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लंबे समय से, चुनावी निष्पक्षता के पैरोकारों, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों ने भारत की मतदाता सूची में अनियमितताओं की शिकायत की है। मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए जाने, डुप्लीकेट इंट्रीज और अचानक पंजीकरण में वृद्धि जैसी समस्याओं को लेकर निर्वाचन आयोग में कई शिकायतें दी गईं। कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) जैसे पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाले संगठनों ने आरटीआई के माध्यम से बार-बार जवाबदेही की कमी को उजागर किया लेकिन इसके बावजूद उन्हें ECI द्वारा लगातार नजरअंदाज किया गया (Mid-Day)।फिर भी, इन शुरुआती चेतावनियों को मामूली प्रशासनिक चूक या छोटे-मोटे तकनीकी दोष बताकर टाल…
यह जो रिपोर्ट आई है, वह किसी न्यूज़ चैनल की सनसनीखेज़ हेडलाइन नहीं बल्कि कड़वी सच्चाई का आईना है। सोचिए—देश के 643 मंत्रियों में से 302 मंत्री अपराधी हैं, और इनमें से 174 पर तो हत्या, अपहरण, महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध जैसे गंभीर आरोप हैं। सवाल ये है कि क्या ऐसे मंत्री “लोकसेवक” हैं या “अपराध जगत के ब्रांड एंबेसडर”? अपराधियों से सजी मंत्रिमंडलीय तस्वीर:- कुल मंत्रियों का लगभग 47% अपराधी! भाजपा – 336 मंत्रियों में से 136 पर आपराधिक मामले, जिनमें 88 पर गंभीर अपराध। कांग्रेस – 61 मंत्रियों में से 45 अपराधी। टीडीपी – 96% मंत्रियों पर आपराधिक…
image source : shutterstock.com कृष्ण प्रताप सिंह- गुरुकुलों के दौर की बात है, जब शिक्षक आम तौर पर गुरु कहलाते थे. खास तौर पर तो खैर, अभी भी कहलाते हैं. एक गुरुकुल में दीक्षांत के बाद गृहस्थाश्रम में प्रवेश की गुरुआज्ञा पा चुके छात्र अपने-अपने घर जाने लगे तो जानें क्यों, उनमें से एक को वह आज्ञा पर्याप्त नहीं लगी. वह फिर से गुरु के पास जा पहुंचा और उनका चरण स्पर्श करके निवेदन किया, ‘आशीर्वाद दीजिए गुरुवर!’ गुरु ने सायास उसे ऊपर से नीचे तक देखा, फिर पल भर कुछ सोचा और कहा, ‘नहीं-नहीं, अभी तुम्हारी शिक्षा पूरी नहीं…
लखीमपुर खीरी, यूपी के एक सरकारी स्कूल की छत पर कथित रूप से फ़िलिस्तीन का झंडा फहराया गया और देखते ही देखते पुलिस हरकत में आ गई। सात लोगों पर मुक़दमा, गिरफ़्तारियां, हिंदू संगठनों का हंगामा और पूरा माहौल ‘देशभक्ति बनाम गद्दारी’ के नैरेटिव में बदल दिया गया। लेकिन सवाल है – यही पुलिस, यही सरकार और यही हिंदुत्ववादी संगठन तब कहां थे जब यति नरसिंहानंद ने खुलेआम राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया था? जब एक कट्टरपंथी ने जमीन पर तिरंगा बनाकर उसके ऊपर भगवा झंडा गाड़ दिया था? उस समय न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई, न कोई गिरफ़्तारी,…
भारत की विदेश नीति में ढाई महीने के भीतर आया ये तेज़ यू-टर्न अब पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। जून 2025 में जब शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने ईरान पर इज़रायली हमलों की निंदा की थी, तब भारत ने उस बयान से खुद को अलग कर लिया था। लेकिन 1 सितंबर को तियानजिन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत ने वही काम किया, जिसकी उम्मीद कोई नहीं कर रहा था—भारत ने इज़रायल और अमेरिका दोनों की सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा वाले घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। भारत का दो टूक संदेश: अमेरिका-इज़रायल की दादागिरी नहीं…
