Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?

July 26, 2026

गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…

July 26, 2026

मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट

July 26, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
  • गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
  • मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
  • बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
  • सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
  • ग़ैरों पे करम-अपनों पे सितम? पाकिस्तान को नसीहत देने से पहले भारत को भी आईना देखने की ज़रूरत
  • जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है
  • मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Tuesday, July 28
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»विदेश

क्या इज़राइल अब वही भुगत रहा है जो उसने ग़ज़ा में किया?”

adminBy adminJune 24, 2025 विदेश No Comments6 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
image credit : nbcnews.com
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

2024-2025 के बीच पश्चिम एशिया में जो कुछ घटा, उसने मध्य-पूर्व की पूरी भूराजनीति को झकझोर कर रख दिया। एक ओर था इज़राइल — जो दशकों से फ़िलिस्तीनियों पर कहर बरपा रहा है, और दूसरी ओर सामने आया ईरान — एक संगठित, ताक़तवर और विचारधारा से लैस क्षेत्रीय शक्ति जिसने पहली बार इज़राइल पर सीधे मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अब सवाल ये है —क्या ग़ज़ा को बर्बाद करने वाला इज़राइल अब खुद उसी तबाही का सामना कर रहा है? क्या इज़राइल अब भुगत रहा है वही जो उसने ग़ज़ा में किया? इज़राइल ने अक्टूबर 2023 से ग़ज़ा में जो नरसंहार किया, वो इतिहास में दर्ज रहेगा: 60,000 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए — जिनमें 70% महिलाएं और बच्चे थे। ग़ज़ा की लगभग पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था, स्कूल, मस्जिदें और यूएन ठिकाने नष्ट कर दिए गए। लाखों लोग बेघर और भूखे हुए। इज़राइल का यह हमला ‘हमास के खिलाफ़ युद्ध’ के नाम पर पूरे ग़ज़ा की सामूहिक सज़ा थी। लेकिन अब जब ईरान या हिज़्बुल्लाह जैसे संगठन इज़राइल के सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और तेल शोधन कारख़ानों को निशाना बना रहे हैं — तो यही इज़राइल अब ‘बच्चों और नागरिकों को निशाना बनाए जाने’ की दुहाई दे रहा है। यह सवाल उठता है: क्या ग़ज़ा में मासूमों की लाशें देखकर इज़राइल की आत्मा नहीं जागी थी? अब जब वही आग उसकी ज़मीन तक पहुँची है, तो क्या यह कर्मों का फल नहीं? और ये संघर्ष आखिर जाकर किस अंजाम तक पहुँचेगा? ईरान और इज़राइल के बीच तनाव नया नहीं है। इज़राइल ईरान को अपने अस्तित्व के लिए ख़तरा मानता है, जबकि ईरान इसे इस्लामिक दुनिया के खिलाफ़ एक औपनिवेशिक ज़ायोनी राज्य के रूप में देखता है। इज़राइल ने पिछले कुछ वर्षों में सीरिया, ईराक़ और लेबनान में ईरान समर्थित लड़ाकों और IRGC ठिकानों पर बार-बार हमला किया। अप्रैल 2024 में, इज़राइल ने दमिश्क (सीरिया) में ईरानी दूतावास पर बमबारी की, जिसमें ईरान के कमांडर मारे गए। यह सीधा हमला था — राजनयिक संप्रभुता का उल्लंघन। यहीं से हालात बदले। ईरान ने पहली बार सीधे इज़राइल पर 300 से ज़्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए — जिनमें से ज़्यादातर को अमेरिका और इज़राइल ने इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन संदेश साफ़ था: अब हम चुप नहीं रहेंगे। संघर्ष का सैन्य संतुलन: कौन किस पर भारी? पक्ष ताक़त इज़राइल अमेरिका का पूर्ण समर्थन, आयरन डोम, आधुनिक लड़ाकू विमान, परमाणु हथियार ईरान बड़ी मिसाइल क्षमता, ड्रोन टेक्नोलॉजी, क्षेत्रीय नेटवर्क (हिज़्बुल्लाह, हौथी, हाश्द-शबी) इज़राइल तकनीकी रूप से सक्षम है, लेकिन ईरान का क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक धैर्य उसे एक खतरनाक विरोधी बनाता है। अमेरिका की भूमिका: समर्थन या संकट में फंसी दोस्ती? अमेरिका ने ईरान के जवाबी हमले को रोकने के लिए इज़राइल को खुलकर समर्थन दिया। लेकिन अमेरिका पर अब दबाव बढ़ रहा है — क्योंकि ग़ज़ा में नरसंहार के चलते उसका वैश्विक नैतिक पक्ष गिर चुका है। अरब देशों में जनता बगावत पर है — और ईरान को ज़मीन मिली है। इसलिए अमेरिका भी अब सीमित टकराव चाहता है, जबकि इज़राइल खुले युद्ध के लिए आतुर दिखता है। इस युद्ध का संभावित अंजाम क्या होगा?

पूर्ण युद्ध (Total War):- अगर इज़राइल ने ईरान पर बड़े हमले किए या अमेरिकी सेना ने दखल बढ़ाया: तेल की क़ीमतें आसमान पर जाएंगी, सऊदी अरब, यूएई जैसे देश भी निशाने पर आ सकते हैं, लेबनान, यमन और इराक़ — सभी में मोर्चे खुलेंगे. तीसरा विश्व युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं.

