- क्या हिमंता बिस्वा शर्मा पर लगे गंभीर आरोपों की जांच होगी ?
- 193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?
- सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल
- स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
- सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग
- सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?
- मौ. अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी के गिरफ़्तारी का राज़ ?
- निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
Author: admin
भाजपा राज में ‘जांच’ अब सच्चाई को दबाने और दोषियों को बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका बन चुकी है — चाहे वो जज हों, अफसर हों, नेता हों या फिर आतंकी हमले। 1. जस्टिस शेखर यादव मामला: नफ़रत फैलाओ, जज बने रहो:- इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर यादव ने खुलेआम विश्व हिंदू परिषद के मंच से मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर उगला — “भारत बहुसंख्यकों की मर्ज़ी से चलेगा”, “चार शादी, तीन तलाक़ देश के लिए ख़तरा हैं” और ‘कठमुल्ला’ जैसी घृणित शब्दावली का इस्तेमाल किय। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आंतरिक जांच की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन…
देश को हिला देने वाली ख़बर! लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास क्रैश हो गई है! फ्लाइट नंबर AI-171, जिसमें 242 लोग सवार थे — अब वो एक दर्दनाक हादसे में तब्दील हो गई है! दोपहर 1:38 बजे उड़ान भरने के तुरंत बाद ही अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में तेज़ धमाके के साथ यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया! मौके पर चीख-पुकार मच गई… ज़मीन पर तबाही, आसमान में धुआं… कई लोग घायल, मौतों की आशंका — लेकिन प्रशासन अब तक आंकड़े छिपा रहा है! विमान में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई…
राम पुनियानी- पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भारत की जनता पर गहरा असर हुआ है. जहां प्रधानमंत्री मोदी डींगे हांकते रहे और गोदी मीडिया दावा करता रहा कि भारतीय सेनाएं पाकिस्तान में घुस गई हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान ने भारत के कई विमानों को मार गिराने का दावा किया. संघर्ष विराम की घोषणा सबसे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने की और कहा कि यह उनकी मध्यस्थता से संभव हुआ है. वहीं मोदी ने दावा किया कि इसका श्रेय उन्हें जाता है और सेना के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने संघर्ष विराम का अनुरोध किया था जिसे भारत…
सुकन्या शांता- 19 साल बीत गए। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार धमाकों में 189 लोग मारे गए और 800 से ज्यादा घायल हुए। इसके तुरंत बाद एक के बाद एक मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारियाँ शुरू हुईं। इनमें से कुछ को अदालत ने दोषी माना, लेकिन कई सालों बाद अब्दुल वाहिद शेख जैसे लोग अदालत से पूरी तरह बरी हुए। लेकिन क्या इससे उनकी ज़िंदगी फिर से सामान्य हो पाई? नहीं! क्योंकि भारत की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए “बरी होना” गुनहगार से अलग होने का सबूत नहीं है — खासकर जब आप मुसलमान…
यह सिर्फ छात्रवृत्ति की देरी नहीं है — यह एक सुनियोजित शोषण है, एक ऐसा जुल्म जो भारत के सबसे वंचित और संघर्षशील युवाओं पर ढाया जा रहा है। मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप — अल्पसंख्यक छात्रों के लिए उम्मीद की किरण — अब खुद एक उपेक्षा की शिकार लाश बन चुकी है। 6 महीने से अधिक बीत गए, छात्र पैसे के लिए तरस रहे हैं, शोध रुक गया है, दवाइयाँ नहीं खरीदी जा रहीं, रेंट नहीं दिया जा रहा, और सरकार चुप है। क्या ये योजनाबद्ध अत्याचार नहीं है?:- दिसंबर 2024 से लेकर अब तक सैकड़ों मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई, सिख,…
मथुरा एक बार फिर सियासी धर्मयुद्ध का अखाड़ा बन चुका है। इस बार मोर्चा खुला है ‘हिंदू चेतना यात्रा’ के नाम पर — एक ऐसी यात्रा जिसे ‘जनजागरण’ कहा जा रहा है, लेकिन जिसकी बुनियाद में घुली है नफरत, उन्माद और अदालत की अवमानना! श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पहले ही अदालत में लंबित है। लेकिन वादी पक्ष यानी ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास’ के लोग अब सड़कों पर उतरकर माहौल गरमाने में जुटे हैं। ‘हिंदू चेतना यात्रा’ को “आस्था का उत्सव” कहकर परोसा जा रहा है, जबकि इसका असली मकसद सांप्रदायिक तनाव फैलाना और न्याय प्रक्रिया पर दबाव…
ग़ज़ा फिर जल रहा है — लेकिन इस बार बमबारी से नहीं, भूख से बिलखते लोगों पर बरसी गोलियों से। 27 लाशें। 90 घायल। सब भूख से मर रहे थे, सिर्फ़ रोटी लेने निकले थे। लेकिन इस्राइली सेना के लिए ये भूखे भी “ख़तरा” बन गए। रफाह में एक सहायता वितरण केंद्र के बाहर, लोग मदद की कतार में खड़े थे — कुछ उम्मीद लिए, कुछ रोटी के लिए। तभी, गोलियां चलीं। ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 27 लोगों की मौत हो गई, दर्जनों ज़ख़्मी हैं। इसी तरह की घटना रविवार को भी हुई थी, यानी यह महज़…
2022 के चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में “हिसाब-किताब” की बात करने वाले अब्बास अंसारी को कोर्ट ने दो साल की सज़ा सुनाई और उन्हें विधायक पद से अयोग्य करार दिया गया। कोर्ट चला, फैसला आया, विधानसभा अध्यक्ष ने छुट्टी के दिन सचिवालय खोला, और तुरंत उनकी सीट खाली घोषित कर दी गई।जब्कि अगले दिन भी ये सब हो सकता था लेकिन क्या और क्यों जल्दी थी पता नहीं। सबकुछ इतनी तेज़ी से हुआ मानो कोई आतंकी पकड़ा गया हो। अब्बास अंसारी कोई पहले विधायक नहीं हैं जिनके साथ ये मामला पेश आया हो योगी राज में इससे पहले…
कृष्ण प्रताप सिंह- कोई दो सौ साल पहले 1826 में 30 मई को बांग्ला और उर्दू के प्रभुत्व वाले कल्कत्ता (अब कोलकाता) से प्रकाशित साप्ताहिक ‘उदंत मार्तंड’ के रूप में हिंदी को उसका पहला समाचार पत्र मिला तो उस पत्र की मुख्य चिंता हिंदुस्तानियों के भविष्य से जुड़ी हुई थी. हालांकि तब तक हिंदुस्तानियों में इतनी भी जागरूकता नहीं आई थी कि वह उनके बूते अपने पलने-बढ़ने के सपने देख सकता. दमनकारी सत्ता और उदासीन समाज द्वारा डाले गए दूसरे कई रोड़े भी उसके मार्ग को ऊबड़-खाबड़ बनाए हुए थे. इसके बावजूद उसे अपने सिद्धांतों व सरोकारों से समझौता गवारा…
22 अप्रैल 2025, पहलगाम एक खौफनाक दिन। कश्मीर की खूबसूरत वादियों में गोलियों की आवाज़ गूंजी, और कुछ ही मिनटों में 26 लोगों की ज़िंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं। चीखें थीं, अफरातफरी थी, खून था और सबसे ज़्यादा, इंसानियत की एक कड़ी परीक्षा थी। लेकिन जैसे ही यह ज़ख्म भरने की कोशिश कर रहा था, बीजेपी सांसद राम चंदर जांगड़ा ने उस ज़ख्म पर नमक नहीं, तेज़ाब छिड़क दिया। “हाथ जोड़ने से कोई छोड़ता नहीं” – ये शब्द हैं या ज़हर? पीड़ितों के परिवारों को सांत्वना देने के बजाय, सांसद ने कहा: “जिन महिलाओं ने अपने पति खोए,…