TCS नासिक में एक व्यक्तिगत प्रकरण को हिंदुत्ववादी संगठनों और गोदी मीडिया बल्कि इन्हें मीडिया कहना भी मीडिया की तौहीन होगी,असल में 2014 से पहले देश में कुछ मीडिया चैनल TRP के लिए हिन्दू-मुस्लिम की ख़बरें चलाते थे या हर घटना में इस्लाम या मुसलमानों के खिलाफ एंगल ढूंढ़ते थे लेकिन 2014 के बाद जब भाजपा सत्ता में आयी उसने ऐसे मीडिया के गले में पटटा ही बांध दिया तब से ये हड्डी के भूके हर घटना को हिन्दू -मुस्लिम का रंग देकर देश में नफरत फैला रहे हैं। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
हर मुस्लिम व्यक्तिक घटना को पूरे समाज या इस्लाम से जोड़कर इस्लाम और मुसलमानों के बदनामी में कोई कसर नहीं छोड़ते। अब तक इस दलाल मीडिया ने मुस्लिम व्यक्तिक घटनाओं को इस्लाम और मुसलमानों से जोड़कर इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने वाली जितनी भी झूठी और बेबुनियाद और मनघडत स्टोरियां बनाई हैं कुछ ही दिनों बाद उनकी हक़ीक़त और सच्चाई देश के सामने भी आयी है फिर भी ये बेशर्म इससे बाज़ नहीं आते।
आपको याद होगा इससे पहले थूक जिहाद, लव जिहाद, लैंड जिहाद, यूपीएससी जिहाद और अब कॉर्पोरेट जिहाद इन्हीं दलालों के गढ़े हुए हैं। कोई भी व्यक्ती चाहे वो किसी भी धर्म से तअल्लुक़ रखता हो अगर कोई जुर्म करता है तो ये उसका व्यक्तिगत मामला है इसमें धर्म का क्या संबंध? आज तक हिन्दू धर्म को मानने वाले बल्कि कई साधू संतों ने बलात्कारों के रिकॉर्ड तोड़ दिए, आसाराम और राम रहीम जैसे संतों ने तो आश्रमों को अय्याशी के अड्डे बना दिए थे।
ऐसी बेशुमार घटनाएं हैं, नासिक में ही अभी हाल में अशोक खरात ने कई महिलाओं का बलात्कार किया, क्या किसी मुसलमान ने इन बलात्कारियों के जुर्म को हिन्दुओं या हिन्दू धर्म से जोड़ा? या इन दलालों में से किसी एक भी दलाल की हिम्मत हुई इन साधू संतों के घिनौनी हरकतों को हिन्दू धर्म या हिन्दू समाज से जोड़ने की, फिर मुस्लिम अपराधियों के साथ ही ऐसा क्यों ? बहरहाल TCS मामले में भी इन दलालों ने किस तरह एक व्यक्तिक मामले को भुना कर इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाया और कॉर्पोरेट जिहाद को जन्म दिया TCS के पात्र, FIR और सच्चे हिन्दू पत्रकारों के ज़रिये हक़ीक़त सामने आगई, लिहाज़ा अब मुझे इसपर बोलने की ज़रूरत नहीं है।
FIR में क्या लिखा है ये भी आप जान चुके हैं, फिर भी सिर्फ दो बातें कहूंगा जो शायद किसी ने न कही हों, पहली तो ये कि दानिश शैख़ पर FIR में फिर्यादी लड़की ने जो इल्ज़ाम लगाया है कि कई बरसों से एक दूसरे को जानते थे, दोनों में दोस्ती थी , दोनों के संबंध थे, वगैरह ,वगैरह अगर ये सही है तो सुन लो इस्लाम में शादी से पहले अगर मंगनी हो गई हो तब भी लड़का लड़की एक दूसरे से न मिल सकते हैं न बात कर सकते हैं,
अकेले में मिलना और दोस्ती रखना भी हराम है, तो संबंध बनाने का तो सवाल ही नहीं, अगर किसी ने ऐसा किया तो वो व्यभिचारी है और ऐसे लोगों के लिए सख्त सज़ा है, अन्य धर्मों में शादी से पहले प्यार मोहब्बत और संबंध बनाना जायज़ हो सकता है लेकिन इस्लाम में इसकी कोई गुंजाईश नहीं। दूसरी बात जबरन या कोई लालच देकर भी किसी को इस्लाम में लाने या बुलाने की इजाज़त नहीं है। अगर TCS की इस घटना में ऐसा कुछ हुआ है तो इनके खिलाफ सख्त करवाई होनी चाहिए, इस्लाम और मुसलमान ऐसे लोगों का समर्थन बिलकुल नहीं करते।
ये काम तो भाजपाइयों का है जिन्होंने 8 साल की मासूम आसिफा के बलात्कारियों का समर्थन किया था। बहरहाल जिन लोगों पर आरोप लगे हैं उन्हें गिरफ्तार किया गया है, उनकी जाँच हो रही है अगर वाक़ई में वो गुन्हेगार हैं तो क़ानून उन्हें सजा ज़रूर देगा लेकिन जिन हिन्दुत्ववादियों और दलालों ने इस घटना को इस्लाम और मुसलमानों से जोड़कर जो ज़हर उगला, नफरत फैलाई,साथ ही एक मशहूर कंपनी को भी बदनाम किया उसका क्या ? ये कोई पहली घटना या पहला मामला भी नहीं है और ना ही ये कोई गलती है बल्कि हर बार की तरह इस बार भी ये एक नियोजित घटना थी,
आखिर कब तक मुसलमान ऐसे अपमान और बदनामियों को झेलते रहेंगे ?कहां हैं मुसलमानों के ठेकेदार ? मुस्लिम पार्टियां, मुस्लिम जमातें और मुस्लिम संगठन ? क्या इन्हें भी अन्य राजनितिक पार्टियों की तरह सिर्फ चुनावों के दौरान ही मुसलमानों की फ़िक्र होती है ? माना की भाजपा सरकारों में हिंदुत्ववादी गुंडों, भाजपाइयों और मीडिया के नाम पर दलाली करने वालों को मुसलमानों और विरोधकों पर झूठे इल्ज़ामात लगाने और उन्हें बदनाम करने की, मुसलमानों का बहिष्कार करने की,
उनकी लिंचिंग करने की, कानून हाथ में लेने की, इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ ज़हर उगलने की खुली छूट मिली हुई है लेकिन ये देश आज भी संविधान से चलता है और अभी अदालतों से इंसाफ मिलता है, लिहाज़ा सिर्फ इस्लाम या मुसलमानो की ही नहीं व्यक्तिगत भी किसी पर झूठा इलज़ाम लगा कर बदनाम किया जा रहा है, नाइंसाफी हो रही है, ज़ुल्म व अत्याचार हो रहा है, नफरत फैलाई जा रही है तो अदालत का दरवाज़ा खटखटाएं। ताकि आइंदा लगाम लग सके।
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