लातूर में सड़क बनी राजनीति की रणभूमि!
भूमि पूजन के नाम पर गूंजा ‘जय श्री राम’!
कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने… लेकिन मुद्दा क्या था?
आज हम दिखाएंगे वो सच, जो शायद अब तक आप तक नहीं पहुंचा !
कल 13 जुलाई को लातूर में एक सड़क का भूमि पूजन होने जा रहा था। सामने मंच पर थे कांग्रेस के विधायक और लातूर के पूर्व पालक मंत्री – अमित देशमुख।
लेकिन तभी वहां पहुंचे भाजपा नेता अजीत पाटिल कव्वेकर और उनके समर्थक… अजीत पाटिल ने कहा – ये सड़क भाजपा सरकार ने मंजूर की है। अमित देशमुख महानगर पालिका के चुनाव सर पर देख इसका क्रेडिट लेने के लिए भूमि पूजन कर रहे हैं। लेकिन क्या ये सच्चाई है? चलिए आपको इसकी सच्चाई बताते हैं। लातूर महानगर पालिका से मिली जानकारी से पता चला कि मार्च 2022 में इस सड़क का वर्क ऑर्डर निकला था। ये काम अमित देशमुख के करीबी शारदा कंस्ट्रक्शन को दिया गया था — तब पालक मंत्री थे अमित देशमुख। यानी महायुती शासन में इस काम को मंजूरी दी गई थी। अब सवाल ये पैदा होता है कि जब इस काम का वर्क आर्डर 3 साल पहले निकला था तो अब तक इसका काम क्यों नहीं किया गाय ? इसका भूमि पूजन अब तक क्यों नहीं हुआ ? और अब, जब महानगरपालिका के चुनाव नज़दीक हैं, तभी भूमि पूजन? क्या ये सिर्फ श्रेय लेने की होड़ है? या चुनावी मंच सजाने की तैयारी? अब बात करते हैं अजित पाटिल के विरोध की तो उनके विरोध में सिर्फ इतनी सच्चाई है कि, अमित देशमुख और लातूर कांग्रेस महानगरपालिका के चुनाव नज़दीक हैं, तभी भूमि पूजन क्यों कर रही है? क्या ये सिर्फ श्रेय लेने की होड़ है? या चुनावी मंच सजाने की तैयारी ? राजनीतिक विरोध तक बात रहती, तो शायद ये सवाल न उठता… लेकिन यहां लगे “जय श्री राम” के नारे। जब लातूर भाजपा में कई मुस्लिम नेता और कार्यकर्ता मौजूद हैं, तब “जय श्री राम” के नारे क्यों? सवाल ये है — क्या ये विरोध था या जानबूझकर धार्मिक रंग देने की कोशिश? क्या यह संदेश देना था कि विरोध करने वाले सिर्फ एक धर्म के प्रतिनिधि हैं? या फिर धर्म को राजनीति का औज़ार बनाकर वोट बटोरने की चाल?
अब फैसला आपके हाथ में है! क्या अमित देशमुख का भूमि पूजन सही था?
क्या अजीत पाटिल का विरोध जायज़ था? और क्या ‘जय श्री राम’ जैसे धार्मिक नारों की इस कार्यक्रम में कोई जगह थी? कमेंट में बताएं आपकी राय! इस वीडियो को लाइक करें, शेयर करें, और सच्चाई का साथ दें! जय हिंद, जय महाराष्ट्र !