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एक देश जहां हर दिन मुसलमानों की दुकानों पर ताले लगते हैं, उनका बहिष्कार होता है, उनकी लिंचिंग होती है, दलितों को जिंदा जलाया जाता है, पिछड़े तबकों को ‘कौशलहीन’ कहकर अपमानित किया जाता है — वो देश मोदी सरकार की नज़र में दुनिया का चौथा सबसे समान देश है? अगर यह मज़ाक न होता, तो यह त्रासदी होती। लेकिन असल में ये दोनों है — एक भीषण मज़ाक और एक राष्ट्रीय त्रासदी। 28% गरीब, लेकिन ‘बराबरी’ में टॉप पर?:- केंद्र सरकार की 5 जुलाई की प्रेस विज्ञप्ति में भारत को ‘दुनिया का चौथा सबसे समानता वाला देश’ बताया गया…

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राम पुनियानी- इस साल (2025) में जून में देश ने आपातकाल (इमरजेंसी) लागू किए जाने की 50वीं वर्षगांठ मनाई. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में 25 जून को देश में आपातकाल लागू किया था. इस दौर के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है – किस तरह लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए, हजारों लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया और मीडिया का मुंह बंद कर दिया गया. इस काल को कई दलित नेता काफी अलग नजर से देखते हैं और याद करते हैं कि उसके पिछले दशक में इंदिरा गांधी ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण और प्रीविपर्स की समाप्ति जैसे…

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दुनिया देख रही है ग़ज़ा में हो रहे जनसंहार को… लेकिन कुछ कंपनियाँ इसे “कमाई का मौका” मान रही हैं! संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट साफ़ कहती है – इज़रायल का ग़ज़ा पर हमला सिर्फ़ एक युद्ध नहीं, बल्कि एक “नरसंहार की अर्थव्यवस्था” बन चुका है। इन नरसंहारों में शामिल हैं – हथियार बनाने वाली कंपनियाँ, टेक्नोलॉजी कंपनियाँ, किराए की वेबसाइटें, बैंक और बीमा कंपनियाँ। कौन हैं ये ‘जनसंहार के व्यापारी’?:- संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने एक विस्फोटक रिपोर्ट में बताया कि कैसे बड़ी-बड़ी कंपनियाँ इज़रायल की हत्या मशीनरी को समर्थन देकर अरबों डॉलर कमा रही हैं। हथियार…

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मरने वाला पाकिस्तानी आतंकवादी नहीं, एक मासूम शिक्षक था।” लेकिन गोदी मीडिया के कैमरों और चीखते एंकरों ने उसे आतंकवादी बना दिया — वो भी बिना किसी सबूत, बिना किसी जांच, बिना पुलिस या सेना की पुष्टि के। अब अदालत ने आदेश दिया है कि ज़ी न्यूज़, न्यूज़18 और अन्य चैनलों के संपादकों व एंकरों पर FIR दर्ज हो। जम्मू-कश्मीर की अदालत का यह फ़ैसला सिर्फ एक व्यक्ति के इंसाफ की दिशा में नहीं, बल्कि पूरे देश की दम तोड़ती पत्रकारिता को आइना दिखाने की कोशिश है। झूठी रिपोर्टिंग का ‘राष्ट्रवादी’ जाल:- क़ारी मोहम्मद इक़बाल — एक धार्मिक शिक्षक, एक…

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले एक ऐसा प्रशासनिक फैसला सामने आया है जिसने न सिर्फ राज्य की राजनीति को गरमा दिया है, बल्कि भारत के लोकतंत्र पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार में “स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR)” यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें सबसे विवादास्पद बात ये है कि 2003 के बाद मतदाता सूची में शामिल हर व्यक्ति से नागरिकता प्रमाण मांगा जा रहा है — एक ऐसा कदम जो एनआरसी की स्मृति ताज़ा करता है। विपक्षी दलों ने इसे साफ़ तौर पर ‘गुप्त एनआरसी’ कहा…

