Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?

September 7, 2026

गाय के नाम पर इंसान की बेइज्जती? जालना की घटना ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

September 7, 2026

UN की रिपोर्ट और सरकार की खामोशी: आखिर कितनी चेतावनियों के बाद जागेगी सत्ता?

September 6, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?
  • गाय के नाम पर इंसान की बेइज्जती? जालना की घटना ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
  • UN की रिपोर्ट और सरकार की खामोशी: आखिर कितनी चेतावनियों के बाद जागेगी सत्ता?
  • मलाला की किताब से इतना डर क्यों? यह सिर्फ एक किताब नहीं, सोच की आज़ादी का सवाल है
  • विदेश में ‘एकता’ का संदेश, देश में नफ़रत की राजनीति पर खामोशी
  • आरएसएस पर अमेरिका में बवाल: आखिर नफ़रत और जातिवाद की राजनीति से देश कब आज़ाद होगा?
  • वक्फ बोर्ड में बढ़ती धांधलियां… वक्फ की असली मंशा पर निजी हित भारी
  • 10 हज़ार ‘गो मित्र’ और चुनावी राजनीति- रोजगार का मॉडल या आस्था के सहारे नई सियासत?
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Wednesday, September 9
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»एलान विशेष

क्या हिमंता बिस्वा शर्मा पर लगे गंभीर आरोपों की जांच होगी ?

adminBy adminApril 20, 2026Updated:April 20, 2026 एलान विशेष No Comments3 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हिमंता बिस्वा शर्मा पर लगे गंभीर आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने जिस तरह मुख्यमंत्री की पत्नी पर कई पासपोर्ट, विदेशी संपत्तियों और भारी-भरकम निवेश के आरोप लगाए हैं, वह केवल एक व्यक्ति या परिवार का मामला नहीं रह जाता बल्कि यह सीधे-सीधे राजनीतिक पारदर्शिता, चुनावी नैतिकता और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ जाता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

आरोप कितने गंभीर हैं?

कांग्रेस ने जो आरोप लगाए हैं, वे साधारण राजनीतिक बयानबाज़ी से कहीं आगे जाते हैं: कई देशों के पासपोर्ट रखने का दावा। अमेरिका के टैक्स-हेवन वायोमिंग में करोड़ों डॉलर का निवेश। दुबई में संपत्तियां और कथित शेल कंपनियां। चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने का आरोप। अगर इनमें से कोई भी आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि कानूनी और आपराधिक मामला बन सकता है।

लेकिन सच्चाई क्या है?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि: इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। खुद हिमंता बिस्वा शर्मा और उनकी पत्नी ने इन्हें “झूठा, गढ़ा हुआ और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया है। उन्होंने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की बात कही है। यानी मामला अभी सच्चाई बनाम आरोप के बीच खड़ा है और इसका फैसला अदालत या जांच एजेंसियां (अगर दबाव में न हो) तो ही कर सकती हैं, न कि राजनीतिक मंच।

कानून क्या कहता है?

सुप्रीम कोर्ट के 2018 और 2022 के फैसले साफ करते हैं कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को अपनी, अपने जीवनसाथी और आश्रितों की संपत्ति का पूरा खुलासा करना अनिवार्य है। गलत जानकारी देना या छिपाना “भ्रष्ट आचरण” माना जा सकता है। इस लिहाज से, अगर आरोपों में दम है, तो यह मामला बेहद गंभीर हो जाता है। लेकिन अगर आरोप झूठे साबित होते हैं, तो यह राजनीतिक बदनामी और दुष्प्रचार का उदाहरण होगा।

लोकतंत्र की असली परीक्षा

यह मामला केवल असम की राजनीति तक सीमित नहीं है। यह पूरे लोकतंत्र के लिए एक टेस्ट केस है: क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या सच्चाई सामने आएगी, चाहे वह किसी के भी खिलाफ हो? क्या चुनावी राजनीति तथ्यों पर आधारित रहेगी या आरोपों के शोर में दब जाएगी? अंततः, लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत “सत्य” की होती है, लेकिन शर्त यह है कि उसे सामने आने का पूरा मौका दिया जाए।

Read Next :

सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल

193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?

आरएसएस पर अमेरिका में बवाल: आखिर नफ़रत और जातिवाद की राजनीति से देश कब आज़ाद होगा?

क्या एनसीईआरटी शिक्षा को बदल रही है या इतिहास और राजनीति की नई व्याख्या लिख रही है?

जब संगठन समाज जोड़ने के बजाय दीवारें खड़ी करने लगें

15 अगस्त: तिरंगा पूछ रहा है—क्या सचमुच सब आज़ाद हैं?

कांवड़ यात्रा या कानून से ऊपर होती भीड़? जब रास्ते में बच्चे हों, दुकानदार हों और आम जनता हो तो जिम्मेदारी किसकी?

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • छोटे कर्जदार की गर्दन पर शिकंजा, बड़े कर्जदार के लिए ‘हेयरकट’! क्या यही है भाजपा का बैंकिंग न्याय?
  • गाय के नाम पर इंसान की बेइज्जती? जालना की घटना ने खड़े किए कई गंभीर सवाल
  • UN की रिपोर्ट और सरकार की खामोशी: आखिर कितनी चेतावनियों के बाद जागेगी सत्ता?
  • मलाला की किताब से इतना डर क्यों? यह सिर्फ एक किताब नहीं, सोच की आज़ादी का सवाल है
  • विदेश में ‘एकता’ का संदेश, देश में नफ़रत की राजनीति पर खामोशी
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

यह मूर्खता है! दही-हांडी में महिलाओं को नचाने जैसी यह मूर्खता है! दही-हांडी में महिलाओं को नचाने जैसी हरकतें करने वाले लोग देशद्रोही और मूर्ख हैं।- संभाजी भिडे#elaannews #breakingnews #maharashta #dahihandi #hindudharma
इस बयान के बाद हुदा जरीवाला को यूपी पुलिस ने गिरफ् इस बयान के बाद हुदा जरीवाला को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. जरीवाला BBC में पत्रकार रह चुकी हैं. अब सोशल एक्टिविस्ट और यूट्यूबर हैं. मस्जिद गिराए जाने के बाद जरीवाला ने कहा था- क्रिमिनल है आदित्यनाथ, जिसने मुसलमानों की मस्जिद शहीद की है|#elaannews #breakingnews #indianews #bbcnews #yogiadityanath
मनोज जरांगे के पीछे असली ताकत शरद पवार हैं। पवार ज मनोज जरांगे के पीछे असली ताकत शरद पवार हैं। पवार जैसा कहते हैं, यह व्यक्ति वैसा ही काम करता है।- गुणरत्न सदावर्ते - वकील#elaannews #breakingnews #maharashta #marathaaarkshan #manojjarangepatil
लातूर की महत्वपूर्ण मांजरा नदी की इस साल की तस्वीर लातूर की महत्वपूर्ण मांजरा नदी की इस साल की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। पिछले साल बारिश के मौसम में जहां मांजरा नदी पानी से लबालब बह रही थी, वहीं इस साल सितंबर महीने में ही नदीपात्र सूखने और जमीन फटने जैसा दृश्य सामने आया है।मांजरा नदी लातूर जिले के लिए जलापूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में नदी में पानी का तेजी से कम होना आने वाले समय में जलसंकट की आशंका को बढ़ा रहा है।अगर बारिश ने साथ नहीं दिया और जलसाठों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई, तो लातूर जिले को आगामी समय में पानी की कमी और सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। पिछले साल और इस साल की मांजरा नदी की तस्वीरों में दिखाई दे रहा यह बड़ा अंतर निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।#elaannews #breakingnews #Latur #laturnews #manjra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility