मालेगांव
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रमुख अजित पवार के एक विवादित बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। मालेगांव नगर पंचायत चुनाव प्रचार के दौरान पवार ने कहा था कि यदि मतदाताओं ने उनके उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया तो नगर पंचायत को मिलने वाला अतिरिक्त फंड वापस लिया जा सकता है।
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21 नवंबर को मालेगांव में प्रचार के दौरान पवार ने कहा-“मालेगांव नगर पंचायत का बजट सिर्फ 15 करोड़ है। विकास के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ती है। बारामती को मैंने ज्यादा फंड दिया, इसलिए वहां विकास हुआ। अगर आप हमारे उम्मीदवार को चुनते हैं तो मैं अपने वादे पूरे करूंगा। लेकिन अगर आप हमें रिजेक्ट करेंगे तो मैं भी आपको रिजेक्ट कर दूंगा। आपके पास वोट हैं, मेरे पास फंड है।”
पवार के इस बयान की वीडियो क्लिप सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे मतदाताओं को धमकाने जैसा बताया। शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने कहा कि यह बयान लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है। “ये फंड अजित पवार के व्यक्तिगत नहीं हैं। यह टैक्सपेयर्स का पैसा है। मतदाताओं को डराने की कोशिश की जा रही है। चुनाव आयोग चुप क्यों है?” वहीँ एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रवक्ता महेश तपासे ने भी बयान की कड़ी निंदा करते हुए चुनाव आयोग से तुरंत और कठोर कार्रवाई की मांग की।
लगातार विवाद बढ़ने के बाद पवार ने रविवार को अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि “मैंने कहां धमकी दी? राजनीति में नेता जो बात कहते हैं, मतदाता खुद फैसला करते हैं। मतदाता समझदार हैं।”सोमवार को उन्होंने फिर बयान देते हुए कहा “मीडिया मेरी हर बात को पकड़ लेता है। मैं जानता हूं कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। 35 साल में मुझ पर कई आरोप लगे, लेकिन किसी का कोई कर्ज मैं नहीं रखता।”
मुद्दा सिर्फ बयान का नहीं, सत्ता के संदेश का है
अजित पवार का यह बयान लोकतांत्रिक व्यवस्था की उस संवेदनशील रेखा को छूता है जहां सत्ता में बैठे नेता विकास कार्यों को वोट के बदले सौदे की तरह पेश करते दिखाई देते हैं। विपक्ष का कहना है कि फंड सार्वजनिक होता है, किसी नेता की निजी जायदाद नहीं। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है, लेकिन मामला साफ़ तौर पर आचार संहिता और चुनावी नैतिकता के दायरे में सवाल खड़ा करता है। फंड रोकने की बात चाहे राजनीतिक उपमा हो या रणनीतिक टिप्पणी ,चुनावी माहौल में इसका असर गंभीर माना जा रहा है।
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