Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?

May 24, 2026

नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?

May 24, 2026

आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?

May 24, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?
  • नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?
  • आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?
  • ‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने
  • नॉर्वे में पीएम मोदी से पूछा गया एक सवाल ऐतिहासिक क्यों बन गया?
  • न कोई गवाह, न कोई सबूत क्या तकनीकी और फॉरेंसिक जांच से तौसीफ़ रज़ा के क़ातिलों को ढूंढ पाएगी पुलिस ?
  • क्या बंगाल चुनाव लोकतंत्र के खात्मे की आख़िरी चेतावनी है?
  • मासूमों से दरिंदगी पर कब जागेगा कानून, कब मिलेगी दरिंदों को सिर्फ फांसी?”
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Sunday, May 24
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»भारत

मुसलमानों पे जुल्म पर मानवाधिकार आयोग की ख़ामोशी को लेकर हाईकोर्ट का करारा प्रहार 

adminBy adminMay 4, 2026 भारत No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
The Allahabad High Court .The Allahabad High Court or the High Court of Judicature at Allahabad is a high court based in Prayagraj that has jurisdiction over the Indian state of Uttar Pradesh. It was established on 17 march 1866, making it the fourth high court to be established in India. (Photo by Debajyoti Chakraborty/NurPhoto via Getty Images)
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब सत्ता खामोश हो जाए, संस्थाएं आंखें मूंद लें और कानून का इस्तेमाल कमजोरों को डराने के लिए होने लगे, तब न्यायपालिका ही संविधान की आखिरी उम्मीद बनकर खड़ी होती है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

एक तरफ अदालत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को आईना दिखाते हुए साफ कहा कि जब देश में मुसलमानों की मॉब लिंचिंग होती है, जब नफरत के नाम पर लोगों को सड़कों पर पीटा जाता है, जब उनके घरों पर बुलडोजर चलते हैं, तब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की खामोशी सबसे ज़्यादा चुभती है। और फिर सवाल उठता है कि आखिर यह खामोशी क्यों?

क्या इसलिए कि इन संस्थाओं के शीर्ष पदों पर बैठने वाले लोगों की नियुक्ति वही सत्ता करती है, जिसके खिलाफ उन्हें आवाज़ उठानी पड़ सकती है? जिसने कुर्सी दी हो, उसके खिलाफ बोलना आसान नहीं होता। यही वजह है कि कई बार मानवाधिकार जैसी संवैधानिक और अर्ध-न्यायिक संस्थाएं सत्ता के सामने बेबस, और जनता के सामने खामोश नज़र आती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी सिर्फ एनएचआरसी पर सवाल नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर है, जहां निगरानी करने वाली संस्थाओं की स्वतंत्रता धीरे-धीरे कमजोर की जा रही है।

अगर मानवाधिकार आयोग को वास्तव में जनता का प्रहरी बनाना है, तो उसकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, पारदर्शी और सरकार के प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। ऐसी संस्थाओं को सत्ता का विस्तार नहीं, संविधान का प्रहरी होना चाहिए।

क्योंकि जब पहरेदार ही सत्ता के दरबार में खड़ा हो जाए, तो आम नागरिक की सुरक्षा कौन करेगा? लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता। लोकतंत्र उन स्वतंत्र संस्थाओं से जीवित रहता है, जो सत्ता से सवाल पूछने का साहस रखती हैं। और अगर यह साहस खत्म हो गया, तो संविधान सिर्फ किताबों में रह जाएगा, ज़मीन पर नहीं। जिस आयोग का काम मानवाधिकारों की रक्षा करना है, वही मुसलमानों पर हो रही मॉब लिंचिंग, हमलों और नफरत भरे अपराधों पर अक्सर खामोश नजर आता है। यह टिप्पणी केवल एनएचआरसी पर नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र पर सवाल है, जो पीड़ितों की चीखें सुनकर भी अनसुना कर देता है।

जब किसी समुदाय के लोगों को भीड़ पीट-पीटकर मार दे, जब उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाकर उन्हें निशाना बनाया जाए, तब मानवाधिकार आयोग की जिम्मेदारी सबसे पहले बनती है। लेकिन अदालत ने पूछा है कि आखिर वह कहां था, जब देश में नफरत की आग भड़क रही थी? दूसरे मामले में भी हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा संदेश दिया।

केवल शक के आधार पर मोहम्मद चांद की गाड़ी जब्त कर ली गई, उनकी रोजी-रोटी छीन ली गई, और 18 महीनों तक उन्हें आर्थिक बर्बादी झेलनी पड़ी। बाद में अदालत ने पाया कि बीफ होने का कोई पुख्ता सबूत ही नहीं था। यह फैसला सिर्फ दो लाख रुपये के मुआवजे का नहीं है। यह उस सोच पर करारा तमाचा है, जिसमें पहले मुसलमानों को आरोपी बना दिया जाता है और सबूत बाद में तलाशे जाते हैं।

उत्तर प्रदेश सहित भाजपा राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में बुलडोजर, गो-रक्षा और कथित एनकाउंटर की राजनीति ने कानून के राज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत का यह फैसला बताता है कि संविधान अभी जिंदा है, और न्याय अभी बिकाऊ नहीं हुआ है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाओं को भी समझना होगा कि उनका दायित्व सत्ता को खुश करना नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। अगर वे अपने मूल कर्तव्य से भटकेंगे, तो अदालतें उन्हें याद दिलाती रहेंगी।

इन दोनों फैसलों का संदेश बिल्कुल साफ है कि कानून किसी की जागीर नहीं है। नफरत, पूर्वाग्रह और सत्ता का दुरुपयोग हमेशा न्याय के दरवाजे पर हारता है। लोकतंत्र की असली ताकत संसद की बहुमत में नहीं, अदालत की निष्पक्षता में होती है। और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह ताकत एक बार फिर देश को दिखा दी है।

Read Next :

नफरत फैलाओगे, तो कानून पकड़ेगा! सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक ने उड़ाई हेट स्पीच कारोबारियों की नींद

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?

नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?

नॉर्वे में पीएम मोदी से पूछा गया एक सवाल ऐतिहासिक क्यों बन गया?

न कोई गवाह, न कोई सबूत क्या तकनीकी और फॉरेंसिक जांच से तौसीफ़ रज़ा के क़ातिलों को ढूंढ पाएगी पुलिस ?

नफरत फैलाओगे, तो कानून पकड़ेगा! सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक ने उड़ाई हेट स्पीच कारोबारियों की नींद

धर्म के नाम पर सड़क जाम? सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक—आस्था निजी है, अराजकता नहीं!

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?
  • नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?
  • आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?
  • ‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने
  • नॉर्वे में पीएम मोदी से पूछा गया एक सवाल ऐतिहासिक क्यों बन गया?
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility