- क्या शिक्षा मंत्रालय को नैतिक नेतृत्व चाहिए या सिर्फ़ राजनीतिक वफ़ादारी?
- जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?
- वक्फ की ज़मीन पर कब्ज़ा अब आसान नहीं! लातूर में भूमाफियाओं को वक्फ बोर्ड की खुली चेतावनी
- अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
- गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
- मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
- सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
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सुप्रीम कोर्ट जूता हमला केवल एक घटना नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है। 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंकने का यह सुप्रीम कोर्ट जूता हमला वास्तव में उस उग्र ऑनलाइन नफ़रत का भौतिक रूप था, जो हफ्तों से सोशल मीडिया पर पनप रही थी। डिजिटल नफ़रत का ऑफ़लाइन परिणाम; एक जूते ने लोकतंत्र पर उठाया सवाल सुप्रीम कोर्ट की चारदीवारी के भीतर गूंजे नारे, उड़ता जूता, और न्यायपालिका की गरिमा पर लगा दाग — यह महज़ एक सनकी वकील की हरकत नहीं, बल्कि…
एनबीडीएसए का झटका: ज़ी न्यूज़ और टाइम्स नाउ नवभारत पर कार्रवाई एनबीडीएसए ने हाल ही में दो बड़े टीवी चैनलों — ज़ी न्यूज़ और टाइम्स नाउ नवभारत — को तगड़ा झटका दिया है। ‘मेहंदी जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ जैसे सांप्रदायिक कार्यक्रमों पर कार्रवाई करते हुए संस्था ने कहा कि इन चैनलों ने तटस्थता, पत्रकारिता नैतिकता और आचार संहिता का उल्लंघन किया है। ‘मेहंदी जिहाद’ का खेल: नफ़रत को न्यूज़ बना देना शिकायत का मूल था नफ़रत को न्यूज़ बना देना। शिकायतकर्ता इंद्रजीत घोरपड़े ने बताया कि ज़ी न्यूज़ ने अक्टूबर 2024 में एक हिंदुत्व समूह के अभियान को बढ़ावा दिया…
ट्रंप शांति योजना पर हमास की सहमति: रणनीतिक चाल या वास्तविक अवसर? गाजा के लोग आश्चर्य, डर और उम्मीद के मिश्रित भावनाओं के बीच जी रहे हैं। ऐसे में, हमास की हालिया घोषणा — डोनाल्ड ट्रंप की 20-बिंदु ‘शांति/समापना’ प्रस्ताव के कुछ तत्वों पर सहमति — केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक जटिल रणनीतिक मोड़ है। इसके पूरे तात्पर्य को समझने के लिए तीन स्तरों पर गहन विचार करना आवश्यक है: (1) हमास ने वास्तव में किस बात पर सहमति दी और क्या टाल दिया; (2) अमेरिका और इजरायल द्वारा रखी गई कड़ी शर्तों के पीछे छिपे राजनीतिक-सुरक्षा के मुद्दे…
image credit : deccanchronicle.com केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने हाल ही में एक तीखा बयान देकर नई बहस छेड़ दी। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना इज़रायल में ज़ायोनिस्ट आंदोलन से करते हुए दोनों को “जुड़वां भाई” कहा। यह टिप्पणी महज़ एक राजनीतिक तंज नहीं बल्कि एक गहरी ऐतिहासिक और वैचारिक पड़ताल की ओर इशारा करती है। सवाल यह है कि विजयन की इस तुलना में कितना सच छिपा है और किन परतों को यह बयान उजागर करता है? आरएसएस और ज़ायोनिस्ट आंदोलन: समानताओं की परतें दोनों ही विचारधाराएँ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा पर खड़ी हैं। ज़ायोनिस्ट आंदोलन…
