इस वक़्त देश में देशके सबसे अहेम मुद्दे पर बहस जारी है हालांकि बहुत पहले इस मुद्दे पर विपक्ष को धयान देने की ज़रूरत थी, अगर विपक्ष पहले ही इस मुद्दे पर ध्यान देता तो शायद आज देश की तस्वीर कुछ और ही होती, जी हाँ भारत का लोकतंत्र जिसे जनता की ताकत पर चलना चाहिए वो आज एक पार्टी की ‘वोट चोरी’ मशीन परचल रहा है। राहुल गांधी ने महादेवपुरा का जो कच्चा-चिट्ठा खोला है उससे तो चुनाव आयोग की नींद उड़ जानी चाहिए थी…लेकिन हुआ उल्टा — आयोग ने आरोपों की जांच करने के बजाय राहुल को ही चुनौती दे डाली! 12 हज़ार डुप्लीकेट वोटर। 40 हज़ार से ज़्यादा फर्जी पते। लग भग 11 हज़ार एक ही पते पर दर्ज वोटर। 4 हज़ार से ज़्यादा अमान्य फोटो। 34 हज़ार फ़ॉर्म-6 का दुरुपयोग। सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र में 1.1 लाख वोटों की बढ़त! हज़ारों फर्जी नाम, नकली पते, डुप्लीकेट वोट.. एक पते पर 80 वोटर… एक कमरे में 46 वोटर…और तो और, एक शराब फैक्ट्री के पते पर 68 वोटर! लेकिन वहां इन वोटरों का नामोनिशान तक नहीं। राहुल गांधी का आरोप साफ है — यही ‘वोट चोरी का मॉडल’ पूरे देश में चल रहा है!और यही वजह है कि BJP हर चुनाव में जीत के रिकॉर्ड तोड़ती रही है। BJP ने सिर्फ वोट बैंक पर नहीं…बल्कि इस देश की हर अहम कुर्सी पर अपने प्यादे बिठा दिए हैं —चाहे वो चुनाव आयोग हो या न्यायपालिका। इनको हटाना अब किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं है। चलिए आपको समझाते हैं भाजपा का वो सच जिस पर विपक्ष ने वक़्त रहते ध्यान नहीं दिया।2014 में सत्ता में आते ही, बीजेपी ने सबसे पहले क्या किया? पहले मीडिया को खरीदा… हां, वही जिसे आज लोग “गोडी मीडिया” कहते हैं। जो सत्ता से सवाल करने की बजाय, सत्ता की गोद में बैठकर ताली बजाता है। कभी सवाल नहीं करता… बस जय-जयकार करता है। ये पहला वार था — जनता की आंख और कान पर। ताकि असली खबर दब जाए… और प्रचार ही सच बन जाए। जो हो भी रहा है। फिर, एक-एक करके देश की सबसे अहम संस्थाओं को अपने क़ब्ज़े में लिया। ED – जो भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनी थी, अब विपक्ष तोड़ने का औज़ार बन गई। 2014 के बाद ED ने 95% केसेस विपक्षी नेताओं पर किए हैं। CBI – जिसे सुप्रीम कोर्ट ने कभी “पिंजरे का तोता” कहा था, अब तो पूरी तरह सत्ता की ज़ुबान बोलने लगी। CBI के ज़्यादातर हाई-प्रोफ़ाइल केस — विपक्ष के खिलाफ हैं। और चुनाव आयोग – जो लोकतंत्र का अंपायर था, अब वो सिर्फ़ एक टीम के लिए खेल रहा है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…इन हथियारों से बीजेपी ने सिर्फ़ नेताओं को डराया नहीं — पूरी की पूरी सरकारें गिरा दीं। अर्जुन की तरह निशाना साधा… महाराष्ट्र, कर्नाटक, मणिपुर, बिहार, मध्य प्रदेश, गोवा, अरुणाचल, पुदुचेरी… और कुल मिलाकर 10 चुनी हुई राज्य सरकारें कभी ED/CBI के डर से, कभी पैसे और सत्ता के लालच से, और कभी गवर्नर या स्पीकर की मदद से गिर गईं। न्यायपालिका में भी अपने प्यादे बिठाए गए। जिनमें कई बीजेपी से जुड़े वकील जज बन गए। भाजपा ने सत्ता का ऐसा जाल बिछाया है जिसे तोड़ना विपक्ष के लिए नामुमकिन सा हो गया है। विपक्ष ने ये सच्चाई बहुत देर में समझी…लेकिन सवाल ये है — क्या कांग्रेस इस जाल को तोड़ पाएगी? या फिर एक और चुनाव… BJP की ‘वोट चोरी फैक्ट्री’ के नाम होगा? चुनाव आयोग चाहे लाख सफाई दे…जब तक फर्जी वोटर और वोटिंग की सीसीटीवी फुटेज पब्लिक नहीं होती, लोकतंत्र पर लगा धब्बा कभी दूर नहीं होगा। क्योंकि… जहां वोट की चोरी आम है, वहां जीतने वाला असली नहीं, बस ‘घोषित’ विजेता होता है। ये सिर्फ़ “राजनीति” नहीं…ये लोकतंत्र का ऑपरेशन है। और विपक्ष — बहुत देर से जागा है। अब सवाल ये है… क्या कांग्रेस और बाकी विपक्ष इस लड़ाई में जीत पाएंगे… या फिर भारत का लोकतंत्र बस किताबों में रह जाएगा?सोचिए… अगर आज आपकी आवाज़ दबाई गई, तो कल वोट भी आपका नहीं रहेगा, जिसकी मिसाल बिहार है।
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