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एशिया कप 2025 T20 में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी नहीं भारत ने एशिया कप 2025 के लिए अपनी टी20 टीम का ऐलान कर दिया है। टीम की कमान सूर्यकुमार यादव को सौंपी गई है, जबकि शुभमन गिल उपकप्तान बनाए गए हैं। टीम में रिंकू सिंह, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव और अन्य कई युवा चेहरे शामिल हैं। लेकिन इस टीम चयन ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है—क्योंकि इस 15 सदस्यीय टीम में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी शामिल नहीं किया गया। बड़ा सवाल: मुस्लिम खिलाड़ियों को क्यों नज़रअंदाज़ किया गया? भारत की क्रिकेट परंपरा में मोहम्मद अजहरुद्दीन, इरफ़ान पठान, यूसुफ पठान, ज़हीर…

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ग़ाज़ा की ज़मीन आज दुनिया के सबसे बड़े कब्रिस्तान में बदल चुकी है। बच्चे, औरतें, बुज़ुर्ग—सब मिट्टी में मिलाए जा रहे हैं। इज़राइल की बमबारी और नाकेबंदी ने ग़ाज़ा को मौत, भूख और बर्बादी के अंधेरे गड्ढे में धकेल दिया है। और सबसे बड़ा सवाल यह है—दुनिया क्यों चुप है? क्या इंसानियत का गला घोंट दिया गया है, या फिर सत्ता और राजनीति के शोर में मासूमों की चीखें सुनाई देना बंद हो गई हैं? मौत का सिलसिला: आंकड़ों की जुबान:- अक्टूबर 2023 से अब तक 62,000 से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं। इन मौतों में ज़्यादातर बच्चे और…

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18 मार्च को लातूर की सड़कों पर इतिहास लिखा गया…बारिश में भी हज़ारों लोग… हाथों में तिरंगा, होठों पर सन्नाटा और आँखों में न्याय की ज्वाला लेकर निकले… यह था कुरैशी समाज के साथ किसान संगठनों का भव्य मौन मोर्चा! गौरक्षा के नाम पर किसानों और कुरैशी समाज पर हो रहे अत्याचार… लूटपाट, मारपीट, और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं के ख़िलाफ़ ज़िले के किसान संगठनों के साथ कुरैशी समाज ने आज अपना ग़ुस्सा मौन रहकर भी साफ़-साफ़ जता दिया।मोर्चे में शामिल नागरिकों के हाथों में तिरंगा और अपनी मांगों वाले पोस्टर थे। “हमें न्याय चाहिए” और “गोमाता की रक्षा होनी…

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15 अगस्त 2025 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सिर्फ़ झंडा फहराने का दिन नहीं रहा। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में RSS को “दुनिया का सबसे बड़ा NGO” बताते हुए उसके सौ वर्षों को “गर्व और स्वर्णिम अध्याय” करार दिया। असली सवाल:- क्या प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के मंच को किसी वैचारिक संगठन का महिमामंडन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं? क्या RSS, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया और कई बार प्रतिबंधित हुआ, उसकी “राष्ट्र सेवा” की तस्वीर गढ़ना इतिहास को पलटने की कोशिश है? क्या यह संदेश देश की…

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image source : jansatta.com 📢 आरएसएस शताब्दी वर्ष की योजना और राजनीतिक बहस ज्यादातर मुस्लिम विरोधी गतिविधियां बदस्तूर जारी रहीं क्योंकि उनके खिलाफ किया जाने वाला प्रोपेगेंडा संघ परिवार का मुख्य हथियार है। जब देश में कोविड-19 फैला तो इस त्रासदी का उपयोग भी मुसलमानों का और अधिक दानवीकरण करने के लिए किया गया और महामारी का ठीकरा दिल्ली में चल रहे तबलीगी जमात सम्मेलन पर फोड़ने की कोशिश की गई। कोरोना जेहाद, कोरोना बम जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाने लगा और इसके साथ ही फेरी लगाकर सामान बेचने वाले मुसलमानों का हिन्दू बस्तियों में बहिष्कार किया गया। आगामी…