नियंत्रित युद्ध (Limited Conflict):- अगर सिर्फ सख्त बयानबाज़ी, सीमित मिसाइल हमले और राजनीतिक दबाव चलता रहा: ईरान अपनी “बात” कह चुका होगा. इज़राइल डरकर थोड़ा पीछे हट सकता है, लेकिन असली नुकसान — फ़िलिस्तीनी लोगों की त्रासदी से ध्यान हटना होगा

राजनीतिक पुनर्संयोजन (Geopolitical Reset):- इस युद्ध से इज़राइल को समझ आ सकता है कि दमन से स्थायी शांति नहीं आती। मुमकिन है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद: ग़ज़ा युद्ध रोका जाए, फिलिस्तीन मुद्दे पर सार्थक वार्ता शुरू हो, अमेरिका और यूरोप इज़राइल को समर्थन देने से पीछे हटें

क्या यह ‘न्याय’ है या सिर्फ ‘बदला’?:- ईरान का हमला सही या ग़लत — इस पर बहस हो सकती है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इज़राइल अब पहली बार वैसी असुरक्षा महसूस कर रहा है, जैसी उसने सालों से दूसरों पर थोपी थी। जिस दिन इज़राइल को अपने बच्चों के मरने का डर लगा, उस दिन उसे ग़ज़ा के बच्चों की चीख़ें सुनाई दी होंगी — शायद! और आख़िर में… युद्ध किसी समस्या का हल नहीं, वो इंसानियत का इम्तिहान होता है। लेकिन अगर अन्याय का जवाब नहीं दिया गया, तो वो “सिस्टम” बन जाता है — और यही इज़राइल ने किया। ईरान का जवाब उस “सिस्टम” को तोड़ने की कोशिश है — चाहे आप उससे सहमत हों या नहीं।

परमाणु हथियारों पर दोहरा मापदंड:इज़राइल–अमेरिका को हक़, लेकिन ईरान को नहीं?:- इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला क्यों किया? इज़राइल लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है, और यह उसके लिए “अस्तित्व का संकट” है। इसी दलील के नाम पर इज़राइल ने: ईरान के नतांज़ और फ़ोर्डो जैसे परमाणु संयंत्रों पर साइबर हमले किए (Stuxnet वायरस के ज़रिए). ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या करवाई (जैसे मोहसिन फ़ख़रीज़ादेह). अप्रैल 2024 में सीरिया स्थित ईरानी दूतावास पर हमला किया — जिसका मुख्य कारण यही बताया गया कि वहां से परमाणु और मिसाइल तकनीक से जुड़े अधिकारी काम कर रहे थे. यानी इज़राइल ने बिना युद्ध की घोषणा किए ही, वर्षों से ईरान पर हमला किया है। तो जवाबी हमले का हक किसे है? अब सवाल ये है —
अगर कोई देश बार–बार आपके वैज्ञानिकों की हत्या करे, आपके प्लांट को बम से उड़ाए, और दुनिया भर में आपको “खतरा” घोषित कराए — तो क्या आप सिर्फ चुपचाप देखेंगे? ईरान ने पहली बार सीधे जवाब दिया — क्योंकि अब तक वो राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर संयम बरत रहा था।

अंतरराष्ट्रीय पाखंड: “हमें परमाणु हक़, तुमको नहीं“:- इज़राइल के पास 80–100 परमाणु हथियार हैं — लेकिन उसने आज तक NPT (Non-Proliferation Treaty) पर हस्ताक्षर नहीं किए. ईरान ने NPT पर हस्ताक्षर किया है, और बार-बार कह चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम “शांतिपूर्ण” है. फिर भी, अमेरिका और इज़राइल चाहते हैं कि ईरान अपने सभी परमाणु कार्यक्रम बंद कर दे. सवाल ये है: क्या अंतरराष्ट्रीय नियम सिर्फ उन पर लागू होते हैं जिन्हें अमेरिका पसंद नहीं करता? क्या ताक़तवर देश किसी और के अधिकार छीन सकते हैं, सिर्फ इसलिए कि उन्हें डर लगता है?

इस पूरे विवाद में असल में किसे डर है?:- इज़राइल और अमेरिका को डर है कि अगर ईरान परमाणु क्षमता प्राप्त कर लेता है, तो वो क्षेत्रीय प्रभुत्व (regional dominance) हासिल कर लेगा. इससे इज़राइल का एकाधिकार, और अमेरिका का दबदबा कमज़ोर हो जाएगा. इसलिए वे किसी भी हालत में ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना चाहते हैं — भले ही उसे बम से उड़ा कर क्यों न करना पड़े.

परमाणु हिपोक्रेसी की कहानी:-ईरान और इज़राइल का युद्ध सिर्फ गोलियों और मिसाइलों की लड़ाई नहीं है — यह न्याय और अन्याय, अधिकार और पाखंड की लड़ाई है। इज़राइल और अमेरिका के पास परमाणु हथियार हों तो “सुरक्षा”, लेकिन अगर कोई मुस्लिम देश ये शक्ति हासिल करे तो “ख़तरा”? क्या यही है “नियमों पर आधारित विश्व व्यवस्था”? या यह है एक धौंसपट्टी वाली ‘Rule by Power’ व्यवस्था, जिसमें नियम सिर्फ कमज़ोरों के लिए होते हैं?

attac filistin hamas iran israel muslim war
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

इज़रायल-ईरान टकराव ने फिर खड़ा किया पश्चिम एशिया को बारूद के ढेर पर

ईरान-इजरायल युद्ध, भ्रम और ‘फेक न्यूज़’ के बीच फंसी दुनिया

क्या मासूम बच्चों की मौत भी वैचारिक बहस का हिस्सा है?

क्या ख़ामनेई की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी भारत के हित में है?

भगवा पहनकर सत्ता स्वीकार्य है, तो हिजाब पहनकर अस्वीकार्य क्यों?

पहले सज़ा फिर ज़मानत ?

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
  • गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
  • मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
  • बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
  • सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility