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एक पोस्ट वायरल हुई और पूरा गांव जल उठा। गाड़ियां जलीं, दुकानों पर हमला हुआ, घर आग की भेंट चढ़ा दिए गए और निशाने पर थे — मुसलमान! 1 अगस्त 2025 को, महाराष्ट्र के पुणे जिले के यवत गांव में एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई, जिसमें मध्य प्रदेश के एक मंदिर में पुजारी द्वारा नाबालिग लड़कियों से बलात्कार का ज़िक्र था। ये पोस्ट एक मुस्लिम युवक द्वारा शेयर की गई, जो यवत गांव का निवासी नहीं था। पोस्ट भड़काऊ थी या नहीं, ये जांच का विषय है, लेकिन असली सवाल ये है — क्या एक पोस्ट पर इतना बवाल…

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ग़ाज़ा में फिलहाल जो हो रहा है, वह किसी राजनीतिक लड़ाई से कहीं ज़्यादा एक इंसानियत की खुली हार है। बम बरसते हैं, भूख से बच्चे तड़पते हैं, और दुनिया की बड़ी ताक़तें बैठकर सिर्फ़ बयानबाज़ी करती हैं। भूख से मरता ग़ाज़ा: अकाल नहीं, नरसंहार:- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें चीख-चीखकर कह रही हैं कि ग़ाज़ा में “अकाल की सबसे बुरी स्थिति” पैदा हो गई है। 5 साल की बच्ची का वज़न सिर्फ़ 11 किलो! 7 बार विस्थापित हुए परिवार दाल और पानी से दिन काट रहे हैं। खाने की लाइन में जाने की हिम्मत नहीं बची — और जो जाते…

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सत्ता और कुर्सी के लालच में हिन्दुत्ववादियों ने देश में नफरत का ज़हर इस कदर फैलाया है कि चाहे फिर वो किसी भी समाज के हों न बच्चे सुरक्षित हैं न औरतें। आपको बताएंगे किस तरह हिन्दुत्वादी संगठन ने एक मुसलमान हेड मास्टर का सिर्फ स्कूल से तबादला कराने के लिए स्कूल के मासूम बच्चों के पानी में ज़हर मिला दिया। मक़सद था एक मुस्लिम प्रधानाध्यापक का तबादला – ज़रिया बना स्कूल की पानी की टंकी में ज़हर घोलना! ये कोई अपराध कथा नहीं, कर्नाटक के बेलगावी ज़िले की हकीकत है, जहाँ बच्चों की ज़िंदगियाँ एक सांप्रदायिक साज़िश की भेंट…

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Shamsul Islam  किताब के इस नये संस्करण में बहुत सारे विषयों में तब्दीलियाँ की गई हैं लेकिन प्रेस विवरणों में सिर्फ़ यह बताया गया कि मुग़ल और मुसलमान शासकों पर मौजूदा पाठों के स्थान पर भारत में मुसलमान शासकों द्वारा किए गए धार्मिक उत्पीड़न और अन्य क्रूरताओं का विवरण शामिल कर दिया गया है। और इसी को लेकर हिन्दुत्व के बंधक मीडिया और व्हाट्सप्प विश्वविद्यालयों ने इस्लाम और देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ एक और जंग छेड़ दी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के निदेशक, डी. पी. सकलानी ने दिनांक जुलाई 17, 2025 को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान…

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2006 मुंबई लोकल ट्रेन धमाका मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेकसूर 12 मुसलमानों को 19 साल बाद रिहा किया तो अगले ही दिन महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला गलत है, और जिन लोगों को छोड़ा गया है, वो असली गुनहगार हैं। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले पर फिलहाल रोक (stay) लगा दी — लेकिन रिहा लोगों को दोबारा जेल नहीं भेजा। सुप्रीम कोर्ट अब पूरी सुनवाई करेगा, फिर तय करेगा कि हाई कोर्ट का फैसला सही था या नहीं। वहीं 2008 मालेगांव बम…

