18 मार्च को लातूर की सड़कों पर इतिहास लिखा गया…बारिश में भी हज़ारों लोग… हाथों में तिरंगा, होठों पर सन्नाटा और आँखों में न्याय की ज्वाला लेकर निकले…
यह था कुरैशी समाज के साथ किसान संगठनों का भव्य मौन मोर्चा!
गौरक्षा के नाम पर किसानों और कुरैशी समाज पर हो रहे अत्याचार…
लूटपाट, मारपीट, और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं के ख़िलाफ़ ज़िले के किसान संगठनों के साथ कुरैशी समाज ने आज अपना ग़ुस्सा मौन रहकर भी साफ़-साफ़ जता दिया।मोर्चे में शामिल नागरिकों के हाथों में तिरंगा और अपनी मांगों वाले पोस्टर थे। “हमें न्याय चाहिए” और “गोमाता की रक्षा होनी ही चाहिए” जैसे नारे पूरे शहर में गूंजे। बारिश से भीगे कपड़े, लेकिन आँखों में हक़ के लिए जलती ज्वाला, इस मौन मोर्चे ने प्रशासन को यह साफ संदेश दिया कि कुरैशी समाज और किसान संगठनों ने कहा अब और अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। हक़ की लड़ाई सड़क से उठकर सत्ता के गलियारों तक गूंजेगी। कथित गौरक्षकों के नाम पर किसानों और कुरैशी समाज पर हो रहे अत्याचार – पशुओं की ढुलाई में बाधा, लूटपाट, मारपीट और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से समाज में रोष फूट पड़ा है। इस अन्याय के विरोध में कुरैशी समाज ने पिछले एक महीने से पशुओं की ख़रीद-बिक्री और कटाई पूरी तरह बंद कर रखी है। इन्हीं हालातों के बीच आज का यह ऐतिहासिक मौन मोर्चा आयोजित किया गया था।
मोर्चे की शुरुआत गंज गोलाई में स्थित साहित्य सम्राट अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर हुई। इसके बाद जुलूस गांधी चौक, हनुमान चौक, मध्यवर्ती बस स्टैंड होते हुए तहसील कार्यालय पहुंचा। मार्ग में महात्मा गांधी, जोतीराव फुले और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण किया गया।
मोर्चे के दौरान शासन के समक्ष कई अहम मांगें रखी गईं:
१). गौरक्षक के नाम पर गुंडों द्वारा किसानों और कुरैशी समाज पर हो रहे अत्याचार तुरंत रोके जाएं।
२). सभी गोशालाओं की उच्च स्तरीय जांच हो।
३). मुस्लिम खातीक आर्थिक विकास महामंडल की स्थापना की जाए।
४). पशु ढुलाई के लिए वाहन कानून में संशोधन किया जाए।
५). लातूर ज़िले के तालुका, नगर परिषद और ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्लॉटर हाउस बनाए जाएं।
६). किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिले।
७). किसानों, व्यापारियों, कुरैशी समाज और वाहन चालकों पर दर्ज केस वापस लिए जाएं।
८). मॉब लिंचिंग के शिकार परिवारों को मुआवज़ा दिया जाए।
इस मंच से साफ़- साफ कहा गया कि –हम अन्याय अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र के रास्ते से लड़ी जाएगी। यह मौन मोर्चा सिर्फ़ एक जुलूस नहीं, यह है चेतावनी है ! अगर न्याय नहीं मिला तो यह आवाज़ अब और बुलंद होगी। लातूर की सड़कों से निकली यह गूंज अब पूरे महाराष्ट्र और देश तक जाएगी!
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के प्रदेशाध्यक्ष राजीव कसबे, कार्याध्यक्ष सत्तार पटेल, कोअर कमिटी अध्यक्ष राजेंद्र मोरे और ज़िलाध्यक्ष अरुणदादा कुलकर्णी ने साफ कहा कि “कथित गौरक्षक जानबूझकर किसानों और कुरैशी समाज को परेशान कर रहे हैं। अगर प्रशासन ने तत्काल कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तीव्र होगा।”
ऑल इंडिया जमीअतुल कुरैश महाराष्ट्र राज्य के उपाध्यक्ष अफ़ज़ल कुरैशी ने प्रस्तावना रखते हुए समाज पर हो रहे अन्याय की पूरी हक़ीक़त उजागर की। ज़िला अध्यक्ष हाजी इब्राहीम कुरैशी, उपाध्यक्ष फ़य्यूम कुरैशी, सचिव अफसर कुरैशी समेत स्वाभिमानी शेतकरी संगठन और संविधान सेवा संघ के कई प्रमुख पदाधिकारी इस मोर्चे में मौजूद रहे।आज लातूर ने साबित कर दिया कि बारिश हो या आँधी, जब हक़ के लड़ाई की बात आती है तो कोई ताक़त नहीं रोक सकती। लातूर का यह मौन मोर्चा केवल एक निवेदन नहीं, बल्कि अन्याय के ख़िलाफ़ जनक्रांति की शुरुआत है। आज लातूर में गूंजा यह स्वर अब पूरे महाराष्ट्र में सुनाई देगा।