Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?

April 16, 2026

सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल

April 16, 2026

स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?

April 15, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • 193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?
  • सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल
  • स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
  • सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग
  • सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?
  • मौ. अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी के गिरफ़्तारी का राज़ ?
  • निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
  • रामनवमी, उत्सव से टकराव तक: बदलता सामाजिक माहौल और राजनीतिक संदर्भ
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Monday, April 20
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»भारत

मथुरा की शाही ईदगाह को ‘विवादित ढांचा’ घोषित करवाने की चाल नाकाम

adminBy adminJuly 22, 2025 भारत No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
image credit : kalerkantho.com
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

मकसद न्याय नहीं, नफ़रत का विस्तार था। अदालत ने उसे नकार दिया है।” 3 जुलाई 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मथुरा की ऐतिहासिक शाही ईदगाह मस्जिद को “विवादित ढांचा” कहने की मांग की गई थी। यह फैसला न केवल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है बल्कि उस सुनियोजित नफरती प्रोपेगैंडा को भी आईना दिखाता है, जिसमें अदालतों को ‘हिंदू-मुस्लिम की लड़ाई’ का अखाड़ा बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।

कोर्ट ने कहा – सबूत नहीं, तो नफरत के लिए जगह नहीं, न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि – “फिलहाल जो दस्तावेज और सबूत उपलब्ध हैं, उनके आधार पर शाही ईदगाह को ‘विवादित ढांचा’ घोषित नहीं किया जा सकता।” यानी कोर्ट ने साफ कहा कि जिन्हें “शोर मचाकर मंदिर बनाना” है, उनके पास “तथ्य” नहीं, सिर्फ “भावनात्मक हथियार” हैं।

याचिका का असली मकसद: ‘बैकडोर’ से सांप्रदायिकता घुसाने की कोशिश, याचिकाकर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह चाहता था कि कोर्ट के स्टेनोग्राफर तक को आदेश दिया जाए कि वह हर दस्तावेज़ में मस्जिद को “विवादित ढांचा” कहे। सोचिए! मुकदमा अभी शुरू भी नहीं हुआ, कोई निर्णय नहीं आया, और पहले से ‘विवादित’ ठहराने का षड्यंत्र! यह वैसी ही चाल थी जैसी अयोध्या में देखी गई – पहले शब्दों में मस्जिद को ‘ढांचा’ बना दो, फिर राजनीति में उसे ‘विवादित’ बताओ, फिर कोर्ट को ‘प्रेसर’ में लाओ।

1968 का समझौता क्यों नहीं याद दिलाते ये याचिकाकर्ता? 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट और शाही ईदगाह के बीच एक समझौता हुआ था – शांति, सौहार्द और साझी विरासत के नाम पर। लेकिन आज का एजेंडा है – “इतिहास की कब्रें खोदो, नफरत के हथियार निकालो”। 400 साल पुरानी मस्जिद को ‘अवैध’ कहने का दुस्साहस! हिंदू पक्ष की तरफ से कहा गया कि ईदगाह मस्जिद की दीवारों पर “हिंदू चिह्न” हैं। सवाल ये है – क्या कोई ऐतिहासिक इमारत 400 साल तक अवैध कब्जा हो सकती है? फिर तो देश की हर दूसरी इमारत पर मुकदमा कर देना चाहिए! कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा, ताजमहल, सबको “विवादित ढांचा” कहने की मांग कर डालो!

गोदी मीडिया का रोल: नफरत की आग में घी डालने वाला ‘मीडियाई तांडव’ टीवी स्टूडियो में बैठकर एंकरों ने पहले से तय कर लिया कि: मस्जिद है, इसलिए “विवादित” है। अगर मुसलमान प्रबंधन में है, तो यह “साजिश” है। मीडिया की इस भूमिका ने पहले अयोध्या में देखा था कि कैसे “मस्जिद” को सिर्फ एक “ढांचा” बता-बताकर लोगों की सोच को बदला गया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही साफ संकेत दिए थे, जनवरी 2024 में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद का “निरीक्षण” करने का आदेश दिया, तब सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगा दी थी। ये संकेत था कि –”धार्मिक उन्माद को न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मत बनाओ।”

क्या है असल मकसद? – मंदिर नहीं, मुसलमानों को डराना! यह ‘शाही ईदगाह’ का मामला नहीं है, बल्कि पूरे भारत में मुस्लिम पहचान को मिटाने की परियोजना है: कभी बुलडोज़र से घर गिराओ, कभी लव जिहाद का शोर मचाओ, कभी इतिहास की कब्रें खोदकर मंदिर खोजो, और अब – मस्जिदों को “ढांचा” बताकर अदालतों में घसीटो।

आखिर में एक सवाल: संविधान का “सेक्युलर” शब्द क्या सिर्फ दिखावे के लिए है? अगर हर ऐतिहासिक मस्जिद को आज “विवादित” कहा जाएगा, तो फिर संविधान में “धर्मनिरपेक्षता” की जगह “बहुसंख्यक तुष्टिकरण” ही लिख दो। लेकिन शुक्र है – अदालत ने अभी भी कुछ हद तक सच का साथ दिया है। आगे क्या? अगली सुनवाई 2 अगस्त को है। लेकिन नफरती सियासत की सुनवाई जनता के दिलों में रोज़ होती है। यह याचिका कोई “न्याय की मांग” नहीं थी, बल्कि “न्यायपालिका के जरिए नफरत फैलाने की एक चाल” थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस चाल को समझा और नकारा। अब सवाल ये है कि –अगली बार ये चाल कहां चलेगी? और हम कब तक चुप रहेंगे?

Allahabad High Court Communal Litigation Disputed Structure Mathura Masjid Temple Dispute Shahi Eidgah Dispute इलाहाबाद हाईकोर्ट मथुरा मंदिर मस्जिद विवाद विवादित ढांचा शाही ईदगाह विवाद सांप्रदायिक मुकदमेबाज़ी
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?

सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल

स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?

सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग

सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?

मौ. अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी के गिरफ़्तारी का राज़ ?

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • 193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?
  • सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल
  • स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
  • सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग
  • सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility