एक पोस्ट वायरल हुई और पूरा गांव जल उठा। गाड़ियां जलीं, दुकानों पर हमला हुआ, घर आग की भेंट चढ़ा दिए गए और निशाने पर थे — मुसलमान!
1 अगस्त 2025 को, महाराष्ट्र के पुणे जिले के यवत गांव में एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई, जिसमें मध्य प्रदेश के एक मंदिर में पुजारी द्वारा नाबालिग लड़कियों से बलात्कार का ज़िक्र था। ये पोस्ट एक मुस्लिम युवक द्वारा शेयर की गई, जो यवत गांव का निवासी नहीं था। पोस्ट भड़काऊ थी या नहीं, ये जांच का विषय है, लेकिन असली सवाल ये है — क्या एक पोस्ट पर इतना बवाल जायज़ है? यह गांव पहले से ही तनाव में था क्योंकि 26 जुलाई को छत्रपति शिवाजी महाराज की एक प्रतिमा को कथित रूप से तोड़ा गया था। इस पर गांव के सभी समुदायों ने मिलकर शांतिपूर्ण विरोध भी किया। लेकिन सवाल ये है कि ये हरकत किसने की थी ?क्यों की थी ?वो आरोपी अब तक पुलिस को क्यों नहीं मिला ? क्या किसी साज़िश के तहत दंगे भड़काने के लिए तो कहीं छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचाया गया था ? लेकिन गांव के सभी समुदायों ने मिलकर शांतिपूर्ण विरोध से इस साज़िश को नाकाम किया। जिसकी वजह से 1 अगस्त को हिंदू संगठनों और भाजपा नेताओं ने ‘हिंदू जन आक्रोश मोर्चा’ के बैनर तले एक रैली निकाली। और अगले ही दिन — 2 अगस्त को — गांव में हिंसा भड़क गई। बहाना बनाया गया सोशल मीडिया पर एक कथित “आपत्तिजनक” वायरल हुई पोस्ट का, जिसमें मध्य प्रदेश के किसी मंदिर में एक 60 वर्षीय पुजारी द्वारा दो नाबालिग लड़कियों से बलात्कार का आरोप लगाया गया था। अगर पोस्ट गलत थी तो कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए। और हुई भी पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पोस्ट करने वाले युवक को हिरासत में लिया। अगर फिर भी पोस्ट करने वाले पर गुस्सा था तो पोस्ट डालने वाले युवक के घर को टारगेट करके जलाया दिया गया। उसके बावजूद भीड़ इकट्ठा की गई।यवत पुलिस स्टेशन के बाहर हजारों लोग जमा हुए। पहले से ही भड़काए जा रहे माहौल में सड़कें हिंसा का मैदान बन गईं। गाड़ियाँ जलाई गईं। एक बेकरी फूंक दी गई। एक मस्जिद पर पथराव किया गया। लेकिन सबसे बड़ी बात — हमले मुस्लिम इलाकों में केंद्रित रहे। क्या मुसलमान टारगेट नहीं थे? क्या ये सिर्फ गुस्सा था? या फिर एक समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश? मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा: रैली और हिंसा का कोई संबंध नहीं है। हिंसा एक आपत्तिजनक पोस्ट के कारण भड़की। पुलिस कह रही है — अभी पूर्व-योजना या साजिश के कोई ठोस संकेत नहीं, लेकिन जांच जारी है। जबकि 5 FIR दर्ज हुई हैं, 500+ लोग नामजद हैं,17 गिरफ्तारियां हुईं हैं, 100 से अधिक की पहचान हो चुकी है, पोस्ट करने वाला व्यक्ति हिरासत में है, 3 विशेष जांच टीमें बनी हैं, 50+ लोगों से पूछताछ हुई है फिर भी सच्चाई का पता नहीं चल रहा है। सरकार को जवाब देना होगा। सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर दंगा किया, दुकानों और घरों को फूंका — तो क्या वे सिर्फ ‘भावुक लोग’ थे? क्या दंगा करने वालों को हिंदू संगठनों की रैली ने हिम्मत नहीं दी? क्या सरकार उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है? क्या दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है ? क्या सरकार दोषियों को समान रूप से सज़ा देगी? क्या ये एक नया ट्रेंड नहीं बनता जा रहा है — सोशल मीडिया पोस्ट के बहाने समुदाय विशेष को टारगेट करना? यवत एक गांव है, लेकिन उसकी आग पूरे भारत को जला सकती है अगर सरकार ने आज सही कदम नहीं उठाया। पोस्ट बहाना था, निशाना मुसलमान थे — ये सच अगर आप नहीं देखेंगे, तो कल ये आग आपके दरवाज़े तक आएगी। दंगा करने वाला कोई भी हो — सज़ा दो! भीड़ को धर्म की ढाल मत दो — कानून सबके लिए बराबर है! “हिंदू जन आक्रोश मोर्चा” का नाम अभी तक FIR या पुलिस बयान में नहीं आया. क्योंकि सवाल सिर्फ यवत का नहीं है – ये सवाल है देश के हर उस गांव और शहर का, जहां धर्म के नाम पर भीड़ तैयार की जाती है, और इंसाफ कुचल दिया जाता है.