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- स्कूल में पढ़ाई या अंधविश्वास?
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- निशाने पर पत्रकार: डिजिटल सेंसरशिप, सत्ता और सवालों से डरती व्यवस्था
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Author: admin
हिंदू दुकानों से ही खरीदो: दिवाली, जो रोशनी और सौहार्द का पर्व मानी जाती है, इस बार महाराष्ट्र में राजनीति की स्याही से रंगी हुई दिख रही है। एनसीपी (अजित पवार गुट) के विधायक संग्राम जगताप ने एक सार्वजनिक रैली में जो कहा, उसने सियासत और समाज दोनों के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है: “दिवाली पर खरीदारी करते समय हमें देखना चाहिए कि पैसा और मुनाफ़ा सिर्फ़ हिंदुओं को मिले।” यह वाक्य न केवल एक राजनेता की असंवेदनशीलता दिखाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि धर्म की दीवारें अब सिर्फ़ सियासत की ज़मीन पर नहीं,…
युद्धविराम के एक दिन बाद गोलीबारी: क्या समझौता पहले से ही दरक गया? 13–14 अक्टूबर 2025 के बीच की मीडिया रिपोर्टों ने गाजा में एक चिंताजनक तस्वीर पेश की। मिस्र की मध्यस्थता में हुए एक अस्थायी युद्धविराम समझौते के महज एक दिन बाद ही गाजा के खान यूनिस और गाजा सिटी जैसे इलाकों में गोलीबारी की घटनाएं सामने आईं, जिनमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक सात फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। ये घटनाएं तब हुईं जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या यह समझौता…
आरएसएस बनाम सरकारी स्कूल: प्रियांक खड़गे की मांग सही, लेकिन क्या है रास्ता? कर्नाटक मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस को सरकारी शिक्षण संस्थानों से बाहर रखने की मांग उठाई है। यह मांग संवैधानिक तटस्थता के सिद्धांत पर खरी उतरती है, लेकिन इसका व्यावहारिक क्रियान्वयन राजनीतिक इच्छाशक्ति और एक स्पष्ट नीति के बिना नामुमकिन लगता है। आरएसएस को सरकारी स्कूलों से बाहर रखने की मांग बिलकुल सही है लेकिन क्या ये मुम्किन है?कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर एक संवेदनशील और बहुस्तरीय मुद्दा उठाया है —उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को राज्य के…
बागपत त्रासदी: उत्तर प्रदेश के बागपत में मौलाना की पत्नी और दो बेटियों की हत्या करने वाले दो नाबालिग छात्रों ने शिक्षा, अनुशासन और हिंसा के बीच की डरावनी दूरी को उजागर कर दिया है। उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले में शनिवार को हुई त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। एक मौलाना की पत्नी और उनकी दो नाबालिग बेटियां घर में मृत पाई गईं — और जब पुलिस जांच आगे बढ़ी तो खुलासा हुआ कि हत्या के पीछे दो नाबालिग छात्र ही शामिल हैं, जो उसी मौलाना से धार्मिक शिक्षा (तालीम) लिया करते थे।पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय…
घुसपैठ बनाम जनसंख्या वृद्धि: अमित शाह के दावे और आंकड़ों की सच्चाईकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि के पीछे ‘बड़े पैमाने पर घुसपैठ’ का दावा किया है। लेकिन क्या जनगणना और एनएफएचएस के आंकड़े इस दावे का समर्थन करते हैं, या यह सिर्फ एक नया राजनीतिक नैरेटिव है? 10 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘नरेंद्र मोहन स्मृति व्याख्यान’ में एक ऐसा बयान दिया जिसने देशभर में नई बहस छेड़ दी। शाह ने कहा कि भारत में मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि प्रजनन दर के कारण नहीं, बल्कि “बड़े पैमाने पर घुसपैठ” के कारण हुई…
दमोह घटना: भक्ति के नाम पर जबरन अपमान, सत्ता और समाज का सच एक युवक के जबरन पैर धोकर पानी पीने की घटना सिर्फ एक सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि भक्ति की राजनीति और संवैधानिक मूल्यों के बीच बढ़ती खाई का प्रतीक है। मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले से आया यह वीडियो — जिसमें एक युवक को कथित तौर पर पैर धोकर वही पानी पीने के लिए मजबूर किया गया — सिर्फ़ एक “गांव की घटना” नहीं है। यह उस मानसिकता की झलक है, जो समाज में “भक्ति” और “दंड” की सीमाओं को मिटा रही है। और सवाल यह भी है…
image source: dinamalar.com बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) ने राज्य की राजनीति में बड़ा तूफ़ान खड़ा कर दिया है। जहाँ चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को “पारदर्शी और व्यवस्थित सफ़ाई अभियान” बता रहा है, वहीं कांग्रेस का दावा है कि यह “सफ़ाई के नाम पर मतदाता अधिकारों की सफ़ाई” बन गया है। कांग्रेस के चुनाव निगरानी प्रकोष्ठ ईगल (EAGLE) ने इस पर जो आंकड़े जारी किए हैं, वे सिर्फ़ सवाल नहीं उठाते — बल्कि पूरे चुनावी ढांचे की विश्वसनीयता पर उंगली उठाते हैं। कांग्रेस का आरोप: 5 लाख डुप्लीकेट, 67 लाख नाम हटाए…
भूमिका: एक ट्वीट और शुरू हुई नई बहस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ट्वीट ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। ग़ज़ा शांति समझौते के पहले चरण का स्वागत करते हुए पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना की और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के “सशक्त नेतृत्व” की तारीफ़ की। कांग्रेस ने इस बयान को “नैतिक रूप से आपत्तिजनक” और “भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति से विचलन” बताया है। कांग्रेस का तर्क: ‘जनसंहार’ के बीच प्रशंसा क्यों? कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा: “मोदी…
सीजेआई पर हमला : मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर हुए जूता फेंकने के हमले ने भारत में बढ़ती नफ़रत, सोशल मीडिया ट्रोल संस्कृति और राजनीतिक चुप्पी को उजागर कर दिया है।यह घटना बताती है कि कैसे डिजिटल नफ़रत अब न्यायपालिका तक पहुँच चुकी है — और लोकतंत्र की जड़ों को हिला रही है। 1. घटना जिसने लोकतंत्र को झकझोर दिया 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर एक वकील ने जूता फेंक दिया।यह हमला जितना प्रतीकात्मक था, उससे कहीं ज़्यादा गंभीर उसका सामाजिक और राजनीतिक अर्थ था —एक ऐसी व्यवस्था में, जहाँ नफ़रत…
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक समरसता पर सीधा प्रहार करने वाले एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने असम भाजपा इकाई को नोटिस जारी किया है। मामला उस एआई-जनित वीडियो से जुड़ा है, जिसे 15 सितंबर 2025 को भाजपा असम के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से साझा किया गया था। वीडियो में यह दावा किया गया कि अगर भाजपा सत्ता से बाहर हो गई तो “मुसलमान असम पर कब्जा कर लेंगे।” यह वीडियो न सिर्फ साम्प्रदायिक विभाजन को हवा देने वाला प्रतीत हुआ, बल्कि चुनावी प्रक्रिया के लिए भी एक खतरनाक मिसाल बन गया — क्योंकि यह एक…