राम पुनियानी- पिछले कुछ दशकों में एक नयी प्रवृत्ति उभरी है. हमारे देश के दक्षिणपंथी सत्ताधारी पौराणिक कथाओं को इस तरह पेश करने लगे हैं मानो वे सच हों. सार्वजनिक मंचों से ऐसे दावों की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा डॉक्टरों और देश को यह याद दिलाने के साथ हुई कि प्राचीन भारत में प्लास्टिक सर्जन रहे होंगे तभी हाथी के बच्चे का सिर भगवान गणेश को लगाया गया होगा!सारी दुनिया में पौराणिक कथाएं कल्पना की उड़ानों से भरी होती हैं. बचपन में जब हम उन्हें सुनते हैं तो वे हमें बहुत मनमोहक लगती हैं और हमेशा हमारी स्मृतियों में…
योगी के रामराज्य उत्तर प्रदेश के महराजगंज की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि हमारे समाज के नैतिक पतन और संवेदनहीनता का आईना है। सवाल यह है कि क्या हम इंसानियत से इतने खाली हो चुके हैं कि तीन मासूम बच्चों को अपने पिता की लाश के साथ घंटों भटकना पड़ा और किसी ने मदद के लिए हाथ तक नहीं बढ़ाया? बच्चे दर-बदर, समाज मौन:- 40 वर्षीय लवकुमार की मौत के बाद उनके तीन बच्चों ने रो-रोकर लोगों से अंतिम संस्कार की मदद मांगी। रिश्तेदारों ने मुँह मोड़ लिया। मोहल्ले के लोग तमाशबीन बने रहे। श्मशान और…
भारत की शिक्षा व्यवस्था पर लंबे समय से “भगवाकरण” के आरोप लगते रहे हैं। कभी पाठ्यपुस्तकों से मुग़ल इतिहास हटाने का मुद्दा, कभी विज्ञान की किताबों में पौराणिक प्रसंग ठूँसने का प्रयास। लेकिन अब मामला और गंभीर है—सीधे उच्च शिक्षा को हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनाने का। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने जो लर्निंग आउटकम्स आधारित करिकुलम फ्रेमवर्क (LOCF) का मसौदा पेश किया है, उसने देश की सबसे प्रगतिशील राज्य सरकारों में से एक—केरल—को खुलकर मोर्चा लेने पर मजबूर कर दिया है। केरल का सख़्त ऐलान: “यह शिक्षा नहीं, विचारधारा का थोपना है”:- केरल सरकार ने मसौदे को सीधी चुनौती देते…
भारत के स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन की त्रासदी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस ने एनसीईआरटी द्वारा जारी किए गए ‘विभाजन विभीषिका’ मॉड्यूल को खुले तौर पर सांप्रदायिक नफ़रत फैलाने वाला दस्तावेज़ करार दिया है। यह सिर्फ एक शैक्षिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के दिमाग में नफ़रत का बीज बोने का राजनीतिक हथकंडा है। इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की साज़िश इस मॉड्यूल में: कांग्रेस और मोहम्मद अली जिन्ना को विभाजन का गुनहगार बताया गया। अंग्रेजों को “भारत को एकजुट रखने की कोशिश करने वाला” करार दिया गया। हिंदू महासभा और सावरकर की टू नेशन…
☑️ जनहानि – शून्य (कोई मृत्यु नहीं) ☑️ सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन –थोडगा, तहसील अहमदपुर – पुल पर पानी बहने के कारण और 4 घरों में पानी घुसने से वहाँ के नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। बेलसंगवी, तहसील निलंगा – कुछ लोगों को लाली गांव में शिफ्ट किया जा रहा है। तिरु प्रकल्प से पानी का विसर्ग (रिलीज़) बढ़ने से इस गांव का संपर्क टूटने की आशंका है। हासरणी, तहसील अहमदपुर – 30 से 40 घरों में पानी घुसा, परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। ☑️ खोज एवं बचाव कार्य –शिरूर अनंतपाल में नदी के…