वैसे तो भाजपा राज में शायद ही कोई दिन ऐसा गुज़रा होगा जिस दिन मीडिया या फिर सोशल मीडिया पर हिन्दू- मुस्लिम की राजनीती न नज़र आयी हो क्योंकि भाजपा और आरएसएस की खुराक ही हिन्दू मुस्लिम हैं। अगर देश से हिन्दू -मुस्लिम की राजनीती ख़त्म कर दी गयी तो भाजपा और आरएसएस जीवित ही नहीं रह सकते। इस वक़्त भाजपा और आरएसएस महाराष्ट्र में दो विषयों को भुनाकर खूब हिन्दू- मुस्लिम कर रहे हैं, पहला है उद्धव ठाकरी की शिवसेना से परभणी का मुस्लिम महापौर बनाया जाना और दूसरा मालेगांव के उपमहापौर के ऑफिस में लगी टीपू सुल्तान की तस्वीर।
पहले बात करते हैं उद्धव ठाकरी की शिवसेना के मुस्लिम महापौर की, हालांकि ये कोई विरोध का मामला है ही नहीं, या तो ये मूर्खता है या फिर राज्य की जनता का ध्यान भटकाने की एक सोची समझी साज़िश और चाल है, वो फिर चुनावों के नतीजों से ध्यान भटकाना हो या फिर अजित पवार विमान हादसे से, क्या आपको नहीं लगता कि अगर अजित पवार विमान हादसा साज़िश नहीं थी तो स्वतंत्र जांच क्यों नहीं हुई? ममता बनर्जी के बयान पर क्यों भड़क उठे फडणवीस ? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
हादसे को चंद घंटे भी नहीं गुज़रे बिना जांच के शरद पवार को कैसे पता चला कि ये हादसा था जबकि वो तो दिल्ली में थे ? आखरी सवाल अभी दादा के अर्थी की आग ठंडी भी नहीं हुई थी फिर किस बात की जल्दी थी जो आनन फानन में उनकी पत्नी को उपमुख्य मंत्री पद की सपथ भी दिलाई गयी ? सिर्फ मराठों का ही नहीं राज्य का और राज्य के सभी धर्मों, ज़ातों का चहिता चला गया उसकी चिंता और चर्चा नहीं लेकिन उद्धव ठाकरी की शिवसेना ने एक निष्ठावन मराठी मुस्लिम को महापौर क्या बना दिया तो तूफान आगया, क्या परभणी का सय्यद इक़बाल कोई आतंकवादी है? देशद्रोही है ?
या अंग्रेज़ों का मुखबिर और उनके तलवे चाटने वाला है ? या देश के किसी महान व्यक्ति का हत्यारा है ? या बलात्कारी है ? या कोई तड़ीपार है ? नहीं ना तो फिर क्या भाजपा के पास इससे भी बड़ा जुर्म है मुसलमान होना ? अब बढ़ते हैं मालेगांव के उपमहापौर के ऑफिस में लगी टीपू सुल्तान की तस्वीर मामले पर, सवाल उठता है कि क्या टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाना कानून जुर्म है ? अगर जुर्म है तो फडणवीस सरकार उस कानून के तहत मालेगांव के उपमहापौर पर करवाई करे।
इसी तरह महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने बुलढाना के एक कार्यक्रम में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य का जो विचार दिया और जैसा शौर्य दिखाया, उसी राह पर बाद में टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। टीपू सुल्तान भी बहादुरी के प्रतीक योद्धा थे, इसलिए शौर्य के मामले में उन्हें शिवाजी महाराज के बराबर माना जा सकता है। इसमें क्या गलत है, टीपू सुल्तान इसी देश में जन्मे, इसी देश के लिए लड़े, उनकी जंग ना तो किसी इस्लामी देश के लिए थी और ना ही उनकी सेना में सिर्फ मुस्लिम थे फिर भाजपा और आरएसएस को उनसे इतनी नफरत क्यूं?
मुख्य मंत्री जैसे संविधानिक पद पर बैठ कर देश के लिए अंग्रेज़ों से लड़कर शहीद होने वाले राजा के खिलाफ बयान देते हुए देवेंद्र फडणवीस को शर्म आनी चाहिए। जबसे भाजपा सत्ता में आयी है देश के इतिहास को मिटाने की कोशिश में लगी हुयी है, देश में सभी राजाओं और शासकों ने अपने तख़्त और शासन के लिए जंगें लड़ीं फिर चाहे वो हिन्दू हों या मुस्लिम, अगर उनकी जंगें धर्म के लिए होतीं तो हिन्दू शासकों के साथ मुस्लिम और मुस्लिम शासकों के साथ हिन्दू सैनिक कभी न होते।
भाजपा और आरएसएस सिर्फ मुग़लों का ही इतिहास मिटाना नहीं चाहती बल्कि देश के लिए लड़ने वाले हर मुस्लिम स्वतंत्र सेनानी से लेकर देश के मिज़ाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम तक का नाम इतिहास से मिटाना चाहती है। कुछ दिन पहले एक भगवाधारी ने देश के मिज़ाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम को देशद्रोही और जिहादी बताया था लेकिन उस पर कोई करवाई नहीं हुई। एक महीना पहले इसी फडणवीस सरकार ने स्कूलों में मनाई जाने वाली महापुरुषों की जयंतियों की सूची से देश के पहले शिक्षण मंत्री और स्वतंत्र सेनानी मौलाना अबुलकलाम आज़ाद का नाम हटा कर सावरकर का नाम जोड़ दिया है।