत इस पर एक्शन न लेते तो नफरत की ज़हरीली नागिन नवनीत राणा और उसके दलाल दंगे भड़काने में पूरी तरह कामियाब हो जाते। परतवाड़ा के अयान शेख नमी एक 19 साल के युवक (मुख्य आरोपी) को गिरफ्तार किया गया आरोप है कि उसने कुछ नाबालिग लड़कियों को ऑनलाइन दोस्ती/लव ट्रैप में फंसाया, उनके साथ यौन शोषण किया और वीडियो बनाकर वायरल/ब्लैकमेल किया।
ये वीडियो Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर फैलाए गए। पुलिस जांच में अब तक ~8 पीड़ितों की पहचान हुई है जो सभी मुस्लिम समाज की हैं, जिसमे से दो के साथ यौन शोषण की रिपोर्ट है वहीँ पुलिस को अब तक18 वीडियो + 39 फोटो मिले हैं लेकिन नवनीत राणा ने दंगे भड़काने की कोशिश में 180 हिन्दू लड़कियों का यौन शोषण और 300–350 वीडियो के मिलने का दावा किया। अब आप अंदाज़ा लगाइये इस नागिन की ज़बान से टपकता ये ज़हर हिन्दू युवाओं को दंगों पर उकसाने के लिए काफी नहीं है ? अब आइये दलाल और जाहिल पत्रकारों की तरफ।
तअज्जुब होता है इन जाहिलों की पत्रकारिता पर। एक नीच मानसिकता वाली औरत ने कह दिया और इन जाहिलों ने बिना तहक़ीक़ और बगैर सबूतों के उसे प्रकाशित और प्रसारित भी कर दिया। अल्पसंख्यंक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने विदर्भ में माहौल को बिगड़ता देख इसकी तहक़ीक़ करवाइ तो सच्चाई का पता चला, जिसके बाद उन्होंने नवनीत राणा के खिलाफ करवाई की मांग की है।
प्यारे खान की शिकायत पर सरकार करवाई करेगी या नहीं पता नहीं लेकिन शांति प्रिय लोगों या संगठनों को चाहिए अगर वो आगे नहीं आते हैं तो मुस्लिम संगठनों, जमीअतों या जमातों को अगर ये भी खामोश रहते हैं तो कोई भी समाज सेवक इस नागिन और इसके सफेरों के खिलाफ झूठ बोलकर दो समाजों में नफरत फ़ैलाने और दंगा भड़काने की साज़िश रचने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाएं। इस बीच वहां की नगर परिषद ने अयान के पिता के घर पर बुलडोज़र चला दिया।
पहला सवाल तो ये है कि देश संविधान से चल रहा है या बोलडोज़र से चल रहा है ? और अगर संविधान से चल रहा है तो संविधान की किस धरा में आरोपियों या उनके रिश्तेदारों के घरों पर बुलडोज़र चलाने की बात कही गई है? ख़बरों से पता चलता है कि अयान ने अपनी ऐशो-आराम की इच्छा पूरी करने के लिए चुपके से अपनी माँ का सोने का मंगलसूत्र और एक हार चुराकर बेच दिया था।
जिससे उसके मां -बाप भी परेशान थे। जुर्म अयान ने किया और सज़ा उसके मां – बाप का घर तोड़कर उनका आसरा छीनकर उन्हें क्यों दी जा रही है ? दूसरी बात अगर भाजपा सरकारों में आरोपियों या उनके रिश्तेदारों के घरों पर ही बुलडोज़र चलाकर सजा देना है तो फिर अब तक खरात और उस जैसे बलात्कारियों के घरों पर बुलडोज़र क्यों नहीं चले? या सिर्फ मुस्लिम आरोपियों या उनके रिश्तेदारों के घरों पर ही बुलडोज़र चलाने की निति बनाई गई है? अगर ऐसा है तो बुलडोज़र में गिराए गए घरों के मालिकों को चाहिए की वो अदालतों से इंसाफ मांगे खामोश रहना और ज़ुल्म सहना ज़ुल्म करने से बड़ा गुनाह है।
रही बात अयान की उसपर क़ानूनी कार्रवाई हो रही है, उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरों को भी उससे इबरत हासिल हो। लेकिन मां-बाप की भी ज़िम्मेदारी है बच्चों की सही परवरिश करें, वो क्या कर रहे हैं, किस्से मिल रहे हैं, कहाँ जा रहे हैं, कैसे दोस्तों की सोहबत में हैं उनपर नज़र रखें। इस्लाम की तालीमात से उन्हें आरास्ता कराएं।
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