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Home»एलान विशेष

NCERT की नई किताबें या संघ की इतिहास शाखा?

adminBy adminJuly 26, 2025Updated:July 27, 2025 एलान विशेष No Comments3 Mins Read
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मुग़लों को ‘क्रूर’, ‘अंधकारमय’ बताकर क्या भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ में बदलने का ब्लूप्रिंट तैयार हो रहा है? एनसीईआरटी की नई कक्षा 8 की किताब अब यह तय कर रही है कि इतिहास क्या है, किसे पढ़ाया जाना है, किसे मिटाया जाना है, और किसे ‘ग़द्दार’ ठहराना है। और यह काम इतिहासकार नहीं, राजनीतिक प्रचारकों की टीम कर रही है। नई किताबें अब छात्रों को यह सिखा रही हैं कि बाबर एक खूनी दरिंदा था, अकबर सिर्फ़ “आधा सहिष्णु” था, और औरंगज़ेब तो मूर्तिभंजक शैतान था। जिन शासकों ने इस देश की स्थापत्य, कला, संस्कृति, प्रशासन, और क़ानून को गढ़ा, वो अब सिर्फ़ इस्लामी नामों की वजह से “क्रूर” बताए जा रहे हैं। और शिवाजी, जिन्हें कभी एक कुशल प्रशासक कहा जाता था, अब “कट्टर हिंदू” बताकर हिंदुत्व की नयी मूर्ति के रूप में गढ़े जा रहे हैं। क्या ये इतिहास है, या नफ़रत का पाठ?:- बाबर को अब केवल वही बच्चा “समझ” पाएगा, जिसे ये बताया जाएगा कि वह ‘लाशों की खोपड़ियों से मीनारें’ बनाता था।

अकबर को इतिहास से हटाकर एक ‘मुस्लिम राजा’ की छवि में ढाल दिया गया है, जिसने सिर्फ़ चित्तौड़गढ़ में 30,000 लोगों को मारा। और हाँ, उसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ मानना अब शायद ‘देशद्रोह’ समझा जाएगा। औरंगज़ेब को तो इस तरह पेश किया गया है जैसे वह मुग़ल नहीं, ISIS का कमांडर था—जो मंदिर, गुरुद्वारे और स्कूल तुड़वाता फिरता था। यह वही “इतिहास का अंधकारमय काल” है, जिसे सत्ता अब उजाले में लाकर सिर्फ़ एक ही चीज़ चमकाना चाहती है—हिंदू गौरव की सुनहरी चमक, भले ही उसमें तथ्यों की राख लिपटी हो। इतिहास नहीं, हिंदू राष्ट्र का एजेंडा है ये!:- यह बदलाव एनसीईआरटी की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के नाम पर पेश किया जा रहा है। लेकिन असल में ये सत्ता के “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” का पाठ्यक्रम है। बच्चों को यह नहीं सिखाया जा रहा कि इतिहास बहुआयामी होता है, बल्कि यह सिखाया जा रहा है कि अगर किसी शासक का नाम मुस्लिम है, तो वह ‘हमारा’ नहीं है, वह ‘आक्रमणकारी’ है। दिलचस्प बात ये है कि किताब में बार-बार ये चेतावनी भी दी गई है—“आज किसी को अतीत की घटनाओं के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।” फिर इतने विस्तार से मुसलमान शासकों की ‘क्रूरता’ की कहानी क्यों? फिर मंदिरों की लूट और जज़िया की दास्तानें इतनी प्रमुखता से क्यों? जवाब साफ़ है—जब तुम लोगों को आज के मुसलमानों से नफ़रत करवाना चाहते हो, तो अतीत में उनके पूर्वजों को राक्षस बनाना अनिवार्य हो जाता है।

NCERT अब क्या है?:- एनसीईआरटी अब एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि एक “विचारधारा-निर्माण केंद्र” बन चुकी है। पहले किताबों में मुग़लों की बहुसांस्कृतिक प्रशासनिक प्रणाली, राजपूतों के साथ गठबंधन, टोडरमल की राजस्व नीति, अबुल फ़ज़ल की अयारी, फ़तेहपुर सीकरी की स्थापत्य कला, संगीत, चित्रकला, साहित्य—all of that mattered. अब सिर्फ़ मंदिर तोड़ना, नरसंहार और इस्लामी नाम मायने रखते हैं। यह इतिहास का पुनर्लेखन नहीं, बल्कि इतिहास का हिंदुत्वीकरण है।

किताबें बदलती हैं, लेकिन ज़हर स्थायी होता है:- जो बच्चा ये किताब पढ़ेगा, वह आगे चलकर जब किसी मुसलमान पड़ोसी से मिलेगा, तो शायद उसके मन में सबसे पहले बाबर, अकबर, और औरंगज़ेब की ‘क्रूरता’ ही आएगी। यही उद्देश्य है। इतिहास को हथियार बनाओ, और पीढ़ियों के दिमाग में “हम बनाम वे” की खाई खोद दो। आज की किताबें कल के नागरिक बनाती हैं। अगर आज किताबों में नफ़रत का बीज बोया गया है, तो कल समाज में हिंसा की फ़सल उगेगी। एनसीईआरटी की नई किताबें सिर्फ़ मुसलमानों के खिलाफ नहीं हैं—ये भारत की साझी विरासत के खिलाफ़ हैं। ये भारत के संविधान, उसकी धर्मनिरपेक्ष आत्मा और उसकी ऐतिहासिक जटिलताओं के खिलाफ हैं। बच्चों को इतिहास पढ़ाओ, प्रोपेगैंडा नहीं।

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