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देशभर के कई राज्यों में मतदाता सूची का एसआईआर हो रहा है, जिसका जिम्मा बीएलओ पर है और जिनकी मृत्यु की ख़बरें विभिन्न राज्यों से आ रही हैं. ताज़े मामलों में मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल और राजस्थान का है, मध्य प्रदेश जहां रायसेन और दमोह ज़िलों में दो बीएलओ की मौत हो गई. मृतकों के परिजनों ने एसआईआर के ज़्यादा काम के दबाव को मौत का कारण बताया है. एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
पश्चिम बंगाल की घटना पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को जलपाईगुड़ी के माल ब्लॉक में एक बूथ लेवल अधिकरी (बीएलओ) की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर ‘अमानवीय’ दबाव डाला है. वहीं केरल और राजस्थान में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित काम के अत्यधिक दबाव के चलते कथित तौर पर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में कार्यरत दो लोगों ने आत्महत्या कर ली.
इससे पहले बिहार एसआईआर के दौरान भी आरा के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक और बीएलओ की कार्डियक अरेस्ट से मौत हुई थी. केरल और राजस्थान में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के तौर पर काम कर रहे दो लोगों के आत्महत्या करने के कुछ दिनों बाद मोदी शाह के गुजरात में तो खेड़ा ज़िले में बीएलओ के तौर पर काम कर रहे एक स्कूल टीचर की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई. परिवार ने कहा है कि उनकी मौत का कारण चल रहे एसआईआर से जुड़ा ‘काम का बहुत ज़्यादा दबाव’ है.
वडोदरा के एक स्कूल में शनिवार को एक महिला बीएलओ सहायक की ड्यूटी के दौरान गिरकर मौत हो गई. इस संबंध में पुलिस ने बताया कि आईटीआई में कार्यरत उषाबेन को खराब स्वास्थ्य के बावजूद बीएलओ ड्यूटी पर तैनात किया गया था. उनके पति इंद्रसिंह सोलंकी का कहना है कि परिवार ने अधिकारियों को पहले ही आगाह कर दिया था.
गुजरात में चार दिन में ये चौथी घटना है। इस बीच उत्तर प्रदेश में योगी के नोएडा प्रशासन ने मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान लापरवाही और निर्देशों का पालन न करने के आरोप में 60 से ज़्यादा बीएलओ और सात सुपरवाइजर के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है, जबकि बहराइच में एक भाजपा नेता की शिकायत पर लापरवाही के आरोप में दो बीएलओ को निलंबित किया गया है. एक ओर विपक्ष भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर एसईआर के बहाने मतदाता सूची में धांदली के आरोपों को उजागर कर रहा है जिसमें दबाव के चलते बीएलओ आत्महत्याओं पर मजबूर हो रहे हैं।
फिर उत्तर प्रदेश में योगी के नोएडा प्रशासन ने मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान लापरवाही और निर्देशों का पालन न करने के आरोप में जिन 60 से ज़्यादा बीएलओ और सात सुपरवाइजरों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है इसका क्या मतलब है ? क्या इन लोगों ने धांदलियां करने से इंकार कर दिया था ? जिसे योगी का प्रशासन एसआईआर के दौरान लापरवाही और निर्देशों का पालन न करने के आरोप कह रहा है ? आखिर इन घटनाओं की सच्चाई कब उजागर होगी ?
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