image credit: naftemporiki.gr अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग़ज़ा के मसले पर हमास को रविवार शाम (वॉशिंगटन समय) 6:00 बजे तक अपना 20-बिंदु वाला प्रस्ताव स्वीकार करने की अल्टीमेटम दे दी। उनके शब्दों में — अगर हमास सहमत नहीं हुआ तो “ऐसा कहर बरपेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।” यह बयान केवल एक कूटनीति-ट्विट नहीं, बल्कि युद्ध-नीति, राजनैतिक सिग्नलिंग और क्षेत्रीय समीकरणों के समाविष्ट एक बड़ा पैकेज है — और इसलिए इसे केवल “डेडलाइन” के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक मोड़ के रूप में देखा जाना चाहिए। प्रस्ताव की रचना — क्या रखा गया है और किसने समर्थन…
असदुद्दीन ओवैसी का हालिया बयान — “इस देश में ‘आई लव मोदी’ कहा जा सकता है, लेकिन ‘आई लव मोहम्मद’ नहीं कहा जा सकता” — भारतीय राजनीति में नई बहस छेड़ गया है। इस बयान ने सत्ता और समाज दोनों में गहरी हलचल पैदा की। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने ओवैसी की निंदा करते हुए कहा कि उन्हें अपने अल्फ़ाज़ वापस लेने चाहिए और माफ़ी मांगनी चाहिए। अल्वी का तर्क यह है कि हज़रत मोहम्मद ﷺ की मोहब्बत को राजनीतिक मुक़ाबले में घसीटना गलत है। लेकिन असल सवाल यही है कि क्या वाकई ओवैसी ने किसी तरह से तौहीन की,…
दुनिया भर में बसे 3.2 करोड़ भारतीय प्रवासी लंबे समय से अपनी मेहनत और उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री से लेकर अमेरिका की सिलिकॉन वैली, ऑस्ट्रेलिया के अस्पतालों और जर्मनी की इंजीनियरिंग इंडस्ट्री तक, उनकी मौजूदगी हर जगह दिखाई देती है। लेकिन हालिया घटनाएँ दिखाती हैं कि यह सफलता अब जलन और ग़ुस्से का निशाना बन रही है। यूरोप की सड़कों पर उबलता ग़ुस्सा ब्रिटेन की सड़कों पर हाल ही में 1.5 लाख से अधिक लोग प्रवासियों के ख़िलाफ़ उतरे। “उन्हें वापस भेजो” जैसे नारों और झंडों के बीच जो दृश्य सामने आया, उसने यह साफ़…
आरएसएस के 100 वर्ष: एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी 1 अक्टूबर 2025 का दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हुआ। दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष डाक टिकट और 100-रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। सरकारी सम्मान और उसके मायने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने संघ की सेवा-भावना, अनुशासन और “राष्ट्र चेतना” को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह स्मृति-टिकट उस ऐतिहासिक पल की याद दिलाता है जब संघ के स्वयंसेवक…
बिहार के चंपारण में 80,000 मुस्लिम मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला? परिचयभारत में चुनावी लोकतंत्र की नींव मतदाता सूची है। लेकिन जब इस सूची से ही लाखों योग्य मतदाताओं को बाहर करने की साजिश की जाए, तो सवाल खड़े होते हैं कि क्या यह लोकतंत्र बचा रह पाएगा? बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के ढाका विधानसभा क्षेत्र में ऐसा ही एक बड़ा खुलासा हुआ है। यहाँ लगभग 80,000 मुस्लिम मतदाताओं को गैर-भारतीय नागरिक बताकर वोटर लिस्ट से हटाने की सुनियोजित कोशिश की गई है। कौन चला रहा था यह खेल? द रिपोर्टर्स…
लॉरेंस बिश्नोई गैंग: कनाडा के आतंकवादी टैग का विश्लेषण परिचय: एक साहसिक कदमकनाडा सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आधिकारिक तौर पर एक ‘आतंकवादी संगठन’ के रूप में सूचीबद्ध करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इस घोषणा से कनाडा सरकार को इस गैंग से संबंधित संपत्तियों को जब्त करने, धन को जमा करने और आतंकवाद-सम्बंधित वित्तीय अपराधों में मुकदमा चलाने का शक्तिशाली कानूनी आधार मिल गया है। कनाडा की पब्लिक सेफ्टी मिनिस्टर गैरी आनंदसांगरी के अनुसार, यह कदम प्रवासी समुदायों में डर का माहौल बनाने वाले इस गैंग से मुकाबला करने के लिए एक “मजबूत और असरदार औज़ार” साबित होगा।…