Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?

May 24, 2026

नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?

May 24, 2026

आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?

May 24, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?
  • नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?
  • आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?
  • ‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने
  • नॉर्वे में पीएम मोदी से पूछा गया एक सवाल ऐतिहासिक क्यों बन गया?
  • न कोई गवाह, न कोई सबूत क्या तकनीकी और फॉरेंसिक जांच से तौसीफ़ रज़ा के क़ातिलों को ढूंढ पाएगी पुलिस ?
  • क्या बंगाल चुनाव लोकतंत्र के खात्मे की आख़िरी चेतावनी है?
  • मासूमों से दरिंदगी पर कब जागेगा कानून, कब मिलेगी दरिंदों को सिर्फ फांसी?”
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Monday, May 25
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»महाराष्ट्र

मजहब देखो, योग्यता नहीं!” – शनि मंदिर से 114 मुस्लिमों की बर्खास्तगी क्या ‘हिंदू राष्ट्र’ की अगली सीढ़ी है?

adminBy adminJune 27, 2025Updated:June 27, 2025 महाराष्ट्र No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
image credit : shanidev.com
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

मंदिर में मुसलमान पेंट कर दे तो बवाल, लेकिन मंदिर की राजनीति में ज़हर घोला जाए तो चुप्पी! महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर से 114 मुस्लिम कर्मचारियों की बर्खास्तगी न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि यह देश के तेज़ी से हिंदू राष्ट्र की ओर बढ़ते क़दमों का खतरनाक उदाहरण भी है। और सबसे खतरनाक बात ये है कि सरकार की चुप्पी ने इसे मौन समर्थन भी दे दिया है। क्या “अनुशासनात्मक कार्रवाई” सिर्फ मुसलमानों पर ही लागू होती है? शनि शिंगणापुर देवस्थान ट्रस्ट ने दावा किया कि उन्होंने 167 लोगों को “अनुशासनात्मक कारणों” से निकाला, लेकिन आंकड़े चीख-चीख कर कुछ और बता रहे हैं: 114 मुस्लिम कर्मचारी, यानी कुल निकाले गए लोगों का 68% – सिर्फ एक ही धर्म से। ये कर्मचारी 2 से 10 साल से कार्यरत थे। उन्हें दो चरणों में, 8 जून और 13 जून को हटाया गया — यानी ‘संगठित सफ़ाया’। सवाल ये है कि क्या सिर्फ मुस्लिम कर्मचारी ही ‘अनुशासनहीन’ थे? क्या बाकी धर्मों के लोग आदर्श कर्मी थे? या फिर यह सब सिर्फ बहुसंख्यक दबाव और राजनीतिक सहमति के तहत किया गया? सकल हिंदू समाज का ‘धमकी-पत्र’ और मंदिर प्रशासन की घुटने टेकती ‘भक्ति’ इस कार्रवाई से पहले ‘सकल हिंदू समाज’ ने मंदिर में गैर-हिंदुओं को हटाने की मांग की थी। वजह? सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक मुस्लिम युवक मंदिर में पेंटिंग का काम करता दिखाई दिया। बस फिर क्या था —

➡️ धर्म खतरे में है वाला कार्ड खेला गया।

➡️ मंदिर अपवित्र हो गया का हल्ला मचाया गया।

➡️ और प्रशासन ने बिना किसी जांच या सुनवाई के, 114 ज़िंदगियों को बेरोजगार कर दिया।

क्या अब पेंटिंग करने वाले का धर्म भी चेक होगा?:- संविधान कहां है, मोदी सरकार? मंदिर ट्रस्ट कह रहा है कि ये धार्मिक मामला है, लेकिन क्या नौकरी देना या लेना संविधान के अनुच्छेद 16 (समान अवसर) के तहत नहीं आता? क्या मंदिर में झाड़ू लगाने, कचरा उठाने, खेती करने या शिक्षा देने वाले कर्मचारियों की आस्था का उनकी नौकरी से कोई लेना-देना है? देश के कानून में धर्म के आधार पर नौकरी से निकालना साफ़ तौर पर “अवैध और असंवैधानिक” है। और चौंकाने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र सरकार, जो भाजपा के सहयोग से चल रही है — पूरी तरह से खामोश है। बीजेपी शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ ‘खामोश सहमति’ का पैटर्न. इस तरह की घटनाएं अब इत्तेफाक नहीं रहीं, बल्कि एक ट्रेंड बन चुकी हैं:

उत्तर प्रदेश में गाजी मियां के उर्स, नेजा मेला, जेठ मेला — सब पर ‘क़ानून-व्यवस्था’ के नाम पर रोक। मध्य प्रदेश में गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों की हत्या। हरियाणा में नमाज़ पढ़ने वालों पर मुकदमे। गुजरात में मुस्लिम व्यापारियों को मेले से हटाना। अब महाराष्ट्र में मंदिर से मुस्लिम कर्मचारियों की बर्खास्तगी। और हर जगह भाजपा सरकारें या तो खामोश हैं, या इन्हें मौन सहमति दे रही हैं। क्या यह भारत के संविधान से चल रही सरकारें हैं या किसी हिंदू राष्ट्र एजेंडा से?

राजनीतिक प्रतिक्रिया या राजनीतिक अवसरवाद?:- AIMIM नेता वारिस पठान ने इसे “सामाजिक बहिष्कार” बताया, वहीं समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने कहा: “मुसलमानों और दलितों को निशाना बनाना बीजेपी सरकार की रणनीति है।”लेकिन सवाल यह है — सिर्फ मुस्लिम नेता बोलेंगे? बाकी विपक्ष चुप क्यों है? कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना (उद्धव गुट) – सब इस मुद्दे पर सावधानी से चुप बैठे हैं। क्या अब मुसलमानों के अधिकारों की बात करना भी राजनीतिक नुकसान का सौदा बन गया है?

यह सिर्फ नौकरी नहीं, चेतावनी है। यह सिर्फ 114 लोगों की बर्खास्तगी नहीं है — यह संदेश है: “अगर तुम अल्पसंख्यक हो, तो इस देश में तुम्हारी आस्था, पहचान और रोज़गार — तीनों को खतरे में समझो।” आज मंदिर से बाहर किया गया है, कल शायद स्कूल, दफ्तर और सरकारी संस्थानों से भी निकाला जाए — और फिर कहा जाएगा, “हम तो केवल अनुशासन देख रहे हैं।” भारत को अगर वाकई ‘विकसित राष्ट्र’ बनना है, तो उसे पहले ‘सांप्रदायिक राष्ट्र’ बनने से रोकना होगा। वरना ये नफ़रत एक दिन सबको निगल जाएगी। यह लेख पढ़ा? तो अब चुप मत बैठिए। इसे फैलाइए, आवाज़ उठाइए, और सवाल पूछिए – वरना अगली बारी आपकी हो सकती है।

ahemadnagar bjp hindutwwadi india maharashtra moblinching modi muslim rss shani mandir trol war
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने

मासूमों से दरिंदगी पर कब जागेगा कानून, कब मिलेगी दरिंदों को सिर्फ फांसी?”

महाराष्ट्र में फल ले जारहे ट्रक पर ‘गौरक्षकों’ का हमला, ड्राइवर की हालत गंभीर

आपके बूथ या वार्ड में BLO नहीं है तो क्या करें ?

गोरक्षा या गुंडाराज? पुणे की घटना ने फिर उठाए कानून और इंसानियत पर सवाल

महाराष्ट्र में 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द: प्रशासनिक निर्णय या वैचारिक संकेत?

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • क्या अब अदालतें संविधान से ज़्यादा “आस्था” से चलेंगी?
  • नमाज़ पर बोलने वाली ज़बान कांवड़ यात्राओं, हथियारों के जुलूसों और डीजे के आतंक पर क्यों खामोश रहती है ?
  • आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?
  • ‘आम्ही लातूरकर नसतो कुठेच मागे’ इस कहावत को सच कर दिखाया मोटेगांवकर ने
  • नॉर्वे में पीएम मोदी से पूछा गया एक सवाल ऐतिहासिक क्यों बन गया?
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility