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भारतीय लोकतंत्र की सबसे अहम नींवों में से एक है – न्यायपालिका की निष्पक्षता। लेकिन जब एक राजनीतिक पार्टी की पूर्व प्रवक्ता को उच्च न्यायालय की न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है, तो सवाल उठते हैं – और उठने भी चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट में आरती साठे की जज के रूप में नियुक्ति ने यही स्थिति उत्पन्न की है। आरती साठे भाजपा की महाराष्ट्र इकाई की प्रवक्ता रह चुकी हैं। ऐसे में उनका सीधे न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तरों में से एक पर पहुंच जाना न केवल नैतिकता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि संविधान के सिद्धांतों को भी चुनौती देता…

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यरुशलम का अल-अक्सा मस्जिद परिसर — सदियों से आस्था, संघर्ष और संधियों का केंद्र। लेकिन हाल ही में इसराइल के कट्टरपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतेमार बेन-ग्विर की इस स्थल पर ‘प्रार्थना यात्रा’ ने एक बार फिर वो ख़ौफ़ जगा दिया है जिसे फ़लस्तीनी दशकों से महसूस कर रहे हैं:”क्या अल-अक्सा अगला निशाना है?” ‘यात्रा’ या ‘घोषित अतिक्रमण’?:- बेन-ग्विर की इस यात्रा को सिर्फ़ एक धार्मिक ‘अधिकार’ के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन तस्वीरें कुछ और कहती हैं: उन्होंने वहां यहूदी प्रार्थना सभा का नेतृत्व किया — जो दशकों पुरानी उस व्यवस्था का सीधा उल्लंघन है जिसके तहत…

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डॉ. ताहेर शेख- लातूर — महाराष्ट्र का वह शहर जो कभी शिक्षा और प्रगति के लिए जाना जाता था, अब धीरे-धीरे धार्मिक कट्टरता और नफ़रत की आग में झुलसने लगा है। 03 अगस्त 2025 को विवेकानंद पुलिस चौकी क्षेत्र में हुई एक गंभीर घटना ने यह साफ कर दिया कि ये महज़ इत्तेफ़ाक नहीं, बल्कि सोची-समझी साज़िश है। सोशल मीडिया बना नफ़रत का अखाड़ा! झूठी पोस्ट्स, एडिट किए गए वीडियो, भड़काऊ कमेंट्स, और धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले मेसेजेस — यह सब अब लातूर की सोशल मीडिया टाइमलाइन का हिस्सा बन चुके हैं। सवाल ये है: ये सब कौन फैला रहा…

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एक पोस्ट वायरल हुई और पूरा गांव जल उठा। गाड़ियां जलीं, दुकानों पर हमला हुआ, घर आग की भेंट चढ़ा दिए गए और निशाने पर थे — मुसलमान! 1 अगस्त 2025 को, महाराष्ट्र के पुणे जिले के यवत गांव में एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई, जिसमें मध्य प्रदेश के एक मंदिर में पुजारी द्वारा नाबालिग लड़कियों से बलात्कार का ज़िक्र था। ये पोस्ट एक मुस्लिम युवक द्वारा शेयर की गई, जो यवत गांव का निवासी नहीं था। पोस्ट भड़काऊ थी या नहीं, ये जांच का विषय है, लेकिन असली सवाल ये है — क्या एक पोस्ट पर इतना बवाल…

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ग़ाज़ा में फिलहाल जो हो रहा है, वह किसी राजनीतिक लड़ाई से कहीं ज़्यादा एक इंसानियत की खुली हार है। बम बरसते हैं, भूख से बच्चे तड़पते हैं, और दुनिया की बड़ी ताक़तें बैठकर सिर्फ़ बयानबाज़ी करती हैं। भूख से मरता ग़ाज़ा: अकाल नहीं, नरसंहार:- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें चीख-चीखकर कह रही हैं कि ग़ाज़ा में “अकाल की सबसे बुरी स्थिति” पैदा हो गई है। 5 साल की बच्ची का वज़न सिर्फ़ 11 किलो! 7 बार विस्थापित हुए परिवार दाल और पानी से दिन काट रहे हैं। खाने की लाइन में जाने की हिम्मत नहीं बची — और जो जाते…

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सत्ता और कुर्सी के लालच में हिन्दुत्ववादियों ने देश में नफरत का ज़हर इस कदर फैलाया है कि चाहे फिर वो किसी भी समाज के हों न बच्चे सुरक्षित हैं न औरतें। आपको बताएंगे किस तरह हिन्दुत्वादी संगठन ने एक मुसलमान हेड मास्टर का सिर्फ स्कूल से तबादला कराने के लिए स्कूल के मासूम बच्चों के पानी में ज़हर मिला दिया। मक़सद था एक मुस्लिम प्रधानाध्यापक का तबादला – ज़रिया बना स्कूल की पानी की टंकी में ज़हर घोलना! ये कोई अपराध कथा नहीं, कर्नाटक के बेलगावी ज़िले की हकीकत है, जहाँ बच्चों की ज़िंदगियाँ एक सांप्रदायिक साज़िश की भेंट…

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Shamsul Islam  किताब के इस नये संस्करण में बहुत सारे विषयों में तब्दीलियाँ की गई हैं लेकिन प्रेस विवरणों में सिर्फ़ यह बताया गया कि मुग़ल और मुसलमान शासकों पर मौजूदा पाठों के स्थान पर भारत में मुसलमान शासकों द्वारा किए गए धार्मिक उत्पीड़न और अन्य क्रूरताओं का विवरण शामिल कर दिया गया है। और इसी को लेकर हिन्दुत्व के बंधक मीडिया और व्हाट्सप्प विश्वविद्यालयों ने इस्लाम और देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ एक और जंग छेड़ दी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के निदेशक, डी. पी. सकलानी ने दिनांक जुलाई 17, 2025 को कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान…

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2006 मुंबई लोकल ट्रेन धमाका मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेकसूर 12 मुसलमानों को 19 साल बाद रिहा किया तो अगले ही दिन महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला गलत है, और जिन लोगों को छोड़ा गया है, वो असली गुनहगार हैं। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले पर फिलहाल रोक (stay) लगा दी — लेकिन रिहा लोगों को दोबारा जेल नहीं भेजा। सुप्रीम कोर्ट अब पूरी सुनवाई करेगा, फिर तय करेगा कि हाई कोर्ट का फैसला सही था या नहीं। वहीं 2008 मालेगांव बम…

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लातूर में भी छीतड़े न मिलने पर भूखे कुत्ते कर रहे हैं बच्चों पर हमलादिल्ली से गल्ली तक हर सड़क पर सिर्फ गाड़ियाँ नहीं दौड़तीं… दौड़ते हैं खौफ के साए! हर दिन सैकड़ों मासूम, बुज़ुर्ग और आम लोग बन रहे हैं आवारा कुत्तों का शिकार! जिसकी वजह से अब सुप्रीम कोर्ट भी चौंक गया है! कोर्ट ने कहा – ‘हर रोज़ दिल्ली में कुत्तों के काटने की सैकड़ों घटनाएं… रेबीज़ जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है! क्या सरकार सिर्फ तब जागेगी जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा? ये सिर्फ दिल्ली की कहानी नहीं… पूरे भारत की सच्चाई है!…

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सऊदी अरब, जो कभी दुनिया के सबसे बंद और धार्मिक रूप से कठोर देशों में गिना जाता था, अब प्रॉपर्टी के दरवाज़े विदेशी नागरिकों के लिए खोल रहा है। सऊदी कैबिनेट के इस ऐतिहासिक फ़ैसले को ‘सुधार’ के नाम पर पेश किया जा रहा है, लेकिन सवाल ये है — क्या ये क़दम बदलाव का प्रतीक है या आर्थिक हताशा का संकेत? क्या है नया कानून?:- अब कोई भी विदेशी नागरिक, विदेशी कंपनी, एनजीओ या इन्वेस्टमेंट फंड सऊदी अरब में कुछ निश्चित शर्तों के साथ ज़मीन और संपत्ति ख़रीद सकता है। मक्का और मदीना जैसी पवित्र जगहों पर भी बेहद…

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