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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने देश की राजनीति में उतनी हलचल पैदा नहीं की जितनी उनसे जुड़े विवादों ने की है। चुनावी नतीजे आते ही विपक्ष, कई मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, चुनाव पर्यवेक्षक और नागरिक समूह—सभी ने एक स्वर में जिस तरह सवाल उठाने शुरू किए, उससे यह साफ है कि यह मुद्दा सिर्फ हार-जीत का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसे का है।
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एक्ज़िट पोल एक दिशा में तो नतीजे दूसरी दिशा में
जब लगभग सभी बड़े एक्ज़िट पोल बिहार में INDIA गठबंधन को बढ़त दिखा रहे थे, तब अंतिम परिणामों में विपरीत तस्वीर सामने आई। कई मामलों में अंतर इतना बड़ा था कि राजनीतिक गलियारों और मीडिया के बीच पहली ही रात यह चर्चा छिड़ गई—क्या सिर्फ अनुमान की चूक थी या कहानी कहीं और बदली? यह पहली बार नहीं है। महाराष्ट्र 2019 और 2024 में भी ऐसी ही असमानता देखने को मिली थी। यहाँ भी कई सीटों पर गिनती के दौरान ईवीएम सुरक्षा, बिजली कटौती, CCTV फीड बंद होने जैसी बातें चर्चा में आई थीं। बिहार में अब वही आरोप दोहराए जा रहे हैं।
CCTV बंद, स्ट्रॉन्ग-रूम की गतिविधियाँ और संदिग्ध गाड़ियाँ
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा विवाद स्ट्रॉन्ग-रूम सुरक्षा और मतगणना केंद्रों से जुड़े हैं। विपक्ष और कुछ स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:
1. RJD ने दावा किया कि नालंदा में स्ट्रॉन्ग-रूम के CCTV अचानक 30 मिनट तक बंद रहे। चुनाव आयोग को शिकायत भेजी गई, पर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला।
2. महनार से एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें स्ट्रॉन्ग-रूम के बाहर CCTV फीड बंद दिखी। विपक्ष का आरोप है कि “फुटेज बंद होने के दौरान कौन अंदर गया, कौन बाहर आया—कोई रिकॉर्ड नहीं।”
3. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मतगणना से ठीक पहले हाजीपुर में CCTV कैमरे क्रमवार बंद हुए और उसी दौरान कई गाड़ियाँ अंदर-बाहर जाती दिखीं।
4. RJD ने आरोप लगाया कि सासाराम (रोहतास) में रात में एक ट्रक काउंटिंग सेंटर में दाखिल हुआ, जिसमें “EVM जैसी पेटियाँ” थीं। प्रशासन ने इसे “रूटीन सामान” कहा, लेकिन जवाब से विवाद शांत नहीं हुआ। ये आरोप प्रमाणित नहीं हैं, लेकिन जिस पैमाने पर उठाए गए हैं, उसने पारदर्शिता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
VVPAT पर्चियों का सड़क पर मिलना
समस्तीपुर में VVPAT स्लिप्स सड़क पर मिलने की घटना ने विवाद को और गहरा कर दिया। कांग्रेस और RJD ने इसे “चुनाव आयोग की लापरवाही” और “मतदान प्रक्रिया के साथ खिलवाड़” करार दिया। चुनाव आयोग ने जांच का आश्वासन दिया, पर विपक्ष इसे पर्याप्त नहीं मान रहा।
तेजस्वी यादव का बड़ा आरोप
तेजस्वी यादव ने मतगणना से ठीक पहले गंभीर आरोप लगाया कि “अधिकारियों को दिल्ली से विशेष निर्देश जा रहे हैं।” हालाँकि आयोग ने इसे “आधारहीन” कहा, लेकिन राजनीति में यह बयान एक नई बहस का केंद्र बन गया।
EVM पर भरोसा कैसे बने?
विपक्ष का तर्क साफ है, जब तक चुनाव की हर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र पर चोट होती रहेगी।
मुख्य मांगें
सभी सीटों पर VVPAT की 100% मिलान जांच। काउंटिंग सेंटर्स की CCTV फुटेज सार्वजनिक की जाए। मतगणना प्रक्रिया का लाइव प्रसारण। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच। यह पहली बार है कि विपक्ष के एक बड़े हिस्से ने कहा है कि “अगर पारदर्शिता नहीं बढ़ती, तो चुनाव में हिस्सा न लेने तक पर विचार करना पड़ेगा।”
क्या लोकतंत्र की नींव हिल रही है?
बिहार का विवाद दरअसल एक गहरी चिंता की ओर संकेत करता है, भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनावों पर भरोसा ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। अगर नागरिकों के मन में यह भरोसा डगमगाए कि उनका वोट सही जगह गया भी या नहीं, तो लोकतंत्र का असली संकट वहीं से शुरू होता है। आज सवाल EVM का नहीं- विश्वास का है। आज मुद्दा विरोध का नहीं- पारदर्शिता का है। आज लड़ाई सीटों की नहीं- संविधान पर विश्वास की है।
सवाल पूछना लोकतंत्र का पहला कर्तव्य है
चुनाव किसी एक दल, संगठन या विचारधारा के नहीं होते; चुनाव पूरे राष्ट्र की सबसे सामूहिक प्रक्रिया है। अगर इसमें एक भी दरार दिखती है, तो हर नागरिक का अधिकार ही नहीं कर्तव्य भी है कि वह सवाल पूछे।
बिहार के चुनाव नतीजों ने वही सवाल फिर उठा दिए हैं
क्या हमारी चुनावी प्रणाली समय के साथ पारदर्शिता खो रही है? क्या EVM पर भरोसा अब भी उतना ही मजबूत है? और अगर नहीं, तो उसे मजबूत बनाने की ज़िम्मेदारी किसकी है? जब तक जवाब साफ नहीं होंगे, तब तक लोकतंत्र सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।
अगर लोकतंत्र बचाना है तो EVM हटाओ! बैलेट पेपर वापस लाओ!” INDIA गठबंधन को वैसे भी 10 प्रतिशत से जयदा सीटें नहीं मिल रहीं हैं लिहाज़ा विपक्ष मजबूत तरीके से बैलेट पेपर की मांग करे अगर चुनाव आयोग न माने जैसा कि अनुमान है हरगीज नाहीं मानेगा तो चुनाव का बहिष्कार करदे, ‘जब तक बैलेट पेपर नहीं आता, तब तक चुनाव का बहिष्कार करे !’चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ही ना ले. ताकि पूरा देश समझ सके- आखिर बैलेट पेपर से चुनाव आयोग और भाजपा को इतना डर क्यों लगता है?”- जय लोकतंत्र
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