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पहले हम ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध पर ताज़ा अपडेट जानते हैं उसके बाद आपको बताएँगे इस जंग का असल मक़सद क्या है ? तो आइए पहले जानते हैं कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की ताज़ा स्थिति क्या है ? डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि: “ईरान और इजरायल के बीच अब युद्ध रुक गया है, यानी संघर्षविराम (सीज़फायर) लागू हो गया है।” लेकिन क्या ट्रंप के कहते ही ये जंग रुक जाएगी ? क्या यह युद्ध रुक गया ? ट्रम्प ने जो युद्धविराम की बात कही है, वो एकतरफा बयान है। ईरान…

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एक मुस्लिम व्यापारी की दुकान पर पाबंदी और हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी से उठे कई सवाल। क्या कोई मुसलमान भारत के संविधान के तहत मिली ज़मीन खरीदने और व्यापार करने की आज़ादी का इस्तेमाल कर सकता है — हर राज्य में? या क्या यह अधिकार भी अब “बहुसंख्यक धर्म” की सहूलियत और सहमति का मोहताज बन चुका है? गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बेहद अहम फैसले में सरकार को यह याद दिलाया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसका कर्तव्य है और एक मुस्लिम व्यापारी को उसकी अपनी वैध दुकान खोलने से रोका नहीं जा सकता। लेकिन सवाल यह है…

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क्या हिंदुत्व अब अमेरिका में भी मुसलमानों को सत्ता से रोकना चाहता है? “ग्लोबल इंटिफ़ादा”? नहीं, ये ग्लोबल हेट इंपोर्ट है! 24 जून, 2025 को जब भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ज़ोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद की प्राइमरी में धमाकेदार जीत दर्ज की — तो यह सिर्फ़ एक चुनावी जीत नहीं थी, बल्कि यह उस ज़हर के खिलाफ जनादेश था जो कुछ दक्षिणपंथी भारतीय और हिंदू-अमेरिकी संगठन अमेरिका में भी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ज़ोहरान की राजनीति न्याय, बराबरी और मज़दूरों के हक़ पर टिकी है। लेकिन उन्हें निशाना बनाया गया — सिर्फ़ इसलिए कि वे मुसलमान…

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एक क़ौम… जो फ़िरऔन से बचाई गई। एक नबी… जिसने उन्हें समंदर के पार पहुंचाया। और बदले में क्या हुआ? वो नबी भी उन्हीं की ग़द्दारी का शिकार बना।” मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को आज़ादी दिलाई। लेकिन वो क़ौम जो अल्लाह की सबसे ज़्यादा नेमतों से नवाज़ी गई थी, वही सबसे बड़ी नाशुक्री निकली।”मूसा अलैहिस्सलाम… वो नबी जिसने यहूदियों को फ़िरऔन के ज़ुल्म से आज़ादी दिलाई। लेकिन उन्हें बदले में क्या मिला ? उनके ही लोग सोने का बछड़ा पूजने लगे, नबी की बातों को झुठलाने लगे। इसी बनी इस्राईल क़ौम ने हर दौर में अपने पैग़म्बरों से धोखा…

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भाजपा राज में दलितों के आत्म-सम्मान को रौंदती सत्ता की सामंती मानसिकता. क्या भारत में दलित आज भी केवल वोट बैंक हैं? और क्या भाजपा शासन में यह स्थिति और भयावह होती जा रही है? 16 जून को आंध्र प्रदेश के कुरनूल ज़िले में जो हुआ — वो सिर्फ़ एक ‘घटना’ नहीं है, बल्कि उस विकराल जातिवादी मानसिकता की तस्वीर है, जो भारत में भाजपा के तथाकथित ‘सबका साथ, सबका विकास’ की असलियत को उजागर करती है। क्या हुआ था?:- एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाजपा विधायक पी.वी. पार्थसारथी ने एक दलित सरपंच को मंच पर आने से रोका। जब सरपंच…

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पहले चाकू बनाया, अब चिल्ला रहे हैं कि इसका इस्तेमाल खतरनाक हो रहा है — क्या यही कांग्रेस की सियासी नैतिकता है? भारत का लोकतंत्र आज जिस काले अंधेरे में घिरा है, उसमें एक बड़ा योगदान उन कानूनों का है, जो पहले कांग्रेस की सत्ता-लालसा ने बनाए, और अब भाजपा की फासीवादी सोच ने उन्हें अस्त्र-शस्त्र बना लिया है। यूएपीए (UAPA) – Unlawful Activities (Prevention) Act – इसका ताज़ा उदाहरण है। कांग्रेस की सियासी नौटंकी: अब जागे जब खुद पर बीती!:- कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने यूएपीए के तहत छात्रों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और “2.55% ही सज़ा” की दर…

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गोरक्षा” के नाम पर मौत का खेल: जुनैद की हत्या और हिंदुत्व की संगठित गुंडागर्दी! क्या अब इस देश में मुसलमान होना ही गुनाह है? क्या गाय के नाम पर इंसान की जान लेना अब राष्ट्रभक्ति कहलाती है? 17 जून की सुबह जुनैद मर गया। हाँ, वही जुनैद, जिसे 5 जून की रात तथाकथित गोरक्षकों की भीड़ ने बेरहमी से पीटा था। जुनैद की गलती थी कि ? वो allegedly 6-10 गायें लेकर जा रहा था। और इसी शक की बिनाह पर 10-15 लोगों की हिंदुत्ववादी गुंडों की भीड़ ने उसे और उसके साथी अरमान को मेहंगांव गांव के पास…

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मंदिर में मुसलमान पेंट कर दे तो बवाल, लेकिन मंदिर की राजनीति में ज़हर घोला जाए तो चुप्पी! महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर से 114 मुस्लिम कर्मचारियों की बर्खास्तगी न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि यह देश के तेज़ी से हिंदू राष्ट्र की ओर बढ़ते क़दमों का खतरनाक उदाहरण भी है। और सबसे खतरनाक बात ये है कि सरकार की चुप्पी ने इसे मौन समर्थन भी दे दिया है। क्या “अनुशासनात्मक कार्रवाई” सिर्फ मुसलमानों पर ही लागू होती है? शनि शिंगणापुर देवस्थान ट्रस्ट ने दावा किया कि उन्होंने 167 लोगों को “अनुशासनात्मक कारणों” से निकाला, लेकिन आंकड़े चीख-चीख कर…

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देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी में ‘मनुस्मृति’ को पढ़ाने का फैसला जितना तेज़ी से आया था, उससे भी तेज़ी से वापस भी ले लिया गया। ये कोई साधारण पाठ्यक्रम विवाद नहीं था। ये था – भारतीय समाज को मनुवादी विचारधारा के हिसाब से ढालने की एक साज़िश, जो छात्रों, शिक्षकों और जागरूक नागरिकों के ज़बरदस्त विरोध के सामने नाकाम हो गई। प्रश्न उठता है: मनुस्मृति को क्यों पढ़ाया जाना था? जिस ग्रंथ को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने खुद जलाया था, जिसे भारत के संविधान की आत्मा के विपरीत माना जाता है, उस मनुस्मृति को दिल्ली यूनिवर्सिटी के…

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जहाँ उर्स पर रोक है, वहाँ कुंभ पर अरबों खर्च हैं। क्या मुसलमान अब अपने बुज़ुर्गों को याद भी नहीं कर सकते? उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व की राजनीति अब महज़ नारों तक सीमित नहीं रही। यह अब लोगों की परंपराओं, आस्थाओं और सांझी विरासत पर सीधा हमला बन चुकी है। अयोध्या और बाराबंकी में उर्स की अनुमति न देना, और उसका “क़ानून-व्यवस्था” के नाम पर पक्षपातपूर्ण रद्द होना, इसी सिलसिले की अगली कड़ी है। विश्व हिंदू परिषद की शिकायत और सरकार का झुकाव:-TOI की रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या के मसोधा इलाके में ‘दादा मियां उर्स’ पर विश्व हिंदू परिषद ने…

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