Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?

April 16, 2026

सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल

April 16, 2026

स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?

April 15, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • 193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?
  • सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल
  • स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
  • सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग
  • सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?
  • मौ. अब्दुल्लाह सालिम चतुर्वेदी के गिरफ़्तारी का राज़ ?
  • निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
  • रामनवमी, उत्सव से टकराव तक: बदलता सामाजिक माहौल और राजनीतिक संदर्भ
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Friday, April 17
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»एलान विशेष

क्या बिहार चुनाव के नतीजे वही हैं जो दिख रहे हैं ?

adminBy adminNovember 15, 2025 एलान विशेष No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
बिहार चुनाव
बिहार चुनाव
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

एनडीए की जीत और उठते सवाल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आए हैं और उनमें एक मजबूत एनडीए जीत दिख रही है। लेकिन कई
विश्लेषकों, विपक्षी पार्टियों और नागरिकों के बीच यह गहरी चिंता है कि इन नतीजों और exit-poll के अनुमानों में
बड़ा फर्क नज़र आरहा है, और इस दूरी को देखते हुए लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।


Exit-poll अनुमान vs वास्तविक नतीजे

कई exit-polls ने पहले ही एनडीए को स्पष्ट बहुमत देने का अनुमान लगाया था। लेकिन विपक्ष और विश्लेषक यह तर्क
दे रहे हैं कि नतीजे और अनुमान के बीच “कहानी में कुछ गड़बड़ है”:

उदाहरण के लिए, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि RJD सहित विपक्ष ने “वोट चोरी” और
गिनती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की संभावना जताई है।

यह नमूना उस व्यापक विश्वास का प्रतीक है कि सिर्फ exit-poll गलत नहीं थे, बल्कि पूरे चुनावी यंत्र में गड़बड़ है।


धोखाधड़ी और ईवीएम में गड़बड़ी

CCTV गैप और स्ट्रांग रूम संदिग्धताएँ

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़, महागठबंधन ने यह दावा किया है कि गिनती केंद्रों में CCTV बंद हो गए, और
“अनधिकृत” वाहनों को प्रवेश मिला।

EVM त्रुटियाँ और झड़पें

पटना प्रेस से पता चलता है कि मतदान की शुरुआत में कुछ बूथों पर EVM त्रुटियां और स्थानीय झड़पों की खबरें भी
आई हैं। याद रहे कि बिलकुल इसी तरह का मामला महाराष्ट्र विधान सभा चुनावों में भी देखा गया था।

मतदाता सूची में हेरफेर (Voter list manipulation)

विपक्ष ने दावा किया कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर
हेरफेर हुआ। 6 मिलियन (60 लाख) नाम हटाए गए हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है
और कहा है कि वह निष्पक्ष है।

EVM बैलेट पेपर में नया बदलाव

इसके अलावा, चुनाव आयोग ने EVM बैलेट पेपर में बदलाव किया है: इस बार उनका बैलेट पेपर पर रंगीन फोटो होगा,
जो ओहदे और पारदर्शिता बढ़ाने का एक कदम माना जा रहा है।


महाराष्ट्र चुनाव का उदाहरण और बढ़ती चिंताएँ

जैसा कि महाराष्ट्र में भी चुनावों के बाद कुछ इलाकों में धांधली की खबरें आई थीं — और इससे EVM और चुनावी
पारदर्शिता पर सार्वजनिक अविश्वास बढ़ा था। यह डर बिहार में भी दोहराया जा रहा है: कि यदि गिनती या मशीनों
पर भरोसा नहीं है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की नींव हिल सकती है।

विपक्ष और नागरिक समुदाय अब एक मजबूत मांग उठा रहे हैं कि EVM हटाकर फिर से बैलेट पेपर पर चुनाव हों
ताकि वोट की गिनती में पारदर्शिता बढ़े और लोगों का विश्वास लौटे लेकिन बीजेपी सरकार इसपे राज़ी नहीं है, क्यों ?


लोकतंत्र की रक्षा: चुनौतियाँ और समाधान

यदि लोकतंत्र को बचाना है, तो विपक्ष और राष्ट्रीय स्तर पर India गठबंधन और अन्य दलों को एकजुट होकर EVM के
बजाय पेपर बैलेट की मांग करनी चाहिए।

अगर बीजेपी इसपर राज़ी न हो — ज़ाहिर है अगर वो evm की बदौलत ही सत्ता पर काबिज़ है — तो कभी नहीं चाहेगी कि
बैलेट पेपर से चुनाव हों। लिहाज़ा विपक्ष “चुनाव बहिष्कार” कर दे तब तक जब तक बैलेट पेपर पर चुनाव न हो जाए।
यह एक जोखिम भरी रणनीति हो सकती है लेकिन इसके अलावा कोई रास्ता नज़र नहीं आता लोकतंत्र को बचाने का।

चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की जरूरत

साथ ही चुनाव आयोग (ECI) पर दबाव डाला जाना चाहिए कि वह:

  • वर्तमान गिनती की स्वतंत्र समीक्षा कराए।
  • CCTV निगरानी, स्ट्रांग रूम सुरक्षा जैसी कमजोरियों को दूर करे।

नागरिक समाज और मीडिया की भूमिका

नागरिकों, विपक्षी दलों और गैर गोदी मीडिया को मिलकर “लोकतंत्र-सुरक्षा अभियानों” (democracy watchdog campaigns)
को चलाना चाहिए ताकि चुनावी पारदर्शिता पर लगातार ध्यान रहे।


निष्कर्ष: भरोसे का संकट

बिहार में exit-poll और वास्तविक नतीजों के बीच का बड़ा अंतर, साथ ही धोखाधड़ी के आरोप, यह संकेत देते हैं कि
लोकतंत्र में भरोसे का संकट है।

यदि यह विश्वास संकट नहीं सुलझा तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर तो हो चुकी हैं अब वो ढह जाएगा। सक्रिय नागरिकों,
विपक्षी दलों और स्वतंत्र संस्थानों को मिलकर इसे मजबूती देनी होगा।

यह समय सिर्फ राजनीतिक जीत-हार का नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली की रक्षा का है। यदि विपक्ष, जनता और
संस्थान साथ न आएं, तो भविष्य में हर चुनाव में इसी तरह की शंकाएं और कथित धांधलियाँ उभर सकती हैं।

Also Read: बिहार में चुनाव जीतने वाले मुस्लिम उम्मीदवार

democracy watchdog campaigns EVM विवाद EVM हटाओ आंदोलन exit poll बनाम नतीजे NDA जीत Voter list manipulation इंडिया गठबंधन चुनाव आयोग सवाल चुनाव धांधली आरोप चुनाव पारदर्शिता चुनाव बहिष्कार मांग चुनावी धांधली बिहार चुनाव 2025 बिहार चुनाव नतीजे बिहार राजनीति विश्लेषण बिहार विधानसभा चुनाव बीजेपी सरकार आलोचना बैलेट पेपर चुनाव महागठबंधन आरोप महाराष्ट्र चुनाव धांधली संदर्भ लोकतंत्र संकट विपक्ष आरोप वोट चोरी आरोप स्ट्रांग रूम CCTV विवाद
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

रामनवमी, उत्सव से टकराव तक: बदलता सामाजिक माहौल और राजनीतिक संदर्भ

सिनेमा पर पहरा: ‘संवेदनशीलता’ के नाम पर सच से डरती सत्ता

अक्सर बलात्कारी ‘हिंदू राष्ट्र’और हिंदुत्व की विचारधारा वाले ही क्यों ?

जमानत पर बाहर आए जुनैद–नासिर के हत्यारे मोनू मानेसर का ढोल-नगाड़ों से स्वागत

क्या ईरान पर हमले के बाद बदल गया पश्चिम एशिया का खेल?

“क्या भारत को तेल खरीदने के लिए भी अब ‘इजाज़त’ लेनी पड़ेगी?”

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • 193 सांसद, फिर भी खारिज -क्या संसद में जवाबदेही भी “वैकल्पिक” हो गई है?
  • सीमा सुरक्षा या खतरनाक प्रयोग? ‘सांप-मगरमच्छ’ प्रस्ताव पर गंभीर सवाल
  • स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
  • सीबीएसई पाठ्यक्रम पर फिर भड़की सियासी जंग
  • सथानकुलम से सुप्रीम कोर्ट तक- क्या हिरासत में मौतों पर सचमुच लगेगी लगाम?
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility