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- निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
- रामनवमी, उत्सव से टकराव तक: बदलता सामाजिक माहौल और राजनीतिक संदर्भ
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हिंदुत्ववादी भीड़ की हिंसा : केरल के पलक्कड़ में छत्तीसगढ़ के मज़दूर रामनारायण बघेल की पीट-पीटकर हत्या सिर्फ़ एक आपराधिक घटनानहीं है, बल्कि यह उस ख़तरनाक सामाजिक और राजनीतिक माहौल का नतीजा है, जिसमें धर्म, संदेह, अफ़वाह औरपहचान की राजनीति को लगातार हवा दी जा रही है। जिस व्यक्ति को ‘बांग्लादेशी’ कहकर मार दिया गया, वह एकग़रीब हिंदू मज़दूर था जो अपने परिवार के लिए रोटी कमाने निकला हुआ था। यह सवाल अब टाला नहीं जा सकताकि मॉब लिंचिंग की जिस राजनीति को वर्षों से ‘दूसरों’ के ख़िलाफ़ भड़काया गया, वही आग अब हिंदुओं को भीअपनी चपेट में लेने लगी…
महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों की आहट के साथ ही मुंबई की सियासत उबाल पर है। देश की सबसे अमीरनगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) अब सिर्फ़ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्किमहाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाली निर्णायक लड़ाई बन चुकी है। इसी संदर्भ में राज ठाकरे औरउद्धव ठाकरे का गठबंधन एक साधारण राजनीतिक समझौता नहीं, बल्कि बदलते सत्ता-संतुलन का बड़ासंकेत है। बीबीसी मराठी के मुताबिक़ राज ठाकरे का यह बयान कि “मुंबई का मेयर मराठी होगा और वहहमारा होगा” सीधे-सीधे इस चुनाव की वैचारिक रेखा खींच देता है। एक तरफ़ बीजेपी है, जो हर हाल में मुंबईको…
अदालती फ़ैसले का मूल्यांकन उत्तर प्रदेश की एक अदालत द्वारा मो. अख़लाक़ लिंचिंग मामले में आरोपियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा वापस लेने की योगी सरकार की याचिका का खारिज़ होना सिर्फ़ एक क़ानूनी आदेश नहीं है, बल्कि यह फ़ैसला भारत में भीड़ हिंसा, मॉब लिंचिंग, गौ रक्षा के नाम पर आतंक, राजनीतिक संरक्षण और न्यायिक जवाबदेही के पूरे विमर्श पर एक अहम टिप्पणी है। सरकार बनाम न्याय सरकार बनाम न्याय:- राज्य सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत यह दलील दी थी कि मुक़दमा वापस लेना “सामाजिक सद्भाव” के हित में है। लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि…
बांग्लादेश के हिंदू, भारत के मुसलमान: मोहन भागवत की ‘चयनित चिंता’ का सच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कोलकाता में एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई। राजनीतिक उथल-पुथल के इस दौर में, उन्होंने बांग्लादेशी हिंदुओं से एकजुट रहने और भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपील की। सतही तौर पर, यह एक मानवीय और जरूरी हस्तक्षेप लगता है। किसी भी निर्दोष के साथ हिंसा, चाहे वह कहीं भी हो, निंदनीय है। लेकिन जैसे ही हम इस बयान के आसपास के राजनीतिक और नैतिक संदर्भ में जाते हैं, एक गंभीर और असहज सवाल उभरकर सामने आता…
महाराष्ट्र में बीजेपी का दबदबा, लातूर में भी मिला बड़ा समर्थन महाराष्ट्र में 246 नगरपालिकाओं और 54 नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम आज घोषित हो गए हैं। इन चुनावों में अधिकांश स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों ने नगराध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) को भी अच्छा प्रदर्शन मिला है। चुनाव नतीजों के अनुसार, बीजेपी ने 100 से अधिक नगरपालिकाओं में सत्ता हासिल की है और लगभग 120 नगराध्यक्ष बीजेपी से चुने गए हैं। इसी कड़ी में लातूर जिले की 4 नगर परिषदों और 1…
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प्रशासनिक कदम या लोकतांत्रिक चुनौती? पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग द्वाराकेंद्रीय बलों की तैनाती की मांग केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र कीमौजूदा स्थिति पर कई असहज सवाल खड़े करता है। एक तरफ़ आयोग अपने कर्मचारियों की सुरक्षा काहवाला देकर केंद्रीय गृह मंत्रालय से चौबीसों घंटे सुरक्षा मांग रहा है, तो वहीँ दूसरी ओर करोड़ों मतदाताओंके नाम हटने, “अज्ञात” घोषित होने और वंशानुक्रम मैपिंग जैसी जटिल प्रक्रियाओं ने जनता के मन मेंअविश्वास को और गहरा कर दिया है। चौंकाने वाले आंकड़े: सिर्फ़ आंकड़े नहीं, अधिकारों का सवाल…
दादरी के मोहम्मद अख़लाक़ की 2015 में हुई लिंचिंग केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि भारत के आपराधिक न्याय तंत्र, संवैधानिक मूल्यों और राज्य की नैतिक ज़िम्मेदारी की खुली परीक्षा थी. इस घटना ने तो मॉब लिंचिंग की बुनियाद राखी है। नौ साल बाद भी यह सवाल ज़िंदा है कि क्या हमारा सिस्टम भीड़ की हिंसा को उसी गंभीरता से देखता है, जिसकी वह हक़दार है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें अब जब उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में शिकायत वापस लेने की कोशिश कर रही है और तर्क दिया जा रहा…
लाइन हाज़िर, सलामी और संविधान, योगी राज में वर्दी का बदलता अर्थ : ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर आफ़ाक़ ख़ान को एक कथन के लिए लाइन हाज़िर किया जाना और बहराइच में एक कथावाचक को यूपी पुलिस द्वारा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया जाना, अलग-अलग दिख सकती हैं, लेकिन दरअसल ये एक ही कहानी के दो अध्याय हैं। यह कहानी है वर्दी के राजनीतिक-धार्मिक इस्तेमाल की, और संविधान से उसके खिसकते हुए फ़ासले की। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें आफ़ाक़ ख़ान कोई गुप्त प्रचारक नहीं हैं, वे ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी हैं, सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हैं और…
पटना/कोलकाता बिहार में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सत्ता के शिखर पर बैठे व्यक्ति की संवेदनशीलता और महिलाओं के सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन जिन्हें हाल ही में सरकारी नियुक्ति पत्र मिला था लेकिन उन्होंने नौकरी जॉइन करने से इनकार कर दिया है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें वजह वह घटना है, जिसमें एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका हिजाब खींचा था जो कैमरे में कैद हो गया। यह कोई निजी पल नहीं था, न ही कोई अनदेखी हरकत। यह एक राज्य-स्तरीय…