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सय्यद मोईनुद्दीन बड़ेसाब (मुख्य संपादक) भाग 1 — इतिहास के पन्नों में दबा सच:- भारत की आज़ादी की कहानी सिर्फ़ एक धर्म, जाति या भाषा की नहीं है — यह हर भारतीय की कुर्बानियों से लिखी गई है। लेकिन अफ़सोस, आज़ादी के कई सुनहरे पन्नों में मुसलमानों के योगदान को या तो छोटा करके दिखाया गया, या पूरी तरह भुला दिया गया। 1857 की पहली जंग-ए-आज़ादी में मुसलमानों की भूमिका निर्णायक थी। मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेज़ “रामपुर का शेर” कहते थे — उन्होंने फ़ैज़ाबाद और शाहजहांपुर में अंग्रेज़ों को कड़ी टक्कर दी [1]। बख़्त ख़ाँ, तोपख़ाने के माहिर, दिल्ली…

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15 अगस्त 1947 — वो दिन, जब हमने अंग्रेज़ों की गुलामी की जंजीरें तोड़ीं। लेकिन आज, 78 साल बाद, उसी दिन हमारी अपनी चुनी हुई सरकार कहें या चोरी के वोटों से बनी सरकार पता नहीं लेकिन हमें बता रही है — क्या खाना है और क्या नहीं। महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली, मालेगांव, औरंगाबाद और नागपुर नगर निगमों ने आदेश जारी कर दिया — स्वतंत्रता दिवस पर मांस की बिक्री बंद। और फिर देखते ही देखते, ये मामला राजनीति, धर्म, संस्कृति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बड़े विवाद में बदल गया। ये पाबंदी किस तर्क पर?:- स्वतंत्रता दिवस कोई धार्मिक पर्व नहीं।…

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने के साथ ही देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRIC/NRC) की चर्चा फिर तेज हो गई है। असम में NRC लागू करने के दौरान लाखों लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए पुराने दस्तावेज़ देने पड़े थे, और जिनके पास कागज़ नहीं थे, वे लिस्ट से बाहर हो गए। माना जा रहा था कि 2019 के चुनाव में बीजेपी को अकेले बहुमत न मिलने से NRC जैसी प्रक्रिया पूरे देश में जल्दी नहीं आएगी। लेकिन बिहार और महाराष्ट्र में जो हो रहा है, वह संकेत देता है कि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे अलग-अलग तरीकों से…

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इस वक़्त देश में देशके सबसे अहेम मुद्दे पर बहस जारी है हालांकि बहुत पहले इस मुद्दे पर विपक्ष को धयान देने की ज़रूरत थी, अगर विपक्ष पहले ही इस मुद्दे पर ध्यान देता तो शायद आज देश की तस्वीर कुछ और ही होती, जी हाँ भारत का लोकतंत्र जिसे जनता की ताकत पर चलना चाहिए वो आज एक पार्टी की ‘वोट चोरी’ मशीन परचल रहा है। राहुल गांधी ने महादेवपुरा का जो कच्चा-चिट्ठा खोला है उससे तो चुनाव आयोग की नींद उड़ जानी चाहिए थी…लेकिन हुआ उल्टा — आयोग ने आरोपों की जांच करने के बजाय राहुल को ही…

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दोस्तों इस वक़्त महाराष्ट्र में एक नया तमाशा चल रहा है ! हर शहर, हर नगर परिषद, हर महापालिका में एक तोतले साहब लोगों के डॉक्यूमेंट्स जांचते फिर रहे हैं, महाराष्ट्र के स्थानीय मुसलमानों को बांग्ला देशी घोषित कर रहे हैं। साथ में नफरत भी फैला रहे हैं, जिनके पास न कोई संवैधानिक पद है न कोई वोट चोरी की कुर्सी ? फिर भी सुरक्षा ऐसी जैसे देश के मंत्री को दी जाती है- “लेकिन असली सवाल आपके, मेरे, हमारे टैक्स के पैसों से इन्हे सिक्योरिटी क्यों दी जा रही है ? “कोई मंत्री नहीं, कोई सांसद नहीं, कोई संवैधानिक…

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