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लातूर में भी छीतड़े न मिलने पर भूखे कुत्ते कर रहे हैं बच्चों पर हमलादिल्ली से गल्ली तक हर सड़क पर सिर्फ गाड़ियाँ नहीं दौड़तीं… दौड़ते हैं खौफ के साए! हर दिन सैकड़ों मासूम, बुज़ुर्ग और आम लोग बन रहे हैं आवारा कुत्तों का शिकार! जिसकी वजह से अब सुप्रीम कोर्ट भी चौंक गया है! कोर्ट ने कहा – ‘हर रोज़ दिल्ली में कुत्तों के काटने की सैकड़ों घटनाएं… रेबीज़ जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है! क्या सरकार सिर्फ तब जागेगी जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा? ये सिर्फ दिल्ली की कहानी नहीं… पूरे भारत की सच्चाई है!…

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सऊदी अरब, जो कभी दुनिया के सबसे बंद और धार्मिक रूप से कठोर देशों में गिना जाता था, अब प्रॉपर्टी के दरवाज़े विदेशी नागरिकों के लिए खोल रहा है। सऊदी कैबिनेट के इस ऐतिहासिक फ़ैसले को ‘सुधार’ के नाम पर पेश किया जा रहा है, लेकिन सवाल ये है — क्या ये क़दम बदलाव का प्रतीक है या आर्थिक हताशा का संकेत? क्या है नया कानून?:- अब कोई भी विदेशी नागरिक, विदेशी कंपनी, एनजीओ या इन्वेस्टमेंट फंड सऊदी अरब में कुछ निश्चित शर्तों के साथ ज़मीन और संपत्ति ख़रीद सकता है। मक्का और मदीना जैसी पवित्र जगहों पर भी बेहद…

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कृष्ण प्रताप सिंह- पिछले दिनों इलाहाबाद व दिल्ली के उच्च न्यायालयों ने नरेंद्र मोदी व योगी आदित्यनाथ की केंद्र व प्रदेश सरकारों के मुस्लिम विरोधी सांप्रदायिक एजेंडे और साथ ही गोदी मीडिया को आईना दिखाने वाले दो महत्वपूर्ण फैसले दिए. लेकिन क्या पता, इनमें किसी को इस आईने के सामने जाकर अपनी शक्ल देखना कुबूल होगा या नहीं! पहले उत्तर प्रदेश की बात करें तो योगी सरकार ने बहराइच में गाजी मियां के नाम से प्रसिद्ध सय्यद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर शताब्दियों से लगते आ रहे जेठ मेले (जिसे इस साल पंद्रह मई से पंद्रह जून तक लगना…

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ग़ाज़ा में इंसान मर रहे हैं, और यूरोप कारें बेच रहा है। बच्चे भूख से दम तोड़ रहे हैं, और दुनिया व्यापार में व्यस्त है। क्या यही अंतरराष्ट्रीय नैतिकता है? जब ग़ाज़ा की धूल भरी गलियों में कोई बच्चा भूख से बिलखकर दम तोड़ता है, ठीक उसी वक़्त दुनिया के कुछ सबसे सभ्य, लोकतांत्रिक और ‘मानवाधिकार प्रेमी’ देश इज़राइल को कारें, चिप्स और इत्र बेच रहे होते हैं। वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘शांति और युद्धविराम’ की बातें करते हैं, लेकिन उन्हीं के पोर्ट पर इज़राइल के जहाज़ लादे जा रहे होते हैं — मुनाफ़े की मोटी खेप लेकर। 28 देशों…

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हर्ष मंदर- भारतीय लोगों का अपने लोकप्रिय सिनेमा से जितना गहरा नाता है वैसा शायद दुनिया के बहुत कम लोगों का होगा. लोकप्रिय हिंदी सिनेमा अपने विवरण और भारतीय जीवन के चित्रण में यथार्थवादी नहीं है. लेकिन ये फ़िल्में अक्सर अपने युग के प्रमुख लोकाचार को भावपूर्ण ढंग से प्रतिबिंबित करती हैं. इस अर्थ में, भारतीय सिनेमा का अंतर्पाठ अक्सर राजनीतिक और वैचारिक रूप से प्रेरित होता है. 1950 और 1960 के दशक के लोकप्रिय हिंदी सिनेमा पर नज़र डालें. ये भारत की आज़ादी के बाद के शुरुआती दशक थे, अपेक्षाकृत रूप से आदर्शवाद और उम्मीद से भरा दौर था,…

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