दोस्तों 25 जुलाई 2025 को नरेंद्र मोदी ने एक और रिकॉर्ड बना लिया! 4,078 दिन लगातार प्रधानमंत्री रहकर इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ दिया। जिसे लेकर गोदी मीडिया तारीफों के पुल बांध रहा है लेकिन हम बताएंगे वो सच्चाई जो गोदी मीडिया ने आपसे छुपाई है। मोदी बनाम इंदिरा — कौन है असली लीडर?” क्या सिर्फ़ कुर्सी पर जमे रहने से इतिहास लिखा जाता है? चलिए दोनों के दौर की तुलना करते हैं। इंदिरा गांधी ने 4,077 दिन में देश को क्या दिया ?
१ बांग्लादेश को आज़ादी दिलवाई।
२ पाकिस्तान को युद्ध में हराया।
३ अमेरिका की आंखों में आंख डालकर बात की
४ पोखरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को दिखाया — India is not weak!
५ “गरीबी हटाओ” आंदोलन चलाया, ग़रीबों को ताकत दी
नरेंद्र मोदी के 4,078 दिन — देश को क्या दिया ?
१ नोटबंदी करके जनता की जेबें खाली की, अमीर को और अमीर बनाया।
२ GSTके ज़रिए व्यापारियों की कमर तोड़ दी।
३ किसान आंदोलन: सैकड़ों मौतें और प्रधानमंत्री मौन।
४ मीडिया को पालतू बना दिया।
५ देश को हिन्दू-मुसलमान में बाँट दिया।
६ महंगाई आसमान पर।
७ बेरोज़गारी रिकॉर्ड पार।
८ संविधान खतरे में।
९ और हर गली में नफ़रत की आग।
१० डेढ़ लाख किसान व कृषि श्रमिकों की आत्महत्या। औसतन लगभग 30 किसान रोज़ आत्महत्या करते रहे। विशेष रूप से महाराष्ट्र में 1,125 प्रति वर्ष (लगभग 3 किसान रोज़ )
११ 100 से ज़्यादा दंगों में 400 से ज़्यादा मौतें (इनके मुख्य मंत्री काल में सिर्फ गुजरात में 2000 से ज़्यादा मौतें, सैकड़ों महिलाओं के साथ बलात्कार,18,000 दुकानें और घर जला दिए गए )
इंदिरा के दौर में सत्ता संरक्षित सिख नरसंहार हुआ, पर कई नेताओं को सज़ा या निष्कासन मिला। लेकिन मोदी के दौर में दंगे मुस्लिम विरोधी एजेंडे का हिस्से बन गए – और दंगाई बने सांसद, मंत्री और ‘राष्ट्र भक्त’।
1984 में इंदिरा काल में देश पर लग भग ₹1.5 लाख करोड़ क़र्ज़ था यानी प्रति व्यक्ति ₹2,000 से भी कम वहीँ आज 2025 मोदी काल में ₹205 लाख करोड़ से भी ज़्यादा क़र्ज़ है यानी ₹1.5 लाख से भी ज़्यादा। देश पर कर्ज – ‘जनता पर बोझ’ और ‘कॉरपोरेट की मौज’ मोदी ने जितना कर्ज 10 साल में लिया, वो भारत ने आज़ादी के बाद 65 सालों में नहीं लिया था। LIC, SBI और PSU की पूंजी से कॉरपोरेट लोन – फिर डिफॉल्ट – फिर चुपचाप माफ।
1984 में इंदिरा काल में १ डॉलर लगभग ₹12.00 का था लेकिन 2025 में मोदी काल में वही डॉलर ₹86.50 रुपये का होगया है। इंदिरा के दौर में 5 रुपए में थाली मिलती थी — आज मोदी काल में 500 में भी पेट नहीं भरता । इंदिरा ने इमरजेंसी घोषित की, चुनाव हारकर सत्ता छोड़ी। मोदी ने बिना घोषणा के पूरा सिस्टम कब्जा लिया – न्याय से लेकर न्यूज़ तक। तानाशाह बदलते हैं, पर तंत्र अब स्थायी हो गया है“इंदिरा ने आपातकाल लगाया – मोदी ने संविधान का गला घोंट दिया।”आज़ादी के 75 साल बाद भी अगर हम सच से भागते रहेंगे, तो अगली पीढ़ी को ‘तानाशाहों की आत्मकथा’ ही इतिहास लगेगी। इतिहास ‘कितने दिन कुर्सी पर रहे’ उससे नहीं लिखा जाता — बल्कि इन दिनों में क्या किया, उससे बनता है!” भाजपा वालों, ध्यान से सुनो —तुम रिकॉर्ड गिन रहे हो…लेकिन देश घाव गिन रहा है।
इंदिरा गांधी ने देश बनाया था। और नरेंद्र मोदी ने देश को बाँट दिया।