जोसेफ गोयबल्स ने कहा था: “अगर आप कोई बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे बार-बार दोहराते हैं, तो लोग अंततः उस पर विश्वास कर ही लेंगे।” नाजी जर्मनी में जोसेफ गोयबल्स एडॉल्फ हिटलर का सूचना एवं प्रचार मंत्री था। नाजी शासन में मीडिया, सिनेमा, रेडियो, पोस्टर, स्कूल की किताबों, और अखबारों का इस्तेमाल कर इस नीति का उपयोग करके यहूदियों को “गद्दार”, “राष्ट्र-विरोधी” और “गंदगी” बताया गया, जिससे जनता का मनोबल तैयार किया गया कि उनके खिलाफ हिंसा न्यायसंगत है। यह नीति बताती है कि “सत्य” और “अविश्वास” की रेखा तब धुंधली हो जाती है जब कोई झूठ बहुत बार दोहराया जाता है। ठीक उसी तरह इस वक़्त भारत में संघ परिवार और भाजपा सरकारें और गोदी मीडिया, सोशल मीडिया और IT सेल के ज़रिए झूठ फैलाकर जनमानस को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं । मुसलमानों को ‘गद्दार’, किसानों को ‘खालिस्तानी’, छात्रों को ‘राष्ट्र-विरोधी’, और गोदी मीडिया को छोड़कर बाकी पत्रकारों को ‘देशद्रोही’ कहकर यही रणनीति अपनाई जा रही है। भाजपा का आईटी सेल और गोदी मीडिया इसी तकनीक पर काम कर रहे हैं — बार-बार झूठ दोहराना जब तक जनता उसे सच मान न ले। यह नीति बताती है कि सिर्फ सच बोलना जरूरी नहीं होता, बल्कि जो झूठ सबसे ऊँची आवाज़ में, बार-बार और सबसे बड़े मंच पर बोला जाए — वही लोगों को सच लगने लगता है। अब सवाल ये पैदा होता है कि भजपा यानी संघ परिवार ने इस निति को क्यों अपनाया? इसकी दो वजह हैं। पहली है सत्ता पे क़ाबिज़ रहना और दूसरी है खुद पर लगे देशद्रोह और आतंकवाद के धब्बे को धुलवाना। जो संगठन और राजनैतिक दल खुद को देशभक्त घोषित करते हैं, तो यह जानना ज़रूरी है कि उनकी असली कहानी क्या है।
1. भाजपा की ‘देशभक्ति’एक राजनीतिक नाटक है। भाजपा ने सत्ता पाने के लिए धर्म और राष्ट्रवाद का इस्तेमाल किया, पिछले 12 साल से भाजपा सत्ता में है उसने देश के लिए क्या किया? भाजपा के राज में लगातार धर्म की दीवारें बढ़ी हैं, सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी है और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर भारी अंकुश लगा है। क्या भाजपा ने अपने कार्यकाल में किसी एक भी मुसलमान या अल्पसंख्यक को समान सम्मान और सुरक्षा दी है? उनके कई नेता खुद विदेशों से आए वित्त पोषित हैं और जनता के बीच घृणा फैलाते हैं, जो देश के हित में नहीं।
2. भारत की आज़ादी के समय संघ परिवार ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया, किसी भी ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का समर्थन नहीं किया, हिंदू राष्ट्र की विचारधारा पर केंद्रित रहा, और आज़ादी के बाद गांधी की हत्या से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़ा रहा। नाथूराम गोडसे, जिसने महात्मा गांधी की हत्या की थी, वो RSS का स्वयंसेवक था। उस दिन से RSS की छवि देशद्रोही संगठन के तौर पर रही है। भारत के आज़ादी के वक्त RSS ने तिरंगे को विदेशी कपड़ा कहकर उसके सम्मान से इनकार किया। जब पूरा देश स्वतंत्रता के जश्न में था, RSS के लोग शाखाओं में लाठी लेकर घूम रहे थे। ये गद्दारी का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है बल्कि जबसे ये सत्ता में आये हैं इसमें इज़ाफ़ा नज़र आ रहा है। इनके सैकड़ों हिन्दू साथी देश का क़र्ज़ लेकर भाग गए हैं, और कइ साथीयों का इन्होंने क़र्ज़ माफ़ कर दिया, और कई दोस्तों को देश की ज़मीनें कौड़ी मोल बेच दीं, अभी तो सत्ता इनके हाथ में है इसलिए कई राज़, कई घपले और कई भरष्टाकारों पे पर्दा पड़ा हुआ है, जिस दिन सत्ता इनके हाथ से निकलेगी उस दिन सच्चाई देश को पता चलेगी। इसके अलावा अब तक जितने भी गद्दार देशद्रोह के आरोप में पकडे गए हैं उनमें एक भी मुस्लिम नहीं है सब के सब सिर्फ हिन्दू ही नहीं हैं बल्कि आरएसएस और भाजपा से भी जुड़े हुए हैं। हाल ही में इनकी एक बहन ज्योति मल्होत्रा भी देश से गद्दारी के लिए गिरफ्तार हुई है जिसकी तफ्सीलात आप तक पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा भारत में अब तक जासूसी, देशद्रोह या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए गए कई लोग ऐसे संगठनों से जुड़े रहे हैं जो स्वयं को राष्ट्रवादी बताते हैं—जैसे भाजपा (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल। नीचे उन प्रमुख मामलों की छोटी सी सूची दी जा रही है जिनमें इन संगठनों से जुड़े लोगों पर देशद्रोह, जासूसी, या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का आरोप लगा है या वे पकड़े गए हैं:
1. 2023 में मध्य प्रदेश से RSS का स्वयंसेवक धर्मेंद्र राठौर पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ा गया, जो पाकिस्तानी एजेंसियों को सेना से जुड़ी जानकारी भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
2. 2017 में राजस्थान से भाजपा नेता हरि ओम शर्मा व्हाट्सएप के ज़रिए पाकिस्तान को सेना की लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
3. 2020 में उत्तर प्रदेश के एक भाजपा नेता के बेटे को ISI एजेंट के साथ संपर्क रखने और संदिग्ध फंडिंग के लिए गिरफ्तार किया गया।
4. 2016–2018 में पंजाब का भाजपा समर्थक कुलदीप सिंह पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में रहकर सोशल मीडिया पर सेना से संबंधित भ्रामक सामग्री फैला रहा था।
5. कुलवंत सिंह (पूर्व भारतीय सैनिक) (2014) पाकिस्तान की ISI को भारतीय सैन्य जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
6. कुलदीप यादव (BSF जवान) 2018 में गद्दारी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
7. विनय मोहन शर्मा (DRDO कर्मचारी) 2021 में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जानकारी साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
8. संदीप कुमार (RAILWAYS employee) ISI को रेल से जुड़ी संवेदनशील जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
9. नौसेना जासूसी केस (2019-20) में कई नौसैनिक पकड़े गए।
10. 2018 में मध्य प्रदेश के बजरंग दल कार्यकर्ता जगन शर्मा को हथियारों की तस्करी और आतंकी साजिश में शामिल होने पर गिरफ्तार किया गया। एटीएस की कार्रवाई में खुलासा हुआ कि बजरंग दल के लोग हथियार और विस्फोटक जमा कर देश में दंगे कराने की योजना बना रहे थे।
11. 2018 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के कई RSS कार्यकरताओं को आतंकी साजिश और फर्जी ‘हिंदू आतंकवाद’ फैलाने की योजना के लिए गिरफ्तार किया गया। ATS ने RSS से जुड़े लोगों को पकड़ा, जिनका उद्देश्य था आतंकी घटनाएं कराकर मुसलमानों को फँसाना।
12. राजस्थान में VHP सदस्यों की गिरफ़्तारी और जांच में पाया गया कि VHP से जुड़े कुछ लोग विस्फोटक सामग्री एकत्र कर रहे थे, जिनका उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव फैलाना था।
13. कई बजरंग दल कार्यकर्ता सांप्रदायिक दंगे भड़काने, हिंसात्मक भीड़ का नेतृत्व करने और दंगों के दौरान देश की छवि को नुकसान पहुँचाने वाली हिंसा में लिप्त होने के पुख़्ता सबूत मिले हैं।
जो खुद को “देशभक्त” कहते नहीं थकते, असल में वही देश की जड़ें खोदते पाए गए हैं। मुसलमानों, दलितों या सरकार विरोधियों को ‘गद्दार’ कहने वाले अक्सर अपने गिरेबान में नहीं झाँकते, जबकि तथ्य यह बताते हैं कि देश के साथ गद्दारी करने वाले अधिकांश पकड़े गए लोग खुद हिंदू और अक्सर “राष्ट्रवादी” संगठनों से जुड़े रहे हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि “RSS की विचारधारा और कार्य प्रणाली नाज़ीवाद से प्रेरित है।”वहीँ जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल दोनों ने RSS को एक खतरनाक संगठन माना जो सांप्रदायिकता फैला सकता है। वहीँ दूसरी ओर हज़ारों मुसलमानों और विशेषकर उलेमाओं ने इस देश के लिए क़ुर्बानियां दी ,शहीद हो गए, मुसलमानों की देशभक्ति के कई उदाहरण हैं जिसमें से कुछ ये हैं :
1. वीर अब्दुल हमीद –1965 की भारत-पाकिस्तान जंग में अकेले पाकिस्तानी टैंक को उड़ाया, खुद शहीद हो गए –भारत सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से नवाज़ा। आज भी सेना में उनका नाम शौर्य का प्रतीक माना जाता है।वीर अब्दुल हमीद का ज़िक्र इसलिए भी ज़रूरी है? “क्योंकि जब पाकिस्तान के टैंक भारत में घुसने आए थे –तब उन्हें रोकने के लिए न कोई गोदी मीडिया था, न कोई ट्रेंडिंग हैशटैग – बल्कि थे वीर अब्दुल हमीद – एक भारतीय मुसलमान जिसने अपने सीने पर गोली खाई, ताकि हिन्दुस्तान की सरहद बची रहे।”
2. एपीजे अब्दुल कलाम – मिसाइल मैन, भारत रत्न, राष्ट्रपति
3. अशफाक उल्ला खान – क्रांतिकारी, काकोरी कांड, फाँसी चढ़े
4. सैफुद्दीन किचलू – जलियांवाला बाग आंदोलन के नेता
5. ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान – गांधी के साथी, सीमांत गांधी
6. हामिद अंसारी – उपराष्ट्रपति, संविधान के रक्षक
7. मीर रज़ा (ISRO) – रक्षा प्रौद्योगिकी में योगदान
8. लेफ्टिनेंट उमर फैयाज़ – कश्मीरी मुसलमान अफसर, आतंकियों ने शहीद किया
9. सना खान (COVID-19 वारियर) – डॉक्टर, जान पर खेलकर सेवा
10. कर्नल सोफिया कुरैशी – UN मिशन में भारतीय टुकड़ी की कमांडर
11. मुस्लिम रेजीमेंट (1947) – भारत की ओर से लड़ी, पाकिस्तान नहीं चुना जब-जब कोई हिंदू देश से गद्दारी करता है, भाजपा, RSS और गोदी मीडिया का मुंह सी जाता है। लेकिन अगर किसी मुसलमान पर कोई झूठा आरोप भी लग जाए, तो टीवी पर डिबेट, ट्विटर पर ट्रेंड और समाज में ज़हर भर दिया जाता है। मकसद साफ़ है – मुसलमानों को डराओ, दबाओ, और गद्दार बताकर उन्हें देश से अलग करो।“अब जब अगली बार कोई अंधभक्त तुमसे पूछे – ‘मुसलमान गद्दार क्यों होते हैं?’ तो उसे सीधा जवाब देना –‘गद्दारी का झंडा भगवा रंग का निकला है, और तिरंगे की रक्षा मुसलमानों ने की है।’मुसलमानों का इतिहास इस देश से वफादारी का रहा है और संघ परिवार का इतिहास गद्दारी का रहा है इसलिए संघ परिवार और भाजपाई बार -बार मुसलमानों को गद्दार, देशद्रोही और अपने आपको देशभक्त और राष्ट्रवादी कह रहे हैं, लेकिन जिस तरह दुनिया को पता चल गया कि जोसेफ गोयबल्स ने नाजी शासन में मीडिया, सिनेमा, रेडियो, पोस्टर, स्कूल की किताबों, और अखबारों का इस्तेमाल कर इस नीति का उपयोग करके यहूदियों को “गद्दार”, “राष्ट्र-विरोधी” और “गंदगी” बताता था , उसी तरह देश और दुनिया को भी पता चल जाएगा कि संघ परिवार और भाजपा ने सत्ता में आने के बाद गोदी मीडिया, आईटी सेल, सिनेमा, रेडियो, पोस्टर, स्कूल की किताबों, और अखबारों का इस्तेमाल करके मुसलमानों को “गद्दार”, “राष्ट्र-विरोधी” और अपने आपको देश भक्त और राष्ट्रवादी बताया था। RSS के संस्थापक गोलवलकर ने खुले तौर पर लिखा था कि हिटलर की नस्लीय नीतियों को भारत में लागू किया जाना चाहिए। शायद उसी पर संघी अमल कर रहे हैं। तुम चाहे किसी की भी निति अपनाओ सच्चाई एक दिन ज़रूर सामने आएगी।