एशिया कप 2025 T20 में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी नहीं
भारत ने एशिया कप 2025 के लिए अपनी टी20 टीम का ऐलान कर दिया है। टीम की कमान सूर्यकुमार यादव को सौंपी गई है, जबकि शुभमन गिल उपकप्तान बनाए गए हैं। टीम में रिंकू सिंह, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव और अन्य कई युवा चेहरे शामिल हैं। लेकिन इस टीम चयन ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है—क्योंकि इस 15 सदस्यीय टीम में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी शामिल नहीं किया गया।
बड़ा सवाल: मुस्लिम खिलाड़ियों को क्यों नज़रअंदाज़ किया गया? भारत की क्रिकेट परंपरा में मोहम्मद अजहरुद्दीन, इरफ़ान पठान, यूसुफ पठान, ज़हीर खान से लेकर मोहम्मद शमी और मोहम्मद कैफ़ तक मुस्लिम खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी है। मौजूदा दौर में मोहम्मद शमी भारत के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज़ों में गिने जाते हैं। लेकिन इस बार उनकी जगह तक पर सवाल खड़े किए गए हैं, जबकि उनका हालिया प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं। क्या यह मात्र संयोग है या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित रणनीति?
खेल का भगवाकरण’ – संयोग या साज़िश?:- टीम चयन हमेशा प्रदर्शन, फिटनेस और हालिया फॉर्म के आधार पर होना चाहिए। लेकिन जब पूरी टीम में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी मौजूद न हो, तो स्वाभाविक रूप से संदेह गहराता है कि कहीं चयन प्रक्रिया को भी राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग तो नहीं दिया जा रहा। कई खेल प्रेमियों का कहना है कि जैसे शिक्षा, नौकरियों और समाज के अन्य क्षेत्रों में हाशिए पर धकेलने की कोशिशें होती रही हैं, वैसे ही अब खेल के मैदान को भी ‘भगवा एजेंडे’ के लिए प्रयोग किया जा रहा है।
BCCI की वरिष्ठ राष्ट्रीय चयन समिति में पांच सदस्य शामिल हैं इसमें भी कोई मुस्लिम नहीं है
1. Ajit Agarkar (Chairperson) पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज़ और सफल क्रिकेटर।
2. Shiv Sunder Das पूर्व भारतीय ओपनिंग बल्लेबाज़ (Test और ODI में खेला)।
3. Subroto Banerjee पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज़ (ODI व टेस्ट दोनों में खेला)।
4. Sridharan Sharath पूर्व तमिलनाडु बल्लेबाज़, प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सक्रिय खिलाड़ी।
5. Ajay Ratra पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज़, भारतीय टीम में Test/ODI दोनों formats में खेलने का अनुभव।
वर्तमान चयन समिति के प्रमुख सदस्यों में किसी का स्पष्ट राजनीतिक या हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़ाव नज़र नहीं आता। ये सभी पूर्व क्रिकेटर हैं, जिन्होंने अपनी पहचान केवल खेल के माध्यम से बनाई है। फिर ये चयन किसके इशारे या दबाव में किया गया है ?
इसके पीछे कौन ताक़तें सक्रिय?:- क्रिकेट बोर्ड लंबे समय से राजनीतिक दबाव में काम करता रहा है। भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर पहले भी यह आरोप लगते रहे हैं कि वे हर क्षेत्र में ‘अपना रंग’ थोपना चाहते हैं। एशिया कप टीम चयन में मुस्लिम खिलाड़ियों की अनुपस्थिति से ये आरोप और प्रबल हो जाते हैं।
क्या अब क्रिकेट का बहिष्कार करेंगे मुस्लिम प्रशंसक?:- क्रिकेट भारत का धर्म माना जाता है। इसमें हर मज़हब, हर जाति और हर तबक़े के लोग अपनी भावनाएँ जोड़ते हैं। लेकिन अगर चयन प्रक्रिया में ही धार्मिक भेदभाव की बू आएगी, तो क्या मुस्लिम प्रशंसक इस खेल से दूरी बनाने पर मजबूर होंगे? क्या वे अब क्रिकेट का बहिष्कार करेंगे?
टीम इंडिया को “सभी की टीम” कहा जाता है, लेकिन जब उसमें किसी एक समुदाय की पूरी तरह अनुपस्थिति हो, तो सवाल उठना लाज़मी है। यह खेल को धर्म और राजनीति से ऊपर उठाने का समय है—वरना आने वाले कल में क्रिकेट भी उस ज़हरीले ध्रुवीकरण का शिकार हो जाएगा जो समाज को तोड़ रहा है।
भारत की क्रिकेट टीम का इतिहास देखें तो आज़ादी से लेकर अब तक लगभग हर दौर में मुस्लिम पृष्ठभूमि से खिलाड़ी टीम इंडिया का हिस्सा रहे हैं। आज़ादी से पहले (ब्रिटिश राज के दौर में) मोहम्मद निसार, अमरनाथ, वज़ीर अली, मोहम्मद अली आदि नाम भारत की शुरुआती टेस्ट टीमों में रहे। यानी शुरुआत से ही मुस्लिम खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट का हिस्सा रहे।
आज़ादी के बाद (1947–1980):- गुल मोहम्मद, अब्बास अली बेग, सैयद किरमानी, अब्बास अली, सलिम दुर्रानी जैसे खिलाड़ी लगातार शामिल रहे। लगभग हर सीरीज़ में मुस्लिम खिलाड़ी मौजूद थे।
1980–2000 का दौर:- मोहम्मद अज़हरुद्दीन (कप्तान) सैयद किरमानी जैसे नाम सामने आए। 90 के दशक में अजहरुद्दीन लंबे समय तक कप्तान रहे।
2000–2015:- ज़हीर खान, इरफ़ान पठान, युसुफ पठान, मुनाफ पटेल जैसे खिलाड़ी लगातार खेलते रहे।
2015–2020:- मोहम्मद शमी भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी का अहम चेहरा बने।
2021–2023:- मोहम्मद सिराज और शमी दोनों तेज़ गेंदबाज़ों के तौर पर टीम के नियमित सदस्य बने।
खेल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब 2025 एशिया कप T20 टीम में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी नहीं है। यह क्रिकेट इतिहास में बहुत दुर्लभ है कि इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए चुनी गई टीम में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी न हो।
2025 एशिया कप वाली स्थिति एक नया और विवादास्पद मोड़ हो सकता है।
असली सवाल यही है: क्या यह टीम इंडिया है, या फिर ‘एजेंडा इंडिया’?