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अगर तुम बोलोगे, तो वे तुम्हारे पीछे आएंगे! ये लाइन कोई फ़िल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के जवाब में कही गई वो बात है, जिसने न्यूयॉर्क की राजनीति को हिला कर रख दिया है। और जिसने कही है, उनका नाम है – ज़ोहरान ममदानी, न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के उम्मीदवार और भारतीय मूल की शान। ट्रंप की धमकी और ममदानी का तीखा जवाब:- जब ट्रंप ने ज़ोहरान ममदानी को गिरफ्तार करने, नागरिकता छीनने और निर्वासित करने की धमकी दी, तो पूरी दुनिया को लगा शायद ममदानी डर जाएंगे, झुक जाएंगे। लेकिन उन्होंने डर को…

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1. क्या हुआ था? – मामला समझिए:- 1. क्या हुआ था? – मामला समझिए:- श्रीनगर (कश्मीर) के ज़ादीबल इलाके में तीन नाबालिग लड़कियों ने एक सड़क के पास इज़रायल विरोधी ग्राफिटी (चित्र) बनाया। बताया गया कि उन्होंने ज़मीन पर ऐसा चित्र बनाया जो इज़रायली झंडे जैसा लग रहा था — यानी शायद वह इज़रायल के खिलाफ विरोध का तरीका था। पुलिस वहां पहुंची और वो चित्र मिटा दिया गया। फिर पुलिस ने तीनों लड़कियों की पहचान की और उनके माता-पिता को थाने बुलाया। थाने में “काउंसलिंग” की गई – यानी पुलिस ने लड़कियों को समझाया कि ऐसा नहीं करना चाहिए।…

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धर्मनिरपेक्ष” और “समाजवादी” यही दो शब्द आज उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नजर में नासूर बन चुके हैं। 28 जून को The Tribune को दिए गए इंटरव्यू में उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये शब्द आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़े गए और “ये हमारे अस्तित्व पर संकट हैं, सभ्यता का अपमान हैं और सनातन की आत्मा का अपवित्रीकरण।”ध्यान देने वाली बात यह है कि धनखड़ का यह बयान ठीक उन्हीं दिनों आया जब आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने भी “धर्मनिरपेक्ष” और “समाजवादी” शब्दों की प्रस्तावना से समीक्षा की मांग उठाई। दोनों टिप्पणियां महज़ संयोग नहीं लगतीं बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक…

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ज़ोहरान ममदानी कौन हैं?:- ज़ोहरान ममदानी एक मुसलमान नेता हैं जो 2018 में अमेरिकी नागरिक बने और 2020 में न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य चुने गए। अब 2025 में, उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी जीत ली है। अगर वे चुनाव जीतते हैं तो न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे।-इंशाअल्लाह लेकिन जैसे ही उन्होंने ये चुनाव जीता, उनके खिलाफ इस्लामोफोबिक (मुस्लिम-विरोधी) हमले तेज़ हो गए। अमेरिका जैसे देश में मुसलमान नेता पर इतने हमले क्यों? अमेरिका खुद को धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) देश कहता है, लेकिन ज़ोहरान ममदानी के खिलाफ हो रही बयानबाज़ी से ये दावा…

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राम पुनियानी- इन दिनों ‘दि इंडियन एक्सप्रेस’ में हिंदू राष्ट्रवाद के उदय एवं प्रभुत्व पर योगेन्द्र यादव, सुहास पलसीकर एवं अकील बिलग्रामी जैसे मेधावी समाज विज्ञानियों के अत्यंत गहन विचार प्रकाशित हो रहे हैं. वे इस बात से चिंतित हैं कि भारतीय राष्ट्रवाद की वर्तमान अवधारणा यूरोपियन ढंग के राष्ट्रवाद जैसी है. हम इसे हिन्दुत्व की राजनीति या हिंदू राष्ट्रवाद का नाम देते हैं. ये सभी यह स्वीकार करते हैं कि हिन्दू राष्ट्रवाद ही आज विद्यमान राष्ट्रवाद है. इसमें कोई संदेह नहीं कि हिन्दू राष्ट्रवाद अत्यंत मुखर एवं प्रभुत्वशाली है. लेकिन फिर भी भारतीय राष्ट्रवाद का विचार अभी तक भारतीय समाज के…

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