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एलान के 25 वर्ष पूरे होने पर एक नया क़दमआज से पूरे 25 साल पहले यानी 23 अक्तूबर 2000 को लातूर शहर से साप्ताहिक एलान की यात्रा शुरू हुई थी। उसवक़्त मक़सद था – अल्पसंख्यकों में सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक जागरूकता पैदा करना, उन्हें अपने हक़ोंके लिए तैयार करना और उनकी समस्याओं के हल के लिए मज़बूत आवाज़ बनना।यह सफर आसान नहीं था, लेकिन अल्लाह के फ़ज़्ल व करम और आप लोगों की दुआओं और मदद से एलान ने यहसाबित किया कि अगर इरादा नेक और जज़्बा सच्चा हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं।इन 25 सालों में एलान सिर्फ़ एक…

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दिल्ली में 13 अक्टूबर को आयोजित भाजपा सरकार के ‘दीपावली मंगल मिलन’ कार्यक्रम ने पत्रकारिता जगत में एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। अशोका होटल में हुए इस आयोजन में मुख्यमंत्री और कैबिनेट के सभी मंत्री मौजूद थे, लेकिन उर्दू मीडिया को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। ना किसी उर्दू अख़बार का निमंत्रण, ना किसी चैनल के पत्रकार की मौजूदगी। यह कदम एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। 🚫 भाषा नहीं, ‘पहचान’ का सवाल दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रचार निदेशालय द्वारा जारी निमंत्रण सूची में किसी उर्दू पत्रकार का नाम नहीं था। तथ्यप्रश्ननिहितार्थदिल्ली की…

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भारत में राजनीतिक प्रचार का सबसे शक्तिशाली हथियार अब सिर्फ़ भाषण या रैली नहीं रहे—बल्कि भ्रामक ग्राफ़िक्स, झूठे दावे और ग़ोदी मीडिया की गूंज बन चुके हैं। ताज़ा मामला इसका सटीक उदाहरण है: भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल, उसके आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय, और अन्य पार्टी नेताओं ने पूरे आत्मविश्वास से यह दावा किया कि “नीदरलैंड्स ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट जारी किया”। लेकिन हकीकत क्या है? यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। 🤥 फेक स्टोरी की रचना: ‘सरकार’ नहीं, ‘संघ की शाखा’ ने जारी किया टिकट ऑनलाइन वायरल हुए ग्राफ़िक में…

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image credit: wsj.com सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक फ़ैसले में उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत दर्ज कई मामलों को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “आपराधिक कानून बेगुनाहों को सताने का औज़ार नहीं हो सकता।” यह टिप्पणी केवल कुछ एफआईआर तक सीमित नहीं, बल्कि भारत में कानून के दुरुपयोग, धार्मिक असहिष्णुता और न्यायिक ज़िम्मेदारी पर एक व्यापक टिप्पणी है। 📅 मामले की पृष्ठभूमि: फतेहपुर की ‘सामूहिक धर्मांतरण’ की कहानी 🗣️ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: कानून की सीमाएं और न्याय की मर्यादा जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की दो-न्यायाधीशीय पीठ ने…

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विहिप के मंच से भाजपा सांसद की घोषणा : चाँदनी चौक के मैदान से उठा यह नारा—“दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ होगा”—एक बार फिर राजधानी की धड़कन तेज कर चुका है। विश्व हिन्दू परिषद के मंच से भाजपा सांसद की यह घोषणा न सिर्फ सांस्कृतिक गर्व की भाषा बोलती है, बल्कि राजनीति की सूक्ष्म चालों—पहचान, प्रतीक और चुनावी संदेश—का भी स्पष्ट संकेत देती है। पर सवाल ठोस है: क्या शहरों के नाम बदल देना देश के असली और बुनियादी संकटों—महँगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, बलात्कार और वोट चोरी—का इलाज है? या यह सिर्फ प्रतीकात्मक तमाशा है जो धुंधला कर देता है असली…

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दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक शतरंज गरमा गया है। एक ओर भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में अपने टेक्निकल मिशन को ‘भारत के दूतावास’ का दर्जा देकर तालिबान-नियंत्रित अफ़ग़ानिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को पुनर्जीवित करने का संकेत दिया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने क़तर में अफ़ग़ान तालिबान के साथ एक ‘गोपनीय समझौता’ कर अपने लिए एक नया, लेकिन जोखिम भरा रास्ता तैयार किया है। भारत का बड़ा क़दम: व्यावहारिक संबंधों की ओर विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, भारत ने अपने काबुल मिशन को आधिकारिक तौर पर ‘दूतावास’ का दर्जा दे दिया है। पाकिस्तान का रहस्यमय समझौता: तालिबान से…

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बुलडोज़र बाबा ने संभल की 30 साल पुराणी मस्जिद को मलबे में बदल दिया 1. संभल की घटना: एक अलग-थलग मामला नहींउत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में 30 साल पुरानी एक मस्जिद को प्रशासन ने “अवैध निर्माण” बताकर गिरा दिया। यह घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं, बल्कि उस लंबी श्रृंखला की कड़ी है जिसमें बीते कुछ वर्षों से बुलडोज़र सत्ता का प्रतीक बन गया है — कभी गरीबों के मकानों पर, तो कभी मुसलमानों के धार्मिक स्थलों पर। 2. कानून या सत्ता का प्रदर्शन?अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद सार्वजनिक पार्क की ज़मीन पर बनी थी और न्यायालय के आदेश…

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संघ से गुरुकुल तक: भगवा की आड़ में शोषण का साम्राज्य? 1. केरल आत्महत्या: एक आरएसएस पूर्व-सदस्य का गंभीर आरोप 2. महाराष्ट्र गुरुकुल कांड: एक नाबालिग छात्रा का दर्द 3. मध्य प्रदेश कॉलेज विवाद: एबीवीपी नेताओं पर अश्लील वीडियो बनाने का आरोप 4. एक साझा पैटर्न: उत्पीड़न — संरक्षण — और मौन 5. क्या विफल हो रही हैं व्यवस्थाएँ? 6. क्या चाहिए? — एक स्पष्ट आव्हान 7. निष्कर्ष: शर्मनाक चुप्पी तोड़ी जानी चाहिए Also read: केरल त्रासदी: एक इंजीनियर की आत्महत्या और आरएसएस पर यौन शोषण के गंभीर आरोप

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ट्रंप के बयान से मची कूटनीतिक हलचल: क्या भारत सचमुच रूस से तेल खरीदना बंद करेगा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे ने कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा” — अंतरराष्ट्रीय मंच पर न केवल हलचल मचा दी है, बल्कि भारत की ऊर्जा नीति और विदेश नीति की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। 1. भारत के ‘रणनीतिक संतुलन’ पर चोट? 2. राहुल गांधी का सीधा हमला: “मोदी ट्रंप से डरे हुए हैं” 3. विदेश मंत्रालय का ‘संतुलित जवाब’ 4. ट्रंप की रणनीति और मोदी की…

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केरल त्रासदी: 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर आनंदू अजी की आत्महत्या की ख़बर सिर्फ़ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है। यह भारत के सबसे प्रभावशाली सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों में से एक — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) — के भीतर झाँकने की एक खिड़की बन गई है। अपने अंतिम संदेश में आनंदू ने लिखा कि उनका बचपन आरएसएस की शाखाओं और शिविरों में हुए यौन शोषण से तबाह हुआ। यही आरोप अब एक राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है — संस्थागत जवाबदेही, बच्चों की सुरक्षा, और यौन अपराधों पर चुप्पी की संस्कृति को लेकर। घटना का क्रम: एक डिजिटल सुसाइड नोट से उठा तूफ़ान 9 अक्टूबर को…

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