Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

क्या शिक्षा मंत्रालय को नैतिक नेतृत्व चाहिए या सिर्फ़ राजनीतिक वफ़ादारी?

July 31, 2026

जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?

July 31, 2026

वक्फ की ज़मीन पर कब्ज़ा अब आसान नहीं! लातूर में भूमाफियाओं को वक्फ बोर्ड की खुली चेतावनी

July 31, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • क्या शिक्षा मंत्रालय को नैतिक नेतृत्व चाहिए या सिर्फ़ राजनीतिक वफ़ादारी?
  • जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?
  • वक्फ की ज़मीन पर कब्ज़ा अब आसान नहीं! लातूर में भूमाफियाओं को वक्फ बोर्ड की खुली चेतावनी
  • अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
  • गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
  • मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
  • बिना नेम प्लेट और नंबर वाले ये लोग कौन हैं? पुलिस की वर्दी में छिपे चेहरों का सच सामने आना चाहिए
  • सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Friday, July 31
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»भारत

खामोशी का नतीजा -‘द केरला स्टोरी 2′

adminBy adminMarch 10, 2026 भारत No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

केरल उच्च न्यायालय द्वारा ‘द केरला स्टोरी 2 – गोज़ बियॉन्ड’ की रिलीज़ पर पंद्रह दिनों की अंतरिम रोक सिर्फ़ एक फिल्म पर लगी कानूनी अड़चन नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल की तरफ इशारा करती है जो आज भारतीय समाज के सामने खड़ा है। क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी राज्य, समुदाय या धर्म की छवि को धूमिल करने की खुली छूट दी जा सकती है?

न्यायमूर्ति बी. कुरियन थॉमस की मौखिक टिप्पणियों से स्पष्ट है कि अदालत प्रथम दृष्टया इस बात से संतुष्ट नहीं थी कि Central Board of Film Certification (सीबीएफसी) ने फिल्म को प्रमाणपत्र देते समय पर्याप्त सावधानी बरती। जब अदालत स्वयं यह सवाल उठाती है कि इतनी संवेदनशील विषय-वस्तु वाली फिल्म को ‘ए’ के बजाय ‘यूए’ प्रमाणपत्र कैसे दिया गया, तो यह केवल तकनीकी आपत्ति नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता का संकेत है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

 नफ़रत की बुनियाद पर बनी फिल्मों का भविष्य क्या?

देश में पिछले कुछ वर्षों में एक प्रवृत्ति उभरकर सामने आई है कि किसी एक समुदाय या धर्म को केंद्र में रखकर सनसनीखेज़ कथानक गढ़ना, उन्हें “सच्ची घटनाओं से प्रेरित” बताना और फिर उसी के आधार पर व्यापक प्रचार करना। यह प्रवृत्ति न केवल समाज में अविश्वास पैदा करती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी चोट पहुंचाती है।

साफ़ तौर पर कहा जाना चाहिए कि किसी भी जाति या धर्म के खिलाफ नफ़रत को बढ़ावा देने वाली फिल्मों पर प्रतिबंध लगना चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्णतः निरंकुश अधिकार नहीं है; भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(2) इस पर “उचित प्रतिबंध” की बात करता है। विशेषकर सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता के हित में।

अगर कहानी झूठी हो तो?

यह मामला और गंभीर तब हो जाता है जब आरोप यह हो कि फिल्म का कथानक तथ्यों पर आधारित नहीं, बल्कि अतिरंजित या भ्रामक है। यदि कोई निर्माता जानबूझकर झूठी कहानियाँ गढ़कर उन्हें “सच्चाई” के रूप में पेश करता है और उससे किसी राज्य या समुदाय की छवि को नुकसान पहुँचता है, तो यह केवल रचनात्मक स्वतंत्रता का प्रयोग नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास के साथ छल है। ऐसे मामलों में केवल अस्थायी रोक या औपचारिक आपत्ति पर्याप्त नहीं हो सकती।

झूठे आख्यान गढ़कर नफ़रत फैलाने वाले निर्माताओं पर सख़्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर स्थायी रोक भी लगनी चाहिए। यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई, तो कल को कोई भी समूह अपने राजनीतिक या वैचारिक लाभ के लिए काल्पनिक कहानियाँ गढ़कर समाज को बाँटने का औज़ार बना लेगा।

शीर्षक और प्रतीकात्मक राजनीति

याचिकाओं में यह भी तर्क दिया गया है कि फिल्म के शीर्षक में ‘केरल’ शब्द का इस्तेमाल राज्य को सामूहिक रूप से कटघरे में खड़ा करता है। सवाल यह है कि यदि कथित सीक्वल की कहानी का प्रत्यक्ष संबंध केरल से नहीं है, तो फिर राज्य का नाम शीर्षक में क्यों? क्या यह सिर्फ़ बाज़ार और विवाद से लाभ कमाने की रणनीति है? जब दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तथाकथित “पीड़िताओं” में एक भी महिला केरल से नहीं थी, तो यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं राज्य की पहचान का इस्तेमाल एक प्रतीकात्मक दुश्मन गढ़ने के लिए तो नहीं किया जा रहा।

सेंसर बोर्ड की भूमिका पर पुनर्विचार

सीबीएफसी का काम केवल औपचारिक प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन करना भी है। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया यह लगे कि प्रमाणन प्रक्रिया में पर्याप्त विवेक का प्रयोग नहीं हुआ, तो यह संस्थागत जवाबदेही का प्रश्न बन जाता है। क्या बोर्ड राजनीतिक दबाव, बाज़ार या किसी विचारधारा से प्रभावित हुए बिना निष्पक्ष निर्णय ले पा रहा है? यह प्रश्न अब टालने योग्य नहीं है।

खामोशी की कीमत

इतिहास गवाह है कि झूठ को बार-बार दोहराया जाए तो वह धीरे-धीरे “सच” जैसा प्रतीत होने लगता है। यदि समाज और संस्थाएँ इस तरह की प्रवृत्तियों पर चुप्पी साध लें, तो झूठी कहानियाँ गढ़कर नफ़रत फैलाने का सिलसिला कभी नहीं रुकेगा। यह केवल एक राज्य या एक समुदाय का सवाल नहीं—यह लोकतांत्रिक भारत की बहुलतावादी आत्मा का सवाल है। अदालत का यह अंतरिम आदेश अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण संदेश जरूर देता है। सिनेमा की शक्ति अपार है, और जितनी बड़ी शक्ति, उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी।

अब निगाहें अंतिम सुनवाई पर हैं, लेकिन उससे भी अधिक ज़रूरी है कि समाज इस बहस को केवल एक फिल्म तक सीमित न रखे, बल्कि यह तय करे कि हम किस तरह के सांस्कृतिक आख्यानों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। सच और संवेदनशीलता पर आधारित, या सनसनी और विभाजन पर टिके हुए।

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?

मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है

जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है

मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है

विश्वविद्यालय शिक्षा के केंद्र हैं या वैचारिक प्रयोगशाला?

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • क्या शिक्षा मंत्रालय को नैतिक नेतृत्व चाहिए या सिर्फ़ राजनीतिक वफ़ादारी?
  • जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?
  • वक्फ की ज़मीन पर कब्ज़ा अब आसान नहीं! लातूर में भूमाफियाओं को वक्फ बोर्ड की खुली चेतावनी
  • अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
  • गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility