- 193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?
- सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल
- स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
- सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग
- सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?
- मौ. अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी के गिरफ़्तारी का राज़ ?
- निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
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बीएलओ की ज़िंदगी को किस ‘सिस्टम’ ने बना दिया मौत का फॉर्म? देश की मतदाता सूची को ‘शुद्ध’ करने की कवायद, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)—इस वक़्त 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है। लेकिन इसकी असल कीमत कौन चुका रहा है? काग़ज़ों पर लोकतंत्र चमक रहा है, ज़मीन पर तीन दिन में तीन बीएलओ मर चुके हैं। और सबसे तकलीफ़देह बात ये है कि चुनाव आयोग मौतों पर खामोश है, लेकिन बीएलओ के ‘डांस ब्रेक’ वाले वीडियो जारी कर रहा है। यह सिर्फ़ संवेदनहीनता नही यह उस सिस्टम की क्रूरता है जिसमें “समयसीमा” इंसानों की ज़िंदगी से बड़ी…
प्रेस स्वतंत्रता पर नज़र रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने वर्ष 2025 के लिए अपनी नई सूची “प्रेस फ्रीडम प्रीडेटर्स” जारी कर दी है। इस सूची में वे व्यक्ति, सरकारें, कंपनियां या संगठन शामिल किए जाते हैं जिन्हें पत्रकारों और मीडिया स्वतंत्रता के लिए ख़तरा माना जाता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें इस वर्ष की सूची में भारत की दो संस्थाओं ‘अडानी समूह और हिंदुत्ववादी वेबसाइट ऑपइंडिया’ को भी शामिल किया गया है। RSF ने इन संस्थाओं को “प्रेस स्वतंत्रता का भक्षी” बताया है। यह लिस्ट ऐसे वक़्त पर सामने…
महाराष्ट्र की सियासत में मचा है बड़ा घमासान! मतदान शुरू होने में सिर्फ़ 12 घंटे बचे थे और तभी लातूर ज़िले के निलंगा और रेणापुर सहित महाराष्ट्र के लग भग 22 नगरपरिषदों के चुनाव अचानक स्थगित कर दिए गए। क्या ये सिर्फ़ तांत्रिक कारण था ? या फिर सत्ता का डर? दबाव और दखल?” इन नगरपरिषदों के मतदान में बस 12 घंटे बाकी हैं जनता तैयार है। उम्मीदवार मैदान में हैं, और तभी आदेश आता है: चुनाव स्थगित! एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें विपक्ष का कहना है कि महाराष्ट्र में एक संगठित साजिश चल…
दोस्तों नरसिंहानंद जो अपने आपको महाराज कहलवाता है ये ढोंगी नफरती बाबा जो देश के मुसलमानों को गलियां देता है और उनके बहिष्कार की बात करता है, मुसलमानों की ख़ामोशी और सरकार की छूट के कारन अब उसने भारत के पूर्व राष्ट्रपति, ‘मिसाइल मैन’, भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान इंसान को ‘जिहादी’ और कट्ठर मुस्लिम कहने की घटिया हरकत की है? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें उनपे झूठे और घटिया आरोप लगाए हैं जिसे सुन कर वहां मौजूद खाकी वर्दी पहने नालायक उसपे एफआईआर करने के बजाए उसके सामने हाथ जोड़…
Image source : yespunjab.com नई दिल्ली की सियासत इन दिनों किसी तेज़ रफ्तार थ्रिलर फिल्म से कम नहीं दिख रही, जहाँ सरकार रिकॉर्ड समय में रिकॉर्ड कानून बनाने को तैयार है और विपक्ष आरोप लगा रहा है कि लोकतंत्र को “फास्ट-फॉरवर्ड मोड” पर डाल दिया गया है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें सिर्फ 15 दिन और 9 बड़े बिल! क्या देश की सबसे बड़ी संसद अब ‘कन्वेयर-बेल्ट’ विधायिका बन रही है? केंद्र सरकार ने 15 दिनों के बेहद छोटे शीतकालीन सत्र में 9 बड़े और दूरगामी प्रभाव वाले बिलों को पारित कराने की तैयारी…
Image Source : lared.cl देशभर के कई राज्यों में मतदाता सूची का एसआईआर हो रहा है, जिसका जिम्मा बीएलओ पर है और जिनकी मृत्यु की ख़बरें विभिन्न राज्यों से आ रही हैं. ताज़े मामलों में मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल और राजस्थान का है, मध्य प्रदेश जहां रायसेन और दमोह ज़िलों में दो बीएलओ की मौत हो गई. मृतकों के परिजनों ने एसआईआर के ज़्यादा काम के दबाव को मौत का कारण बताया है. एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें पश्चिम बंगाल की घटना पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को जलपाईगुड़ी…
मालेगांव महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रमुख अजित पवार के एक विवादित बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। मालेगांव नगर पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान पवार ने कहा था कि यदि मतदाताओं ने उनके उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया तो नगर पंचायत को मिलने वाला अतिरिक्त फंड वापस लिया जा सकता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 21 नवंबर को मालेगांव में प्रचार के दौरान पवार ने कहा-“मालेगांव नगर पंचायत का बजट सिर्फ 15 करोड़ है। विकास के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ती है। बारामती…
देश में केंद्रीय जांच एजेंसियों के बढ़ते दख़ल और उनके इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक टिप्पणी ने एक बार फिर आग में घी डाल दिया है। झारखंड विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों और पदोन्नति की कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई… नहीं, इस बार सीजेआई बीआर गवई ने साफ कहा “आप अपनी राजनीतिक लड़ाई के लिए मशीनरी का इस्तेमाल क्यों करते हैं? हम आपको कई बार बता चुके हैं।” एक संवैधानिक संस्था द्वारा किसी केंद्रीय एजेंसी पर यह इतनी सीधी और तीखी टिप्पणी बहुत कुछ कहती है।…
Source: scroll.in अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की धार्मिक आज़ादी को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं और इस बार निशाने पर सीधे-सीधे भाजपा–आरएसएस का गठजोड़ है। अमेरिका की यूएससीआईआरएफ (USCIRF) ने अपने ताज़ा अपडेट में जो दावे किए हैं, वह भारतीय राजनीति की गली-कूचों में नई बहस चिंगारी की तरह फैल सकती है। आयोग ने कहा है कि “भारत की राजनीतिक व्यवस्था धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देती है”, और इस माहौल को पैदा करने में भाजपा–आरएसएस का परस्पर संबंध निर्णायक भूमिका निभाता है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें क्या…
यूपी की राजनीति, आज़म ख़ान और कानून के दोहरे मानदंड पर बड़ा सवाल आज़म ख़ान: तीन दशक की सियासत और सत्ता से टक्कर की कीमत उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज़म ख़ान कोई साधारण नाम नहीं हैं। वह तीन दशक से अधिक समय से सूबे कीसियासत के केंद्र में रहे और जितना उन्होंने सत्ता से टक्कर ली, उतना ही वे सत्ता की निगाह में खटकते भी गए।अब एक बार फिर सिर्फ़ 55 दिन की राहत के बाद वह फिर से जेल में हैं। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने फर्ज़ी पैनकार्ड प्रकरण में उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्लाह आज़म को सात…