सत्ता और कुर्सी के लालच में हिन्दुत्ववादियों ने देश में नफरत का ज़हर इस कदर फैलाया है कि चाहे फिर वो किसी भी समाज के हों न बच्चे सुरक्षित हैं न औरतें। आपको बताएंगे किस तरह हिन्दुत्वादी संगठन ने एक मुसलमान हेड मास्टर का सिर्फ स्कूल से तबादला कराने के लिए स्कूल के मासूम बच्चों के पानी में ज़हर मिला दिया।
मक़सद था एक मुस्लिम प्रधानाध्यापक का तबादला – ज़रिया बना स्कूल की पानी की टंकी में ज़हर घोलना! ये कोई अपराध कथा नहीं, कर्नाटक के बेलगावी ज़िले की हकीकत है, जहाँ बच्चों की ज़िंदगियाँ एक सांप्रदायिक साज़िश की भेंट चढ़ सकती थीं — सिर्फ इसलिए कि एक स्कूल का प्रधानाध्यापक मुसलमान था!
14 जुलाई को जब हूलिकट्टे गांव के सरकारी स्कूल में मासूम बच्चे ज़हरीला पानी पीने के बाद बीमार पड़े, तो किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इसके पीछे एक घिनौनी साजिश रची गई थी।जांच में सामने आया कि इस वारदात के पीछे कोई और नहीं, बल्कि हिंदुत्ववादी संगठन श्रीराम सेना का सौंदत्ती तालुका अध्यक्ष सागरा पाटिल था। मक़सद था – मुस्लिम प्रधानाध्यापक सुलेमान गोरिनाइक को बदनाम करना और उनका तबादला कराना।
शर्मनाक हदें पार कर गया हिंदुत्ववादी एजेंडा:- एक स्कूल की पानी की टंकी में कीटनाशक मिलाने जैसा कुकृत्य, जिसमें मासूम बच्चों की जान भी जा सकती थी, ये सिर्फ नफ़रत से उपजे दिमाग़ की उपज हो सकता है। सागरा पाटिल, जो खुद श्रीराम सेना से जुड़ा है, ने ये योजना दो महीने पहले तैयार की थी। उसने अपने ड्राइवर कृष्णा मदारा को ब्लैकमेल कर जहर डलवाने की साजिश रची। एक मासूम बच्चे को चॉकलेट और पैसे का लालच देकर उसे ज़हर डालने के लिए उकसाया गया। ये कैसी राजनीति है जो बच्चों की हत्या की साजिश से भी नहीं कतराती?
मुसलमान को हटाने के लिए बच्चों की जान से खेल!:- ये अकेली घटना नहीं है – बल्कि ये उस बड़े पैटर्न का हिस्सा है जहाँ हिंदुत्ववादी संगठन मुसलमानों के खिलाफ जहरीली नफरत को हवा देते हैं, चाहे वो मोहल्लों में हो, सोशल मीडिया पर, या अब स्कूलों में। पिछले कई सालों में बार-बार देखा गया है कि मुस्लिम शिक्षकों, अधिकारियों, डॉक्टरों और पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है। कभी “लव जिहाद”, कभी “भूमि जिहाद”, तो कभी “शिक्षा जिहाद” जैसे शब्द गढ़कर मुसलमानों को हर क्षेत्र से बाहर करने की साज़िशें रची जाती हैं। इस बार तो हद ही पार कर दी – बच्चों को ज़हर पिलाकर!
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ली सीधी टक्कर:- मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस घटना की निंदा करते हुए सीधे-सीधे सवाल उठाया: क्या श्री राम सेना के प्रमोद मुथालिक, भाजपा नेता विजयेंद्र या आर अशोक इस जघन्य साज़िश की जिम्मेदारी लेंगे?”
उन्होंने सांप्रदायिक घृणा और धार्मिक कट्टरवाद की राजनीति को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया, और वादा किया कि सभी दोषियों को कड़ी सज़ा मिलेगी। शरण साहित्य की धरती पर ज़हर की राजनीति? कर्नाटक की यही धरती, जहां शरण आंदोलन ने करुणा, समानता और इंसानियत की बातें की थीं — आज वहीं पर हिंदुत्व के ज़हर से बच्चों की ज़िंदगी खतरे में डाली जा रही है।
इस शर्मनाक घटना ने साबित कर दिया कि ये संगठन मुसलमानों को बदनाम करने और उन्हें बाहर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अगर समय रहते इन पर रोक नहीं लगी, तो अगला निशाना कोई और स्कूल, कोई और बच्चा हो सकता है।
सवाल जनता से भी, क्या अब भी हम चुप रहेंगे? क्या अब भी हम इन संगठनों की जहरीली राजनीति को नज़रअंदाज़ करेंगे? क्या बच्चों की ज़िंदगी से बड़ा भी कोई एजेंडा हो सकता है? अब ज़रूरत है – मज़हबी नफरत फैलाने वाले हर गिरोह को बेनकाब करने की। जरूरत है, मुसलमानों के खिलाफ फैलाई जा रही जहरीली साजिशों को उजागर करने की।और सबसे बड़ी बात – ज़रूरत है सच के साथ खड़े होने की, क्योंकि अगली बार, शिकार कोई भी हो सकता है – मज़हब पूछकर ज़हर असर नहीं छोड़ता। हिंदुत्व की राजनीति अब बच्चों की जान तक पहुंच गई है – अब भी चुप रहे, तो इंसानियत को ज़हर मार देगा!