लखीमपुर खीरी, यूपी के एक सरकारी स्कूल की छत पर कथित रूप से फ़िलिस्तीन का झंडा फहराया गया और देखते ही देखते पुलिस हरकत में आ गई। सात लोगों पर मुक़दमा, गिरफ़्तारियां, हिंदू संगठनों का हंगामा और पूरा माहौल ‘देशभक्ति बनाम गद्दारी’ के नैरेटिव में बदल दिया गया।
लेकिन सवाल है – यही पुलिस, यही सरकार और यही हिंदुत्ववादी संगठन तब कहां थे जब यति नरसिंहानंद ने खुलेआम राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया था? जब एक कट्टरपंथी ने जमीन पर तिरंगा बनाकर उसके ऊपर भगवा झंडा गाड़ दिया था? उस समय न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई, न कोई गिरफ़्तारी, न कोई हिंदू संगठन ‘राष्ट्रध्वज का अपमान’ बताकर सड़क पर उतरा। यानि साफ़ है कि अगर तिरंगे का अपमान कोई हिंदुत्ववादी करे तो अपराध नहीं, लेकिन फ़िलिस्तीन का झंडा फहराना देशद्रोह बन जाता है।
तिरंगे की इज़्ज़त सिर्फ़ ‘चुनिंदा हालातों’ में?:- भारतीय संविधान और कानून के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज का अपमान सबसे बड़ा अपराध है। मगर असलियत ये है कि तिरंगे की इज़्ज़त अब पूरी तरह से राजनीतिक सुविधा पर निर्भर कर चुकी है।
यति नरसिंहानंद खुलेआम मंच से तिरंगे को अपमानित करता है – कार्रवाई शून्य।
हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता ज़मीन पर तिरंगा बनाकर उस पर भगवा गाड़ते हैं – कार्रवाई शून्य। मगर एक गांव में अगर फ़िलिस्तीन का झंडा लहर जाए तो – पुलिस, एसपी, हिंदू संगठन सब सक्रिय हो जाते हैं।
क्या ये दोहरा मापदंड नहीं?:- फ़िलिस्तीन झंडे से इतना डर क्यों? भारत ने खुद फ़िलिस्तीन को मान्यता दी है। भारत हर साल फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद के लिए करोड़ों की सहायता करता है। भारत की विदेश नीति में फ़िलिस्तीन का समर्थन आधिकारिक रूप से शामिल है। तो फिर सवाल उठता है –अगर फ़िलिस्तीन का झंडा लहराना ‘देशद्रोह’ है, तो क्या भारत सरकार खुद ‘देशद्रोही’ है जो हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर फ़िलिस्तीन का समर्थन करती है? असलियत ये है कि बीजेपी और उसके संगठन इस झंडे को मुसलमानों से जोड़कर मुसलमानों को ‘गद्दार’ साबित करने की राजनीति करना चाहते हैं।
असली गद्दार कौन?:-इतिहास गवाह है – देशद्रोह, जासूसी, आतंकी हमलों में सबसे ज्यादा आरोपी हिंदू पाए गए हैं। फिर भी मुसलमानों को ही ‘गद्दार’ कहने का प्रोपेगैंडा लगातार फैलाया जाता है। आज अगर कोई बच्चा फ़िलिस्तीन झंडा उठा ले तो उसे गद्दार बता दिया जाता है, मगर जो लोग खुलेआम तिरंगे का अपमान करते हैं उन्हें ‘देशभक्त साधु-संत’ बताकर छोड़ दिया जाता है।
नतीजा:- यूपी की घटना बताती है कि यहां झंडों पर नहीं, धर्म पर राजनीति हो रही है।
तिरंगे की आड़ में हिंदुत्ववादी अपना एजेंडा चला रहे हैं और मुसलमानों को हर हाल में संदिग्ध, गद्दार और अपराधी साबित किया जा रहा है।
सवाल ये है –क्या तिरंगे की असली रक्षा वही करेगा जो उसे जमीन पर अपमानित करता है? या फिर वो, जो फ़िलिस्तीन का झंडा उठाकर ग़ज़ा के मासूमों के साथ इंसानियत की आवाज़ बुलंद करता है? हकीकत ये है कि तिरंगा अब सत्ताधारियों के लिए सिर्फ़ चुनावी हथियार है, न कि राष्ट्रीय सम्मान।